अररिया के रानीगंज स्थित राजकीय आईटीआई में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत प्रशिक्षण पूरा करने वाले लाभार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस कार्यक्रम में कुल 65 युवाओं को स्वरोजगार के लिए तैयार होने का अवसर मिला। समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि सुधांशु कुमार, विशिष्ट अतिथि रवीन्द्र कुमार, रंजन मिश्रा और प्राचार्य राजीव कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया। संस्थान के शिक्षक, कर्मचारी और स्पॉक कर्मी इंद्रजीत कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना को एक महत्वाकांक्षी पहल बताया प्राचार्य राजीव कुमार ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना को एक महत्वाकांक्षी पहल बताया। उन्होंने कहा कि यह योजना उन पारंपरिक कारीगरों के लिए है जो अपने हाथों से निर्माण और सृजन का कार्य करते हैं। ये कारीगर समाज की रीढ़ हैं और इनके कौशल को मजबूत करके आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने वाले लाभार्थियों को टूल किट प्रदान की जाएगी। साथ ही, उन्हें कम ब्याज दर पर ऋण भी उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वे अपना स्वरोजगार शुरू कर सकें और आर्थिक रूप से सशक्त बनें। कुल 65 प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र दिए गए इस अवसर पर कुल 65 प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र दिए गए। इनमें बैच संख्या 06 (फिशिंग नेट मेकर) के 26, बैच संख्या 07 (ब्लैकस्मिथ) के 22 और बैच संख्या 08 (फिशिंग नेट मेकर) के 17 प्रशिक्षु शामिल थे। सभी लाभार्थी अररिया जिले के निवासी हैं। यह योजना लोहार, बढ़ई, सुनार और मछली जाल बनाने वाले जैसे पारंपरिक शिल्पकारों को लक्षित करती है। प्रशिक्षण के माध्यम से उनके कौशल को आधुनिक बनाया जा रहा है, जिससे वे बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकें। प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाले युवाओं ने खुशी व्यक्त की और कहा कि वे अब अपना छोटा व्यवसाय शुरू करने के लिए तैयार हैं। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत अररिया जिले में ऐसे कई बैच संचालित हो रहे हैं, जो ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहे हैं। यह कार्यक्रम आत्मनिर्भरता और कौशल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है। अररिया के रानीगंज स्थित राजकीय आईटीआई में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत प्रशिक्षण पूरा करने वाले लाभार्थियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। इस कार्यक्रम में कुल 65 युवाओं को स्वरोजगार के लिए तैयार होने का अवसर मिला। समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि सुधांशु कुमार, विशिष्ट अतिथि रवीन्द्र कुमार, रंजन मिश्रा और प्राचार्य राजीव कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया। संस्थान के शिक्षक, कर्मचारी और स्पॉक कर्मी इंद्रजीत कुमार सहित कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना को एक महत्वाकांक्षी पहल बताया प्राचार्य राजीव कुमार ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना को एक महत्वाकांक्षी पहल बताया। उन्होंने कहा कि यह योजना उन पारंपरिक कारीगरों के लिए है जो अपने हाथों से निर्माण और सृजन का कार्य करते हैं। ये कारीगर समाज की रीढ़ हैं और इनके कौशल को मजबूत करके आत्मनिर्भर भारत के सपने को साकार किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने वाले लाभार्थियों को टूल किट प्रदान की जाएगी। साथ ही, उन्हें कम ब्याज दर पर ऋण भी उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे वे अपना स्वरोजगार शुरू कर सकें और आर्थिक रूप से सशक्त बनें। कुल 65 प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र दिए गए इस अवसर पर कुल 65 प्रशिक्षणार्थियों को प्रमाण पत्र दिए गए। इनमें बैच संख्या 06 (फिशिंग नेट मेकर) के 26, बैच संख्या 07 (ब्लैकस्मिथ) के 22 और बैच संख्या 08 (फिशिंग नेट मेकर) के 17 प्रशिक्षु शामिल थे। सभी लाभार्थी अररिया जिले के निवासी हैं। यह योजना लोहार, बढ़ई, सुनार और मछली जाल बनाने वाले जैसे पारंपरिक शिल्पकारों को लक्षित करती है। प्रशिक्षण के माध्यम से उनके कौशल को आधुनिक बनाया जा रहा है, जिससे वे बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धा कर सकें। प्रमाण पत्र प्राप्त करने वाले युवाओं ने खुशी व्यक्त की और कहा कि वे अब अपना छोटा व्यवसाय शुरू करने के लिए तैयार हैं। प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना के तहत अररिया जिले में ऐसे कई बैच संचालित हो रहे हैं, जो ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहे हैं। यह कार्यक्रम आत्मनिर्भरता और कौशल विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत करता है।


