26/11 के आतंकवादी हमले… आचार्य प्रशांत का Dhurandhar के रहमान डकैत पर फूटा गुस्सा

26/11 के आतंकवादी हमले… आचार्य प्रशांत का Dhurandhar के रहमान डकैत पर फूटा गुस्सा

Acharya Prashant Statement On Dhurandhar: बॉलीवुड के एक्टर रणवीर सिंह, अर्जुन रामपाल, संजय दत्त और अक्षय खन्ना स्टारर स्पाई थ्रिलर फिल्म ‘धुरंधर‘ बॉक्स ऑफिस पर रिलीज के दिन से ही लगातार शानदार प्रदर्शन कर रही है और फिल्म ने भारत में 400 करोड़ से ज्यादा और विश्वभर में 600 करोड़ से ऊपर का कारोबार किया है। सोशल मीडिया पर फिल्म के सभी कलाकारों की खूब तारीफ हो रही है, खासकर अक्षय खन्ना के जरिए निभाए गए रहमान डकैत के किरदार ने दर्शकों का दिल जीत लिया है, तो दूसरी ओर सोशल मीडिया पर हर रील में इसी किरदार की झलक देखने को मिल रही है।

Dhurandhar के रहमान डकैत पर फूटा गुस्सा

बता दें, आचार्य प्रशांत को फिल्म ‘धुरंधर’ खासा पसंद नहीं आया है और उन्होंने इस ट्रेंड पर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए कहा, “फिल्म में जो किरदार सेलिब्रेट किए जा रहे हैं, वे वही लोग हैं जिन्होंने 26/11 के आतंकवादी हमले किए थे। ये हमले भारत और खासतौर पर मुंबई की जनता के लिए बेहद विनाशकारी थे। फिर भी लोग उनके किरदारों की रील बनाकर इंजॉय कर रहे हैं, जबकि ये आतंक फैलाने वाले लोग थे। इस पर खुद को देशप्रेमी कहना कितना उचित और सही है?”

Dhurandhar
आचार्य प्रशांत ने Dhurandhar के रहमान डकैत पर कहा (सोर्स: X)

इतना ही नहीं, आचार्य प्रशांत ने आगे सवाल उठाया कि फिल्म के लिए खर्च किए गए करोड़ों रुपये का प्रॉफिट मुंबई के आतंकवादी हमलों के पीड़ितों तक पहुंचता है या नहीं। उन्होंने आगे कहा, “फिल्म ने 500 करोड़ का बिजनेस किया है। क्या इस पैसे का कोई हिस्सा उन परिवारों को मिला जो इन हमलों में अपने रिश्तेदारों को खो चुके हैं? इस साल भी आतंकी हमले हुए हैं, फिर क्यों हम अपना पैसा सही फंड और विक्टिम्स तक नहीं पहुंचाते? भारत के पास संसाधन हैं, लेकिन हम सही दिशा नहीं जानते, हमे ये समझना चाहिए”

आचार्य प्रशांत का संदेश देशवासियों के लिए

बता दें, आचार्य प्रशांत का संदेश देशवासियों के लिए एक सोचने योग्य चुनौती है कि फिल्मों और एंटरटेनमेंट को हमारी संवेदनाओं और देशभक्ति के साथ संतुलित कैसे रखा जाए। ये मामला ना केवल फिल्म उद्योग इंडस्ट्रीज के लिए बल्कि समाज के लिए भी महत्वपूर्ण सवाल खड़ा करता है। ये खबर फिल्म और उसके सामाजिक प्रभाव के बीच सवालों को पूरी ईमानदारी के साथ सामने लाती है, ताकि दर्शक समझ सके कि किसी फिल्म के प्रति हमारा नजरिया और उसका आधिकारिक समर्थन किस सीमा तक उचित है।

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