PF पर मिलता रहेगा 8.25% ब्याज:2025-26 के लिए दरों में बदलाव नहीं; जून से सितंबर के बीच खातों में आएगा पैसा

PF पर मिलता रहेगा 8.25% ब्याज:2025-26 के लिए दरों में बदलाव नहीं; जून से सितंबर के बीच खातों में आएगा पैसा

वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भी पीएफ पर 8.25% की दर से ही ब्याज मिलता रहेगा। सरकार ने ब्याज दरों में कोई बढ़ोतरी या कटौती नहीं की है। सेंट्रल बोर्ड ऑफ ट्रस्टीज के इस फैसले पर अब वित्त मंत्रालय की मुहर लगेगी, जिसके बाद कर्मचारियों के खातों में पैसा क्रेडिट होगा। जून से सितंबर के बीच खाते में आएगा ब्याज का पैसा आम तौर पर सीबीटी की घोषणा के कुछ महीनों बाद ब्याज की रकम खातों में जमा की जाती है। पिछले रिकॉर्ड को देखें तो यह पैसा हर साल जून से सितंबर के बीच क्रेडिट होता है। उदाहरण के लिए, वित्त वर्ष 2024-25 का ब्याज जुलाई 2025 में खातों में डाला गया था। हालांकि, इसकी कोई तय तारीख नहीं होती, इसलिए सब्सक्राइबर्स को समय-समय पर अपना बैलेंस चेक करते रहना चाहिए। देरी होने पर भी नहीं होगा ब्याज का नुकसान अक्सर सब्सक्राइबर्स को चिंता रहती है कि अगर ब्याज क्रेडिट होने में देरी होती है, तो क्या उन्हें नुकसान होगा? EPFO ने साफ किया है कि ब्याज क्रेडिट होने में देरी से मेंबर्स को कोई वित्तीय नुकसान नहीं होता है। नवंबर 2024 में बदले गए नियमों के मुताबिक, अब सेटलमेंट की तारीख तक का पूरा ब्याज दिया जाता है, जबकि पहले केवल पिछले महीने तक का ही ब्याज मिलता था। ‘पासबुक लाइट’ से चेक करें अपना बैलेंस EPFO ने बैलेंस चेक करने की प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए ‘पासबुक लाइट’ फीचर शुरू किया है: पिछले 5 सालों में की ब्याज दरें 1952 में 3% ब्याज से शुरुआत हुई थी 1952 में PF पर ब्याज दर केवल 3% थी। इसके बाद इसमें बढ़ोतरी होती गई। 1972 में यह 6% और 1984 में यह पहली बार 10% के ऊपर पहुंच गई। PF धारकों को 1989 से 1999 के दौरान 12% ब्याज मिलता था। इसके बाद ब्याज दर में गिरावट आनी शुरू हो गई। 1999 के बाद ब्याज दर कभी भी 10% के करीब नहीं पहुंची। 2001 के बाद से यह 9.50% के नीचे ही रही है। पिछले सात सालों से यह 8.5% या उससे कम रही है। फाइनेंशियल ईयर के आखिर में तय होती है ब्याज दर PF में ब्याज दर के फैसले के लिए सबसे पहले फाइनेंस इन्वेस्टमेंट एंड ऑडिट कमेटी की बैठक होती है। यह इस फाइनेंशियल ईयर में जमा हुए पैसों के बारे में हिसाब देती है। इसके बाद CBT की बैठक होती है। CBT के निर्णय के बाद वित्त मंत्रालय सहमति के बाद ब्याज दर लागू करता है। ब्याज दर पर फैसला फाइनेंशियल ईयर के आखिर में होता है।

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