अशोकनगर में 8 आदिवासी हितग्राहियों को 16 भैंसें मिलीं:सिंधिया से शिकायत के बाद कार्रवाई; पशुपालन विभाग पारदर्शी तरीके से दे रहा

अशोकनगर में 8 आदिवासी हितग्राहियों को 16 भैंसें मिलीं:सिंधिया से शिकायत के बाद कार्रवाई; पशुपालन विभाग पारदर्शी तरीके से दे रहा

अशोकनगर में पशुपालन विभाग ने अति पिछड़े आदिवासी वर्ग के 8 हितग्राहियों को सब्सिडी पर 16 भैंसों का वितरण किया जा रहा है। यह वितरण शनिवार को कोलूआ रोड स्थित गौशाला में हो रहा है। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से शिकायत के बाद इस बार पूरी पारदर्शिता के साथ भैंसें बांटी गईं। पशुपालन विभाग के डॉक्टर संजय कौरव ने बताया कि दुधारू पशु योजना के तहत प्रत्येक हितग्राही को दो भैंसें दी जा रही हैं। वर्ष 2025-26 के लक्ष्य के तहत, एक भैंस की कीमत 1 लाख 10 हजार रुपए निर्धारित है, लेकिन हितग्राहियों से केवल 12 हजार 500 रुपए लिए गए हैं। योजना के अंतर्गत, वितरित की गई भैंसों का तीन साल का बीमा भी कराया गया है। इसके साथ ही, प्रत्येक हितग्राही को साढ़े चार क्विंटल पशु आहार भी उपलब्ध कराया जा रहा है। चयनित ठेकेदार द्वारा भैंसों को दूसरे राज्यों से खरीदा गया है। वितरण से पहले, निर्धारित शर्तों के अनुसार उनका दूध दोहन किया गया और पर्याप्त दूध देने वाली भैंसों को ही हितग्राहियों को दिया गया। हितग्राहियों का चयन मध्य प्रदेश राज्य आजीविका मिशन और जिला संयोजक आदिम जाति कल्याण विभाग के माध्यम से किया गया है। डॉ. कौरव ने जानकारी दी कि जिले में पिछले तीन सालों से भैंसों का वितरण किया जा रहा है। पहली बार 20, दूसरी बार 25 और इस वर्ष 30 भैंसों का लक्ष्य है। इससे पहले 10 भैंसों का वितरण हो चुका है, और इस बार दूसरी खेप में 16 भैंसें हितग्राहियों को दी गई हैं। दरअसल, भैंसों के वितरण को लेकर बीते दिनों केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया से शिकायत की गई थी। शिकायत में अपात्र हितग्राहियों को भैंसें दिए जाने का आरोप था, जिससे आदिवासियों को भैंस वितरण का मामला गरमा गया था। इसके बाद पशुपालन विभाग ने इस बार पूरी पारदर्शिता के साथ वितरण सुनिश्चित किया है। मुंगावली तहसील क्षेत्र के नहारगढ़ गांव निवासी राजू आदिवासी ने बताया कि उन्हें दो भैंसें मिली हैं। उन्होंने कहा कि वे इनका दूध बेचकर अपने परिवार का भरण-पोषण करेंगे। इसी तरह से और भी हितग्राहियों ने बताया की इन भैंसों का दूध बेचकर अपने परिवार का भरण पोषण करेंगे।

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