गोपालगंज में पिछले एक साल में 64,501 पासपोर्ट जारी किए गए हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि जिले के लोग रोजगार और उच्च शिक्षा के अवसरों की तलाश में बड़ी संख्या में विदेश का रुख कर रहे हैं। कभी मुख्य रूप से खेती पर निर्भर रहने वाला गोपालगंज अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। अधिकांश कामगार सऊदी अरब, कतर, ओमान और दुबई जैसे देशों में निर्माण, प्लंबिंग और इलेक्ट्रिकल जैसे क्षेत्रों में काम करने जा रहे हैं। कनाडा, यूरोप और रूस जैसे देशों का रुख कर रहे केवल श्रमिक ही नहीं, बल्कि युवा छात्र भी बेहतर उच्च शिक्षा के लिए कनाडा, यूरोप और रूस जैसे देशों का रुख कर रहे हैं। यह प्रवृत्ति युवाओं में देश के बजाय विदेश में अवसर तलाशने की बढ़ती इच्छा को दर्शाती है। पासपोर्ट आवेदनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने प्रक्रियाओं को सरल बनाया है। पुलिस सत्यापन और अन्य कागजी कार्रवाई में लगने वाला समय कम हुआ है, जिससे लोगों के लिए विदेश जाना आसान हो गया है। पासपोर्ट कार्यालय और स्थानीय पुलिस प्रशासन के प्रयासों से बड़ी संख्या में आवेदनों का निपटारा संभव हो सका है। बढ़ती प्रवृत्ति के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आई हालांकि, इस बढ़ती प्रवृत्ति के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। दलालों की सक्रियता बढ़ी है, जिससे फर्जी दस्तावेजों और ठगी के मामले भी बढ़े हैं। कई लोग अधिक पैसे कमाने की चाहत में ऐसे दलालों के चंगुल में फंस जाते हैं। बड़ी संख्या में युवाओं के पलायन से स्थानीय स्तर पर कुशल श्रमिकों की कमी महसूस की जा रही है। इसके बावजूद, विदेश से आने वाला धन जिले की अर्थव्यवस्था को काफी मजबूत कर रहा है। 64,501 आवेदनों का निष्पादन पूरी तरह से समयबद्ध और नियामानुसार किया गया इस संदर्भ में एसपी अवधेश दीक्षित ने बताया कि वर्ष 2025 में कुल 64,501 आवेदनों का निष्पादन पूरी तरह से समयबद्ध और नियामानुसार किया गया। पुलिस सत्यापन की गति में सुधार और डिजिटल निगरानी के कारण आवेदकों का पासपोर्ट क्लियरेंस हुआ है। गोपालगंज में पिछले एक साल में 64,501 पासपोर्ट जारी किए गए हैं। यह आंकड़ा दर्शाता है कि जिले के लोग रोजगार और उच्च शिक्षा के अवसरों की तलाश में बड़ी संख्या में विदेश का रुख कर रहे हैं। कभी मुख्य रूप से खेती पर निर्भर रहने वाला गोपालगंज अब वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है। अधिकांश कामगार सऊदी अरब, कतर, ओमान और दुबई जैसे देशों में निर्माण, प्लंबिंग और इलेक्ट्रिकल जैसे क्षेत्रों में काम करने जा रहे हैं। कनाडा, यूरोप और रूस जैसे देशों का रुख कर रहे केवल श्रमिक ही नहीं, बल्कि युवा छात्र भी बेहतर उच्च शिक्षा के लिए कनाडा, यूरोप और रूस जैसे देशों का रुख कर रहे हैं। यह प्रवृत्ति युवाओं में देश के बजाय विदेश में अवसर तलाशने की बढ़ती इच्छा को दर्शाती है। पासपोर्ट आवेदनों की बढ़ती संख्या को देखते हुए प्रशासन ने प्रक्रियाओं को सरल बनाया है। पुलिस सत्यापन और अन्य कागजी कार्रवाई में लगने वाला समय कम हुआ है, जिससे लोगों के लिए विदेश जाना आसान हो गया है। पासपोर्ट कार्यालय और स्थानीय पुलिस प्रशासन के प्रयासों से बड़ी संख्या में आवेदनों का निपटारा संभव हो सका है। बढ़ती प्रवृत्ति के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आई हालांकि, इस बढ़ती प्रवृत्ति के साथ कुछ चुनौतियां भी सामने आई हैं। दलालों की सक्रियता बढ़ी है, जिससे फर्जी दस्तावेजों और ठगी के मामले भी बढ़े हैं। कई लोग अधिक पैसे कमाने की चाहत में ऐसे दलालों के चंगुल में फंस जाते हैं। बड़ी संख्या में युवाओं के पलायन से स्थानीय स्तर पर कुशल श्रमिकों की कमी महसूस की जा रही है। इसके बावजूद, विदेश से आने वाला धन जिले की अर्थव्यवस्था को काफी मजबूत कर रहा है। 64,501 आवेदनों का निष्पादन पूरी तरह से समयबद्ध और नियामानुसार किया गया इस संदर्भ में एसपी अवधेश दीक्षित ने बताया कि वर्ष 2025 में कुल 64,501 आवेदनों का निष्पादन पूरी तरह से समयबद्ध और नियामानुसार किया गया। पुलिस सत्यापन की गति में सुधार और डिजिटल निगरानी के कारण आवेदकों का पासपोर्ट क्लियरेंस हुआ है।


