इंदौर में पिछले कई दिनों से सराफा चौपाटी का मामला गरमाया हुआ है। यहां पर 69 दुकानों को ही परमिशन दी गई है। नगर निगम ने इन्हें नंबर भी अलॉट कर दिए हैं। हालांकि एमआईसी मेंबर निरंजन सिंह चौहान का कहना है कि दुकानों की संख्या सराफा चौपाटी एसोसिएशन के पदाधिकारियों और सराफा व्यापारी एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बनाई है। कई चौपाटी वाले मिले, प्रतिवेदन देने को कहा कई चौपाटी वाले आकर मिले हैं। इसके अलावा भी वे कई जनप्रतिनिधियों से मिले हैं। जिन चौपाटी वालों का कहना है कि उनकी दुकानें सालों पुरानी है, मगर उनका 69 दुकानों में नाम नहीं है। ऐसे चौपाटी वालों को कहा गया है कि वे नगर निगम में प्रतिवेदन दें। जांच कराएंगे, दुकानदारों से पूछताछ भी करेंगे वे बोले कि जो चौपाटी व्यापारी प्रतिवेदन देंगे उन दुकानों की जांच करवाई जाएगी। ये पता किया जाएगा कि वाकई उनकी दुकानें कितने सालों से यहां लग रही है। इसके साथ ही आसपास के दुकानदारों से भी जानकारी ली जाएगी। जिसके बाद इस पर निर्णय लिया जाएगा। कई चौपाटी वालों ने अपनी चौपाटी को सालों पुराना बताया है। उन्होंने बताया कि जिन्हें यहां पर जगह नहीं मिलेगी उन्हें सराफा के आसपास के इलाके में ही अपना व्यापार चलाने के लिए जगह दी जाएगी। नगर निगम की टीम व अधिकारी भी पहुंचे थे सराफा चौपाटी में 69 दुकानों की सूची सामने आई। उसके बाद नगर निगम की टीम और अधिकारी रात में सराफा चौपाटी पहुंचे थे और उन ही चौपाटी वालों को सराफा में एंट्री दी गई, जिनके नाम सूची में थे। बाकियों को एंट्री देने से मना कर दिया गया था। इस दौरान उन्होंने हंगामा भी किया था।, जिसके बाद उन्हें समझाइश भी दी गई थी। तब कही जाकर मामला शांत हो सका था। हंगामे के अगले दिन चौपाटी वाले महापौर से भी मिलने गए थे। हालांकि मामले में महापौर ने कहा था कि जिन्हें जगह मिली है उनके लिए दूसरी जगह व्यवस्था की जाएगी। एमआईसी मेंबर ने भी किया था दौरा शनिवार को ही एमआईसी मेंबर निरंजन सिंह चौहान ने सराफा चौपाटी का दौरा किया था। यहां उन्होंने अलग-अलग दुकान संचालकों से चर्चा की। जिन दुकानों पर पिज्जा-बर्गर, पावभाजी, वेज पुलाव बेचा जा रहा था उन्हें ये सब नहीं बेचने के लिए कहा गया था।


