कतरगांव | धर्मशाला के स्वामित्व को लेकर ग्राम बरलाय में एक ही समाज के दो पक्षों के बीच विवाद की स्थिति बनी। गांव के 71 परिवार वाले एक पक्ष का कहना है कि उन्होंने सन 1994 से हर फसल पर चंदा एकत्र कर गांवठान की भूमि पर धर्मशाला का निर्माण कराया था। इनके अनुसार भवन निर्माण में शासन से आंशिक अनुदान अवश्य मिला, लेकिन धर्मशाला का अधिकांश निर्माण ग्रामीणों की मेहनत, सहयोग व वर्षों की बचत से पूरा हुआ। उनका आरोप है कि दूसरे पक्ष के 17 परिवारों ने ग्राम पंचायत का सहारा लेते हुए धर्मशाला को पंचायत के नाम दर्ज कराने की मांग शासन से की है। बिना किसी जांच व पूर्व सूचना के पंचायत सचिव ने धर्मशाला के दोनों दरवाजों पर ताले भी लगवा दिए है। यह आरोप भी लगाया कि 31 साल की मेहनत से बनाए इस भवन को अब शासन के आदेश का हवाला देकर उनसे छीना जा रहा है। ग्रामीणों ने बताया वे भले ही अनपढ़ हो, लेकिन अपने समाज व भविष्य को ध्यान में रखते हुए उन्होंने यह धर्मशाला तैयार की थी ताकि सामाजिक कार्यक्रमों व जरूरतों के समय इसका उपयोग किया जा सके। विवाद की स्थिति को देखते हुए मौके पर राजस्व विभाग व पुलिस प्रशासन दल-बल के साथ पहुंचा। इससे गांव में भय व आक्रोश का माहौल बन गया। इस मामले में सीईओ रीना चौहान ने किसी प्रकार की टिप्पणी से इनकार कर दिया। फिलहाल गांव में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है और ग्रामीण न्याय की मांग को लेकर कलेक्टर कार्यालय जाने की तैयारी में है।


