समग्र शिक्षा योजना की अवधि बढ़ेगी:मार्च में हो रही पूरी , वोकेशनल पर जोर, समग्र शिक्षा योजना को लेकर केंद्र ने राज्यों से मांगा परामर्श

समग्र शिक्षा योजना की अवधि बढ़ेगी:मार्च में हो रही पूरी , वोकेशनल पर जोर, समग्र शिक्षा योजना को लेकर केंद्र ने राज्यों से मांगा परामर्श

मार्च 2026 में समाप्त हो रही समग्र शिक्षा की अवधि बढ़ेगी। केंद्र सरकार इस संबंध में निर्णय लेगी। नए वर्ष में इस प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट में रखा जाएगा। इसमें यह देखना महत्वपूर्ण है कि यह योजना एक साल के लिए बढ़ाई जाती है या फिर पांच वर्ष के लिए इसे अवधि विस्तार मिलता है। समग्र शिक्षा की योजना 1 अप्रैल, 2021 से 31 मार्च, 2026 तक के लिए थी। इसका उद्देश्य कक्षा 1 से 12वीं तक के सभी छात्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के लक्ष्यों को प्राप्त करना है। अब जब इस योजना की वर्तमान अवधि मार्च 2026 में समाप्त हो रही है तो केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इस संबंध में झारखंड समेत सभी राज्यों से परामर्श मांगा है। ऐसे में यह लगभग निश्चित है कि इसे आगे बढ़ाया जाएगा। संभावना यह भी है कि इस योजना का नाम बदला जाएगा। इस बार योजना में वोकेशनल शिक्षा पर जोर रहेगा। अधिकतर स्कूलों को वोकेशनल पाठ्यक्रम से जोड़ा जाएगा। छात्रों को इसमें नामांकन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। हालांकि राज्य के कई स्कूलों में अभी भी वोकेशनल शिक्षा चल रही है। पर अगले शैक्षणिक वर्ष से ऐसे स्कूलों की संख्या बढ़ाई जाएगी। डिजिटल बोर्ड, स्मार्ट कक्षाओं और वर्चुअल क्लास रूम वाले स्कूलों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। झारखंड सरकार का परामर्श… स्कूल ड्रेस के पैसे और किताबों पर खर्च बढ़ाएं
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने केंद्र सरकार को परामर्श दिया है कि वह आठवीं तक के बच्चों को मिलने वाले स्कूल ड्रेस के पैसे बढ़ाए। दोगुना वृद्धि करने का सुझाव दिया गया है। पहली से पांचवीं कक्षा तक के हर विद्यार्थी को दो सेट पोशाक, स्वेटर व जूते-मोजे के लिए 600 रुपए दिए जाते हैं। छठी से आठवीं के छात्रों को दो सेट पोशाक के लिए 400 रुपए, स्वेटर के लिए 200 रुपए और जूते-मोजे के लिए 160 रुपए दिए जाते हैं। छठी से आठवीं तक के छात्रों के जूते-मोजे की पूरी राशि राज्य सरकार देती है। 9वीं से लेकर 12वीं तक के बच्चों के लिए राज्य योजना मद से 1200 रुपए दिए जाते हैं। यदि केंद्र ने परामर्श मान लिया, तो आठवीं तक के बच्चों को पोशाक के लिए 1200 रुपए मिलेंगे। किताबों पर खर्च बढ़ाने के बारे में भी परामर्श दिया गया है। कहा गया है कि कम पैसों के आवंटन के कारण किताबों की छपाई कम हो पाती है। इस पर खर्च बढ़ने से सभी छात्रों को ससमय किताबें मिलने लगेंगी। वोकेशनल टीचरों को बढ़ाने का भी सुझाव
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से राज्य में वोकेशनल टीचरों की संख्या बढ़ाने की बात कही गई है। इन शिक्षकों की कमी के कारण ही वोकेशनल पाठ्यक्रम का विस्तार होने में परेशानियां आ रही हैं। यहां उल्लेखनीय है कि इसी सप्ताह लगे जॉब फेयर में करीब 450 वोकेशनल छात्रों का विभिन्न कंपनियों में प्लेसमेंट हुआ है। फरवरी में दो हजार करोड़ रु. से अधिक का बन सकता है जेईपीसी का बजट
समग्र शिक्षा योजना अंतर्गत झारखंड शिक्षा परियोजना को चालू वित्तीय वर्ष में केंद्र और राज्य को मिलाकर कुल 1500 करोड़ रुपए मिलने हैं। इनमें से 900 करोड़ केंद्र से और 600 करोड़ रुपए राज्य से मिलेंगे। अब तक लगभग 460 करोड़ रुपए मिले हैं। अगले वर्ष के लिए जेईपीसी का बजट फरवरी में बनेगा। पर, मिली जानकारी के अनुसार जेईपीसी 2000 करोड़ से अधिक राशि चाहता है। पारा टीचर के मानदेय में लगातार हिस्सेदारी कम करता जा रहा केंद्र
पारा टीचर के मानदेय में केंद्र सरकार अपनी हिस्सेदारी लगातार कम कर रही है। प्रत्येक वर्ष इसमें 10 प्रतिशत की कटौती जारी है। केवल पारा टीचर के मानदेय पर ही प्रत्येक वर्ष करीब 1300 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। केंद्र सरकार की मंशा है कि वह सिर्फ योजनाओं के लिए पैसे देगा, मानदेय के लिए नहीं देगा। मार्च 2026 में समाप्त हो रही समग्र शिक्षा की अवधि बढ़ेगी। केंद्र सरकार इस संबंध में निर्णय लेगी। नए वर्ष में इस प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट में रखा जाएगा। इसमें यह देखना महत्वपूर्ण है कि यह योजना एक साल के लिए बढ़ाई जाती है या फिर पांच वर्ष के लिए इसे अवधि विस्तार मिलता है। समग्र शिक्षा की योजना 1 अप्रैल, 2021 से 31 मार्च, 2026 तक के लिए थी। इसका उद्देश्य कक्षा 1 से 12वीं तक के सभी छात्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाना और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के लक्ष्यों को प्राप्त करना है। अब जब इस योजना की वर्तमान अवधि मार्च 2026 में समाप्त हो रही है तो केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने इस संबंध में झारखंड समेत सभी राज्यों से परामर्श मांगा है। ऐसे में यह लगभग निश्चित है कि इसे आगे बढ़ाया जाएगा। संभावना यह भी है कि इस योजना का नाम बदला जाएगा। इस बार योजना में वोकेशनल शिक्षा पर जोर रहेगा। अधिकतर स्कूलों को वोकेशनल पाठ्यक्रम से जोड़ा जाएगा। छात्रों को इसमें नामांकन के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। हालांकि राज्य के कई स्कूलों में अभी भी वोकेशनल शिक्षा चल रही है। पर अगले शैक्षणिक वर्ष से ऐसे स्कूलों की संख्या बढ़ाई जाएगी। डिजिटल बोर्ड, स्मार्ट कक्षाओं और वर्चुअल क्लास रूम वाले स्कूलों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। झारखंड सरकार का परामर्श… स्कूल ड्रेस के पैसे और किताबों पर खर्च बढ़ाएं
स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने केंद्र सरकार को परामर्श दिया है कि वह आठवीं तक के बच्चों को मिलने वाले स्कूल ड्रेस के पैसे बढ़ाए। दोगुना वृद्धि करने का सुझाव दिया गया है। पहली से पांचवीं कक्षा तक के हर विद्यार्थी को दो सेट पोशाक, स्वेटर व जूते-मोजे के लिए 600 रुपए दिए जाते हैं। छठी से आठवीं के छात्रों को दो सेट पोशाक के लिए 400 रुपए, स्वेटर के लिए 200 रुपए और जूते-मोजे के लिए 160 रुपए दिए जाते हैं। छठी से आठवीं तक के छात्रों के जूते-मोजे की पूरी राशि राज्य सरकार देती है। 9वीं से लेकर 12वीं तक के बच्चों के लिए राज्य योजना मद से 1200 रुपए दिए जाते हैं। यदि केंद्र ने परामर्श मान लिया, तो आठवीं तक के बच्चों को पोशाक के लिए 1200 रुपए मिलेंगे। किताबों पर खर्च बढ़ाने के बारे में भी परामर्श दिया गया है। कहा गया है कि कम पैसों के आवंटन के कारण किताबों की छपाई कम हो पाती है। इस पर खर्च बढ़ने से सभी छात्रों को ससमय किताबें मिलने लगेंगी। वोकेशनल टीचरों को बढ़ाने का भी सुझाव
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय से राज्य में वोकेशनल टीचरों की संख्या बढ़ाने की बात कही गई है। इन शिक्षकों की कमी के कारण ही वोकेशनल पाठ्यक्रम का विस्तार होने में परेशानियां आ रही हैं। यहां उल्लेखनीय है कि इसी सप्ताह लगे जॉब फेयर में करीब 450 वोकेशनल छात्रों का विभिन्न कंपनियों में प्लेसमेंट हुआ है। फरवरी में दो हजार करोड़ रु. से अधिक का बन सकता है जेईपीसी का बजट
समग्र शिक्षा योजना अंतर्गत झारखंड शिक्षा परियोजना को चालू वित्तीय वर्ष में केंद्र और राज्य को मिलाकर कुल 1500 करोड़ रुपए मिलने हैं। इनमें से 900 करोड़ केंद्र से और 600 करोड़ रुपए राज्य से मिलेंगे। अब तक लगभग 460 करोड़ रुपए मिले हैं। अगले वर्ष के लिए जेईपीसी का बजट फरवरी में बनेगा। पर, मिली जानकारी के अनुसार जेईपीसी 2000 करोड़ से अधिक राशि चाहता है। पारा टीचर के मानदेय में लगातार हिस्सेदारी कम करता जा रहा केंद्र
पारा टीचर के मानदेय में केंद्र सरकार अपनी हिस्सेदारी लगातार कम कर रही है। प्रत्येक वर्ष इसमें 10 प्रतिशत की कटौती जारी है। केवल पारा टीचर के मानदेय पर ही प्रत्येक वर्ष करीब 1300 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। केंद्र सरकार की मंशा है कि वह सिर्फ योजनाओं के लिए पैसे देगा, मानदेय के लिए नहीं देगा।  

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