900 KM की पदयात्रा! बृजभूषण शरण सिंह के लिए उज्जैन के महाकाल से गोंडा तक पदयात्रा, जानिए कौन है हेमंत सूर्यवंशी

900 KM की पदयात्रा! बृजभूषण शरण सिंह के लिए उज्जैन के महाकाल से गोंडा तक पदयात्रा, जानिए कौन है हेमंत सूर्यवंशी

महाराष्ट्र के हेमंत सूर्यवंशी ने आस्था और समर्पण की ऐसी मिसाल पेश की, जिसने हर किसी का ध्यान खींच लिया। उन्होंने पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के प्रति सम्मान जताने के लिए उज्जैन से उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले तक करीब 900 किलोमीटर की पैदल यात्रा पूरी की।

महाराष्ट्र के रहने वाले हेमंत सूर्यवंशी की यह पदयात्रा इन दिनों पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है। हेमंत ने बताया कि पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के प्रति उनके मन में गहरा सम्मान और स्नेह है। इसी भावना के चलते उन्होंने एक कठिन लेकिन भावनात्मक सफर करने का निर्णय लिया।

बृजभूषण सिंह के जन्मदिन से शुरू की यात्रा

हेमंत सूर्यवंशी ने 8 जनवरी को बृजभूषण शरण सिंह के जन्मदिन के अवसर पर मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित श्री महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन किए। यहां उन्होंने भगवान महाकाल से बृजभूषण शरण सिंह के स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की। दर्शन के बाद उन्होंने पैदल ही उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के विश्नोहरपुर गांव की ओर अपनी यात्रा शुरू कर दी।

पदयात्रा के दौरान बृजभूषण सिंह की तस्वीर हाथों में लेकर चले

करीब 900 किलोमीटर की इस लंबी पदयात्रा के दौरान हेमंत सूर्यवंशी ने पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह की एक तस्वीर हमेशा अपने साथ रखी। हेमंत का कहना है कि इसी तस्वीर की वजह से रास्ते में लोगों का उन्हें भरपूर सहयोग मिला। कई जगहों पर स्थानीय लोगों ने उनके ठहरने, खाने-पीने और आराम की व्यवस्था की। अजनबी लोग भी उनके उद्देश्य को जानकर मदद के लिए आगे आए।
हेमंत ने बताया कि यात्रा आसान नहीं थी। लेकिन लोगों का प्यार और सहयोग उन्हें लगातार आगे बढ़ने की ताकत देता रहा। दिन-रात पैदल चलने के बावजूद उनका उत्साह कभी कम नहीं हुआ।

विश्नोहरपुर पहुंचते ही हेमंत सूर्यवंशी का हुआ भव्य स्वागत

जब हेमंत सूर्यवंशी अपनी पदयात्रा पूरी कर विश्नोहरपुर पहुंचे, तो वहां उनका भव्य स्वागत किया गया। पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह के बड़े बेटे और विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने उनका स्वागत करते हुए उनके समर्पण की खुले दिल से सराहना की। प्रतीक भूषण सिंह ने कहा कि आज के समय में इस तरह की निष्ठा और श्रद्धा बहुत कम देखने को मिलती है। हेमंत सूर्यवंशी की यह यात्रा लोगों के लिए प्रेरणा बन गई

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