नालंदा विश्वविद्यालय में इंडिया थिंक टैंक फोरम का 8वां संस्करण:80 प्रतिभागी लेंगे हिस्सा, 2 दिनों तक चलेगा कार्यक्रम; भू-राजनीति, अर्थव्यवस्था पर मंथन

नालंदा विश्वविद्यालय में इंडिया थिंक टैंक फोरम का 8वां संस्करण:80 प्रतिभागी लेंगे हिस्सा, 2 दिनों तक चलेगा कार्यक्रम; भू-राजनीति, अर्थव्यवस्था पर मंथन

राजगीर में आज से इंडिया थिंक टैंक फोरम (ITTF) के आठवें संस्करण की शुरुआत हो रही है। विश्वविद्यालय और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। ज्ञान की प्राचीन भूमि पर नीति विमर्श विश्व के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में शुमार नालंदा में इस फोरम का आयोजन केवल एक संयोग नहीं है। यह चुनाव भारत की नीतिगत सोच में क्षेत्रीय विविधता और बौद्धिक विकेंद्रीकरण की जरूरत को रेखांकित करता है। यह संदेश स्पष्ट है कि देश की नीतियां सिर्फ राजधानी की चारदीवारी में नहीं, बल्कि देश के विभिन्न कोनों से उभरनी चाहिए। ‘आंतरिक दृढ़ता’ पर होगा मंथन इस बार के फोरम की थीम है ‘बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत: आंतरिक दृढ़ता का निर्माण’। वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल, आर्थिक अनिश्चितताओं और तकनीकी क्रांति के दौर में यह विषय अत्यंत प्रासंगिक है। फोरम का उद्देश्य केवल अकादमिक चर्चा नहीं, बल्कि ठोस और व्यावहारिक नीतिगत समाधान तक पहुंचना है। व्यापक एजेंडा दो दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में भू-राजनीति, अर्थव्यवस्था, सतत विकास, प्रौद्योगिकी और सामाजिक परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दशक की चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की नीतिगत संरचनाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है। देशभर के विचारकों का जमावड़ा इस फोरम में देश के 75 थिंक टैंकों से 80 से अधिक प्रतिष्ठित प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। ORF के अध्यक्ष समीर सरन, नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी, ORF के उपाध्यक्ष हर्ष वी. पंत, नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के महानिदेशक प्रदीप चौहान समेत देश के अनेक वरिष्ठ नीति विशेषज्ञ और विचारक इस मंच पर अपने विचार साझा करेंगे। केरल इंटरनेशनल सेंटर के महानिदेशक टी.पी. श्रीनिवासन, सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस के अध्यक्ष लवीश भंडारी, सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी रिसर्च के संस्थापक-अध्यक्ष डी. धनुराज सहित देश के अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रमुख भी इस फोरम में शिरकत कर रहे हैं। थिंक टैंकों की बढ़ती भूमिका ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन, जो अपने प्रमुख वार्षिक आयोजन रायसीना डायलॉग के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जानी जाती है, उसने इंडिया थिंक टैंक फोरम को एक ऐसे मंच के रूप में विकसित किया है। जहां नीति अनुसंधान संस्थान, शिक्षाविद और संस्थागत नेतृत्व एक साथ आकर देश की नीतिगत दिशा पर विचार-विमर्श करते हैं। नीति और कार्यान्वयन के बीच पुल इस फोरम की खासियत यह है कि यह सिर्फ विचारों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रहता। इसका उद्देश्य घरेलू तैयारियों और वैश्विक परिवर्तनों के बीच संबंध स्थापित करना और रणनीतिक दृष्टि के साथ नीति नवाचार को बढ़ावा देना है। राजगीर में आज से इंडिया थिंक टैंक फोरम (ITTF) के आठवें संस्करण की शुरुआत हो रही है। विश्वविद्यालय और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन (ORF) के संयुक्त तत्वावधान में दो दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। ज्ञान की प्राचीन भूमि पर नीति विमर्श विश्व के सबसे पुराने विश्वविद्यालयों में शुमार नालंदा में इस फोरम का आयोजन केवल एक संयोग नहीं है। यह चुनाव भारत की नीतिगत सोच में क्षेत्रीय विविधता और बौद्धिक विकेंद्रीकरण की जरूरत को रेखांकित करता है। यह संदेश स्पष्ट है कि देश की नीतियां सिर्फ राजधानी की चारदीवारी में नहीं, बल्कि देश के विभिन्न कोनों से उभरनी चाहिए। ‘आंतरिक दृढ़ता’ पर होगा मंथन इस बार के फोरम की थीम है ‘बदलते वैश्विक परिदृश्य में भारत: आंतरिक दृढ़ता का निर्माण’। वैश्विक स्तर पर जारी भू-राजनीतिक उथल-पुथल, आर्थिक अनिश्चितताओं और तकनीकी क्रांति के दौर में यह विषय अत्यंत प्रासंगिक है। फोरम का उद्देश्य केवल अकादमिक चर्चा नहीं, बल्कि ठोस और व्यावहारिक नीतिगत समाधान तक पहुंचना है। व्यापक एजेंडा दो दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में भू-राजनीति, अर्थव्यवस्था, सतत विकास, प्रौद्योगिकी और सामाजिक परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर गहन विचार-विमर्श होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दशक की चुनौतियों से निपटने के लिए भारत की नीतिगत संरचनाओं को और मजबूत करने की आवश्यकता है। देशभर के विचारकों का जमावड़ा इस फोरम में देश के 75 थिंक टैंकों से 80 से अधिक प्रतिष्ठित प्रतिभागी हिस्सा ले रहे हैं। ORF के अध्यक्ष समीर सरन, नालंदा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. सचिन चतुर्वेदी, ORF के उपाध्यक्ष हर्ष वी. पंत, नेशनल मैरीटाइम फाउंडेशन के महानिदेशक प्रदीप चौहान समेत देश के अनेक वरिष्ठ नीति विशेषज्ञ और विचारक इस मंच पर अपने विचार साझा करेंगे। केरल इंटरनेशनल सेंटर के महानिदेशक टी.पी. श्रीनिवासन, सेंटर फॉर सोशल एंड इकोनॉमिक प्रोग्रेस के अध्यक्ष लवीश भंडारी, सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी रिसर्च के संस्थापक-अध्यक्ष डी. धनुराज सहित देश के अनेक प्रतिष्ठित संस्थानों के प्रमुख भी इस फोरम में शिरकत कर रहे हैं। थिंक टैंकों की बढ़ती भूमिका ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन, जो अपने प्रमुख वार्षिक आयोजन रायसीना डायलॉग के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जानी जाती है, उसने इंडिया थिंक टैंक फोरम को एक ऐसे मंच के रूप में विकसित किया है। जहां नीति अनुसंधान संस्थान, शिक्षाविद और संस्थागत नेतृत्व एक साथ आकर देश की नीतिगत दिशा पर विचार-विमर्श करते हैं। नीति और कार्यान्वयन के बीच पुल इस फोरम की खासियत यह है कि यह सिर्फ विचारों के आदान-प्रदान तक सीमित नहीं रहता। इसका उद्देश्य घरेलू तैयारियों और वैश्विक परिवर्तनों के बीच संबंध स्थापित करना और रणनीतिक दृष्टि के साथ नीति नवाचार को बढ़ावा देना है।  

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