विवाहिता से दरिंदगी मामले में अब तक 9 आरोपी गिरफ्तार:वीडियो वायरल करने वालों पर शिकंजा; 5 यूट्यूबर चिन्हित, 2 अलग-अलग मामला दर्ज

विवाहिता से दरिंदगी मामले में अब तक 9 आरोपी गिरफ्तार:वीडियो वायरल करने वालों पर शिकंजा; 5 यूट्यूबर चिन्हित, 2 अलग-अलग मामला दर्ज

नालंदा में शादीशुदा महिला के साथ गैंगरेप की कोशिश मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। इस मामले में अब तक 9 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। अपराध अनुसंधान विभाग (कमजोर वर्ग) के अपर पुलिस महानिदेशक डॉ. अमित कुमार जैन ने बताया कि पुलिस इस संवेदनशील कांड में वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है। घटना बीते 26 मार्च की रात की है। जब तीन बच्चों की मां और अकेले रह रही महिला के साथ असामाजिक तत्वों ने अभद्रता और हिंसा की। अगले ही दिन नूरसराय थाना में कांड दर्ज किया गया, जिसमें शुरुआत में विभिन्न धाराओं के तहत तीन लोगों को नामजद किया गया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सदर-2 के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया और एक महिला पुलिस पदाधिकारी को अनुसंधान की जिम्मेदारी सौंपी गई। जांच के दौरान पीड़िता ने छेड़खानी और दुष्कर्म के प्रयास के गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद पुलिस ने मामले में धारा 70(1) और 62 बीएनएस सहित आईटी एक्ट की कड़ी धाराएं जोड़ दी हैं।
एक आरोपी ने कोर्ट में किया सरेंडर पुलिस की कार्रवाई अब तक काफी प्रभावी रही है। नामजद तीन अभियुक्तों में से दो को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया है। इसके अलावा, घटना के वीडियो फुटेज के आधार पर छह अन्य सह अभियुक्तों की पहचान कर उन्हें भी दबोच लिया गया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से चार मोबाइल जब्त किए हैं। जांच के लिए एफएसएल लैब भेजा गया है, ताकि तकनीकी साक्ष्य जुटाई जा सकी। फिलहाल चार अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। पीड़िता की पहचान उजागर करने और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने वालों के खिलाफ भी पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन करने के आरोप में साइबर थाने में दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करना गंभीर अपराध एडीजी ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि किसी भी पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करना एक गंभीर और दंडनीय अपराध है। बिहार पुलिस की सोशल मीडिया यूनिट लगातार निगरानी कर रही है और नोडल एजेंसी के माध्यम से आपत्तिजनक सामग्रियों को इंटरनेट से हटाया जा रहा है। पुलिस ने आम जनता से अपील करते हुए कहा कि ऐसे किसी भी वीडियो को साझा या फॉरवर्ड न करें, अन्यथा उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साइबर थाने में 2 अलग-अलग मामले दर्ज साइबर डीएसपी राघवेंद्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि दो अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। पांच यूट्यूबर के प्रोफाइल को चिन्हित किया गया है। जबकि इंडिविजुअल प्रोफाइल पर भी मामला दर्ज किया गया है। वैसे व्यक्ति जिन्होंने वीडियो को शेयर किया है, वह भी रडार में है। नालंदा में शादीशुदा महिला के साथ गैंगरेप की कोशिश मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। इस मामले में अब तक 9 आरोपियों की गिरफ्तारी हुई है। अपराध अनुसंधान विभाग (कमजोर वर्ग) के अपर पुलिस महानिदेशक डॉ. अमित कुमार जैन ने बताया कि पुलिस इस संवेदनशील कांड में वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित कर रही है। घटना बीते 26 मार्च की रात की है। जब तीन बच्चों की मां और अकेले रह रही महिला के साथ असामाजिक तत्वों ने अभद्रता और हिंसा की। अगले ही दिन नूरसराय थाना में कांड दर्ज किया गया, जिसमें शुरुआत में विभिन्न धाराओं के तहत तीन लोगों को नामजद किया गया था। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सदर-2 के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया और एक महिला पुलिस पदाधिकारी को अनुसंधान की जिम्मेदारी सौंपी गई। जांच के दौरान पीड़िता ने छेड़खानी और दुष्कर्म के प्रयास के गंभीर आरोप लगाए, जिसके बाद पुलिस ने मामले में धारा 70(1) और 62 बीएनएस सहित आईटी एक्ट की कड़ी धाराएं जोड़ दी हैं।
एक आरोपी ने कोर्ट में किया सरेंडर पुलिस की कार्रवाई अब तक काफी प्रभावी रही है। नामजद तीन अभियुक्तों में से दो को गिरफ्तार कर लिया गया है, जबकि एक ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया है। इसके अलावा, घटना के वीडियो फुटेज के आधार पर छह अन्य सह अभियुक्तों की पहचान कर उन्हें भी दबोच लिया गया है। पुलिस ने आरोपियों के पास से चार मोबाइल जब्त किए हैं। जांच के लिए एफएसएल लैब भेजा गया है, ताकि तकनीकी साक्ष्य जुटाई जा सकी। फिलहाल चार अन्य फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। पीड़िता की पहचान उजागर करने और सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक वीडियो वायरल करने वालों के खिलाफ भी पुलिस ने सख्त रुख अपनाया है। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों का उल्लंघन करने के आरोप में साइबर थाने में दो अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करना गंभीर अपराध एडीजी ने स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा है कि किसी भी पीड़िता की पहचान सार्वजनिक करना एक गंभीर और दंडनीय अपराध है। बिहार पुलिस की सोशल मीडिया यूनिट लगातार निगरानी कर रही है और नोडल एजेंसी के माध्यम से आपत्तिजनक सामग्रियों को इंटरनेट से हटाया जा रहा है। पुलिस ने आम जनता से अपील करते हुए कहा कि ऐसे किसी भी वीडियो को साझा या फॉरवर्ड न करें, अन्यथा उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साइबर थाने में 2 अलग-अलग मामले दर्ज साइबर डीएसपी राघवेंद्र मणि त्रिपाठी ने बताया कि दो अलग-अलग मामले दर्ज किए गए हैं। पांच यूट्यूबर के प्रोफाइल को चिन्हित किया गया है। जबकि इंडिविजुअल प्रोफाइल पर भी मामला दर्ज किया गया है। वैसे व्यक्ति जिन्होंने वीडियो को शेयर किया है, वह भी रडार में है।  

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