926 करोड़ का एलिवेटेड प्रोजेक्ट, शहर बना डस्ट ज़ोन, फूलबाग से कमानी पुल तक सांस लेना मुश्किल

926 करोड़ का एलिवेटेड प्रोजेक्ट, शहर बना डस्ट ज़ोन, फूलबाग से कमानी पुल तक सांस लेना मुश्किल

फूलबाग से गिरवाई तक फैले इस मेगा प्रोजेक्ट के नाम पर हर गली-नुक्कड़ में सिर्फ धूल ही धूल उड़ रही है

करोड़ों की लागत से बन रहा एलिवेटेड रोड फिलहाल शहरवासियों के लिए राहत नहीं, बल्कि रोजाना की दुविधा बन गया है। फूलबाग से गिरवाई तक फैले इस मेगा प्रोजेक्ट के नाम पर हर गली-नुक्कड़ में सिर्फ धूल ही धूल उड़ रही है। लोग घर से बाहर निकलते ही मुंह-नाक ढकने को मजबूर, आंखें जल रही हैं, सांस फूल रही है, लेकिन अफसरों को विकास की चिंता ज्यादा है। फूलबाग स्थित महारानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल से लेकर गुरुद्वारा, नदी गेट, शिंदे की छावनी, छप्परवाले पुल, कॉर्मल स्कूल रोड, जीवाजीगंज, नई सडक़, कमानी पुल और समाधिया कॉलोनी से गिरवाई तक हर तरफ उड़ती धूल से लोग परेशान हैं और आसपास के एरिया व सडक़ पर पानी छिडक़ाव की मांग कर रहे है।

धूल का कहर : फूलबाग से कमानी पुल तक हर जगह मंजर एक जैसा
फूलबाग स्थित महारानी लक्ष्मीबाई समाधि स्थल से लेकर गुरुद्वारा, नदी गेट, शिंदे की छावनी, छप्परवाले पुल, कॉर्मल स्कूल रोड, जीवाजीगंज, नई सडक़, कमानी पुल और समाधिया कॉलोनी से गिरवाई तक पूरी पट्टी धूल की चादर ओढ़े बैठी है। निर्माण के दौरान खुदाई, मशीनरी और मटेरियल की आवाजाही से धूल का ऐसा गुबार कि दिन में भी अंधेरा छा जाता है। लोग घरों में बंद रहने को मजबूर, बच्चे-बूढ़े-बीमार सबसे ज्यादा परेशान। जहां ‘सुविधा’ के नाम पर एलिवेटेड रोड बन रहा है, वहीं फिलहाल दुविधा और बीमारी का साम्राज्य कायम है।

करोड़ों का प्रोजेक्ट, लेकिन प्रबंधन ढीला
यह महत्वाकांक्षी परियोजना पीएनसी इंफ्राटेक लिमिटेड द्वारा बनाई जा रही है। गिरवाई पुलिस चौकी से फूलबाग तक 7.42 किमी लंबे और 19.50 मीटर चौड़े एलिवेटेड कॉरिडोर पर 926.21 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं। प्रोजेक्ट की शुरुआत 26 जून 2024 को हुई थी और इसे 19 नवंबर 2027 तक पूरा किया जाना है। इसमें 14 लूप बनाए जाएंगे।लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के पर्याप्त इंतजाम नजर नहीं आ रहे। पानी का छिडक़ाव सीमित है और खुदाई के बाद मलबा खुला पड़ा रहता है।

प्रोजेक्ट की हकीकत : 15 पीयर कैप बन चुके, धूल कंट्रोल जीरो
फूलबाग से नदी गेट तक सुपर स्ट्रक्चर के अंतर्गत पीयर कैप का काम जोरों पर है। अफसरों के मुताबिक कुल 33 पीयर कैप लगने हैं। अभी 15 बन चुके, 8 बन रहे हैं, बाकी के लिए मटेरियल भेजा जा रहा है। पीयर कैप के बाद गाडर रखे जाएंगे। रविवार को होटल क्लार्क के सामने जेसीबी से खुदाई का काम जारी रहा। लेकिन सवाल ये कि निर्माण तेज करने के चक्कर में धूल नियंत्रण पर कोई ध्यान क्यों नहीं, पानी का छिडक़ाव, कवर शीट या अन्य उपायों की कमी से शहर धूल भरी आंधी में तब्दील हो रहा है।

जनता का गुस्सा : विकास चाहिए, लेकिन धूल-धक्कड़ नहीं!
शहरवासी चिल्ला रहे हैं कि 926 करोड़ खर्च कर सडक़ ऊपर बना रहे हो, लेकिन नीचे की जिंदगी को धूल में दबा रहे हो। स्वास्थ्य पर असर, ट्रैफिक जाम, दुर्घटनाओं का खतरा बढ़ रहा है। क्या विकास सिर्फ कागजों पर अच्छा लगता है, या हकीकत में भी लोगों की सेहत और सुविधा का ख्याल रखा जाएगा।

शहर में अभी जगह-जगह धूल उड़ रही है। फूलबाग पर तो स्थिति काफी खराब है। जिम्मेदार विभाग को जहां पर धूल अधिक है उस क्षेत्र में लगातार पानी का छिडक़ाव कराना चाहिए और शहरवासियों को भी ऐसे स्थानों पर जाने से पहले मास्क का उपयोग जरुर करना चाहिए। कोई भी प्रोजेक्ट को शुरू करने से पहले ग्रीन पर्दा अथवा ढंककर ही निर्माण कार्य कराना चाहिए।
डॉ अनीश पाण्डे, पर्यावरण विशेषज्ञ

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