‘बाप रे बाप.., हम्मर बेटा मर गेलई हो बाप..। छोड़ के चल गेलई हो..। बेटा हम्मर बहुत तेज रहलई र हो..।’ छाती पीटकर विलाप कर रही इस महिला का नाम अनुराधा है। शुक्रवार देर रात हुए कार हादसे में मधेपुरा और सहरसा के चार युवकों की मौत हुई। इनमें इनका 22 साल का बेटा सागर कुमार शामिल था। रविवार को सागर का अंतिम संस्कार किया गया। शनिवार को तीन अन्य युवकों का अंतिम संस्कार हुआ। चारों की मौत मधेपुरा में उदाकिशुनगंज एनएच-106 पर अरार पुल के पास कार के सुरसर नदी में गिरने से हुई। हादसे के वक्त कार की रफ्तार करीब 140 km/h थी। रील्स बनाया जा रहा था। सड़क हादसे में मारे गए चारों युवक कौन थे? क्या करते थे? हादसा कैसे हुआ? इनके अंतिम संस्कार किस तरह हुए। पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट…। पहले जानिए कैसे हुआ हादसा, 140 km/h की रफ्तार से दौड़ रही थी कार
हादसा तेज रफ्तार गाड़ी में रील्स बनाने के कारण हुआ। मृतकों में एक घनश्याम 140km/h की स्पीड से चल रही कार में रील बना रहा था और फेसबुक लाइव कर रहा था। वह बार-बार स्पीडोमीटर पर फोकस कर रहा था। दुर्घटना के समय गाड़ी की रफ्तार ऐसी थी कि पुल से पहले सड़क किनारे के एक टेलीफोन को धक्का लगा और वहां से उछलकर गाड़ी सीधे नदी में गिरी। जिस जगह टेलीफोन का खंभा है, वहां से नदी की दूरी करीब 15 से 20 फीट है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि टेलीफोन खंभे के ऊपर होते हुए गाड़ी सीधे नदी में गई। दुर्घटना के बाद कार के सभी एयर बैग खुले, लेकिन 40 फीट गहरे पानी में गिरने के कारण किसी की जान नहीं बच पाई। परिजनों ने बताया कि चारों को तैरना नहीं आता था। मृतकों की पहचान मधेपुरा के भिरखी निवासी घनश्याम कुमार (23), जयपालपट्टी वार्ड-15 निवासी सागर कुमार (22), सहरसा के बसनही थाना क्षेत्र के मोकमा निवासी अंकित कुमार (25) और सौरबाजार के फोरसाही निवासी बसंत कुमार (21) के रूप में हुई है। वे मधेपुरा स्टेशन चौक से ग्वालपाड़ा के नोहर मेला देखने गए थे। 5-6 साल से दोस्त थे। रविवार को हुआ सागर कुमार का अंतिम संस्कार हादसे में मारे गए घनश्याम कुमार, अंकित कुमार और बसंत कुमार का अंतिम संस्कार शनिवार को हुआ। चौथे युवक सागर कुमार का शव बाद में मिला। पोस्टमॉर्टम के बाद रविवार को उसका अंतिम संस्कार किया गया। शव आने की सूचना मिलने पर दैनिक भास्कर की टीम मधेपुरा के जयपालपट्टी के वार्ड-15 पहुंची। हमने देखा कि सागर के शव को लेकर शव वाहन आया ही था। मुहल्ला के लोगों की भीड़ सड़क पर थी। चीख-पुकार मची हुई थी। परिजन रो-रोकर बेहाल थे। गांव के पुरुष किसी तरह स्थिति संभालते हुए अंतिम संस्कार की तैयारी में जुटे थे। घर के दरवाजे पर सागर की मां अनुराधा विलाप कर रही थी। परिवार की एक महिला ने बताया, ‘हादसे की सूचना मिलने के बाद से इन्होंने सुध-बुध खो दिया है। रोते-रोते बेहोश हो जा रहीं हैं। होश आते ही अपने बेटे का नाम लेकर रोने लगती हैं।’ हमें देखते ही अनुराधा चीखने लगीं। कहने लगीं, ‘मेरा बेटा मुझे छोड़कर चला गया। अब किसके सहारे जिऊंगी। वह पढ़ने में तेज था।’ परिवार की दो-तीन महिलाएं उन्हें संभालने में लगी थी। सागर डीएलएड और सीटीईटी पास था। उसके पिता राजेंद्र यादव आरपीएम कॉलेज में प्रोफेसर हैं। माता अनुराधा देवी सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं। सागर तीन भाई, एक बहन में दूसरे स्थान पर था। बेटे का शव देखते ही बेहोश हुई घनश्याम की मां घनश्याम का शव पोस्टमॉर्टम के बाद शनिवार दोपहर को मधेपुरा के भिरखी स्थित उसके घर लाया गया। हादसे और मौत की सूचना मिलने के बाद से परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था। आसपास के लोग और रिश्तेदार जुट हुए थे। एक परिजन ने बताया, ‘शव आने से पहले से ही अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी गई थी। जवान लड़के की मौत हुई थी। हमलोग कोशिश कर रहे थे कि शव को कम से कम देर के लिए दरवाजे पर रखा जाए।’ उन्होंने बताया, ‘एम्बुलेंस से शव लाया गया था। बेटे का शव देखते ही घनश्याम की मां बेहोश हो गईं। परिवार की महिलाएं उन्हें किसी तरह घर के अंदर ले गईं। करीब एक घंटा में शव को अंतिम संस्कार के लिए पास में ही स्थित भिरखी नदी के किनारे ले जाया गया।’ घनश्याम माता-पिता का इकलौता बेटा था। ड्राइविंग करके अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। उनकी दो छोटी बहनों की शादी हो गई है। घनश्याम की शादी अभी नहीं हुई थी। दो महीने बाद बसंत की बहन की होनी है शादी शनिवार दोपहर को जैसे ही बसंत का शव एंबुलेंस से सहरसा जिला के सौरबाजार के फोरसाही गांव पहुंचा चीख-पुकार मच गई। गांव के लोगों की भीड़ उसके घर के बाहर जुटी थी। दरवाजे पर एंबुलेंस को देखते ही बसंत का बड़ा भाई गौतम चीखने लगा। उसकी बहन दहाड़ मारकर रोने लगी। 2 महीना बाद बसंत की इकलौती बहन की शादी होने वाली है। तिलक की रस्म हो गई है। भाई और बहन की चीत्कार से माहौल गमगीन हो गया। बसंत की मां और पिता दरवाजे पर बेसुध पड़े थे। बसंत बीएड सेकेंड ईयर का छात्र था। मधेपुरा में रहकर पढ़ाई करता था। उसके पिता प्रमोद यादव सुपौल जिले में शिक्षा विभाग में प्रधान लिपिक हैं। अंकित का शव पहुंचते ही सुथनिया गांव में मचा कोहराम सहरसा के बसनही थाना क्षेत्र के मोकमा पंचायत के सुथनिया गांव में शनिवार दोपहर को अंकित का शव पहुंचा। शव आते ही गांव में कोहराम मच गया। पिता मनोज कुमार यादव अपने जवान बेटे के जाने की गम में बस टकटकी लगाए आने-जाने वालों को देखते रहे। मां रंजना देवी बेटे के शव से लिपट कर रोती रही। अंकित बीएड और सीटीईटी पास कर चुका था। मधेपुरा में रहकर शिक्षक भर्ती और BPSC परीक्षा की तैयारी करता था। इसके साथ ही बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाता था। उसका उसका एक छोटा भाई है। क्या कहते हैं प्रत्यक्षदर्शी? हमने घटना के प्रत्यक्षदर्शी पान दुकानदार राजीव कुमार से बात की। उन्होंने कहा, ‘रात में मैं अपनी दुकान में सो रहा था। अचानक तेज टक्कर और कुछ गिरने की आवाज सुनाई दी। बाहर निकला तो देखा कि दो बिजली के पोल और पास की एक दुकान क्षतिग्रस्त हो गई है।’ उन्होंने कहा, ‘मोबाइल की रोशनी में मैंने नदी में झांका। एक कार पानी में गिरी हुई थी। उसका केवल पिछला हिस्सा ही नजर आ रहा था। इसके बाद मैंने तुरंत डायल 112 पर पुलिस को सूचना दी। पुलिस आई तो स्थानीय लोगों की मदद से कार को बाहर निकाला गया। रात में ही कार के अंदर से दो शव बरामद कर लिए गए थे। तीसरा शव शनिवार सुबह करीब 7 बजे निकाला गया।’ बारिश के चलते शव निकालने में हुई परेशानी पुल के पास रहने वाले अरार निवासी अरुण कुमार ने बताया, ‘थानाध्यक्ष ने मुझे घटना के बारे में बताया था। जानकारी मिलते ही मैं तुरंत घटनास्थल पर पहुंचा। देखा कि पुल के नीचे नदी में कार डूबी हुई थी। कार का केवल पीछे का हिस्सा दिखाई दे रहा था। बारिश के चलते शव निकालने में परेशानी हुई।’ उन्होंने कहा, ‘जेसीबी की मदद से कार बाहर निकाला गया। कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त थी। उसमें दो युवक गाड़ी के आगे के सीट पर मृत मिले। लगभग आधा घंटा की कड़ी मशक्कत के बाद कार को नदी से बाहर निकाला गया।’ ‘बाप रे बाप.., हम्मर बेटा मर गेलई हो बाप..। छोड़ के चल गेलई हो..। बेटा हम्मर बहुत तेज रहलई र हो..।’ छाती पीटकर विलाप कर रही इस महिला का नाम अनुराधा है। शुक्रवार देर रात हुए कार हादसे में मधेपुरा और सहरसा के चार युवकों की मौत हुई। इनमें इनका 22 साल का बेटा सागर कुमार शामिल था। रविवार को सागर का अंतिम संस्कार किया गया। शनिवार को तीन अन्य युवकों का अंतिम संस्कार हुआ। चारों की मौत मधेपुरा में उदाकिशुनगंज एनएच-106 पर अरार पुल के पास कार के सुरसर नदी में गिरने से हुई। हादसे के वक्त कार की रफ्तार करीब 140 km/h थी। रील्स बनाया जा रहा था। सड़क हादसे में मारे गए चारों युवक कौन थे? क्या करते थे? हादसा कैसे हुआ? इनके अंतिम संस्कार किस तरह हुए। पढ़िए ग्राउंड रिपोर्ट…। पहले जानिए कैसे हुआ हादसा, 140 km/h की रफ्तार से दौड़ रही थी कार
हादसा तेज रफ्तार गाड़ी में रील्स बनाने के कारण हुआ। मृतकों में एक घनश्याम 140km/h की स्पीड से चल रही कार में रील बना रहा था और फेसबुक लाइव कर रहा था। वह बार-बार स्पीडोमीटर पर फोकस कर रहा था। दुर्घटना के समय गाड़ी की रफ्तार ऐसी थी कि पुल से पहले सड़क किनारे के एक टेलीफोन को धक्का लगा और वहां से उछलकर गाड़ी सीधे नदी में गिरी। जिस जगह टेलीफोन का खंभा है, वहां से नदी की दूरी करीब 15 से 20 फीट है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि टेलीफोन खंभे के ऊपर होते हुए गाड़ी सीधे नदी में गई। दुर्घटना के बाद कार के सभी एयर बैग खुले, लेकिन 40 फीट गहरे पानी में गिरने के कारण किसी की जान नहीं बच पाई। परिजनों ने बताया कि चारों को तैरना नहीं आता था। मृतकों की पहचान मधेपुरा के भिरखी निवासी घनश्याम कुमार (23), जयपालपट्टी वार्ड-15 निवासी सागर कुमार (22), सहरसा के बसनही थाना क्षेत्र के मोकमा निवासी अंकित कुमार (25) और सौरबाजार के फोरसाही निवासी बसंत कुमार (21) के रूप में हुई है। वे मधेपुरा स्टेशन चौक से ग्वालपाड़ा के नोहर मेला देखने गए थे। 5-6 साल से दोस्त थे। रविवार को हुआ सागर कुमार का अंतिम संस्कार हादसे में मारे गए घनश्याम कुमार, अंकित कुमार और बसंत कुमार का अंतिम संस्कार शनिवार को हुआ। चौथे युवक सागर कुमार का शव बाद में मिला। पोस्टमॉर्टम के बाद रविवार को उसका अंतिम संस्कार किया गया। शव आने की सूचना मिलने पर दैनिक भास्कर की टीम मधेपुरा के जयपालपट्टी के वार्ड-15 पहुंची। हमने देखा कि सागर के शव को लेकर शव वाहन आया ही था। मुहल्ला के लोगों की भीड़ सड़क पर थी। चीख-पुकार मची हुई थी। परिजन रो-रोकर बेहाल थे। गांव के पुरुष किसी तरह स्थिति संभालते हुए अंतिम संस्कार की तैयारी में जुटे थे। घर के दरवाजे पर सागर की मां अनुराधा विलाप कर रही थी। परिवार की एक महिला ने बताया, ‘हादसे की सूचना मिलने के बाद से इन्होंने सुध-बुध खो दिया है। रोते-रोते बेहोश हो जा रहीं हैं। होश आते ही अपने बेटे का नाम लेकर रोने लगती हैं।’ हमें देखते ही अनुराधा चीखने लगीं। कहने लगीं, ‘मेरा बेटा मुझे छोड़कर चला गया। अब किसके सहारे जिऊंगी। वह पढ़ने में तेज था।’ परिवार की दो-तीन महिलाएं उन्हें संभालने में लगी थी। सागर डीएलएड और सीटीईटी पास था। उसके पिता राजेंद्र यादव आरपीएम कॉलेज में प्रोफेसर हैं। माता अनुराधा देवी सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं। सागर तीन भाई, एक बहन में दूसरे स्थान पर था। बेटे का शव देखते ही बेहोश हुई घनश्याम की मां घनश्याम का शव पोस्टमॉर्टम के बाद शनिवार दोपहर को मधेपुरा के भिरखी स्थित उसके घर लाया गया। हादसे और मौत की सूचना मिलने के बाद से परिवार के लोगों का रो-रोकर बुरा हाल था। आसपास के लोग और रिश्तेदार जुट हुए थे। एक परिजन ने बताया, ‘शव आने से पहले से ही अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी गई थी। जवान लड़के की मौत हुई थी। हमलोग कोशिश कर रहे थे कि शव को कम से कम देर के लिए दरवाजे पर रखा जाए।’ उन्होंने बताया, ‘एम्बुलेंस से शव लाया गया था। बेटे का शव देखते ही घनश्याम की मां बेहोश हो गईं। परिवार की महिलाएं उन्हें किसी तरह घर के अंदर ले गईं। करीब एक घंटा में शव को अंतिम संस्कार के लिए पास में ही स्थित भिरखी नदी के किनारे ले जाया गया।’ घनश्याम माता-पिता का इकलौता बेटा था। ड्राइविंग करके अपने परिवार का भरण-पोषण करता था। उनकी दो छोटी बहनों की शादी हो गई है। घनश्याम की शादी अभी नहीं हुई थी। दो महीने बाद बसंत की बहन की होनी है शादी शनिवार दोपहर को जैसे ही बसंत का शव एंबुलेंस से सहरसा जिला के सौरबाजार के फोरसाही गांव पहुंचा चीख-पुकार मच गई। गांव के लोगों की भीड़ उसके घर के बाहर जुटी थी। दरवाजे पर एंबुलेंस को देखते ही बसंत का बड़ा भाई गौतम चीखने लगा। उसकी बहन दहाड़ मारकर रोने लगी। 2 महीना बाद बसंत की इकलौती बहन की शादी होने वाली है। तिलक की रस्म हो गई है। भाई और बहन की चीत्कार से माहौल गमगीन हो गया। बसंत की मां और पिता दरवाजे पर बेसुध पड़े थे। बसंत बीएड सेकेंड ईयर का छात्र था। मधेपुरा में रहकर पढ़ाई करता था। उसके पिता प्रमोद यादव सुपौल जिले में शिक्षा विभाग में प्रधान लिपिक हैं। अंकित का शव पहुंचते ही सुथनिया गांव में मचा कोहराम सहरसा के बसनही थाना क्षेत्र के मोकमा पंचायत के सुथनिया गांव में शनिवार दोपहर को अंकित का शव पहुंचा। शव आते ही गांव में कोहराम मच गया। पिता मनोज कुमार यादव अपने जवान बेटे के जाने की गम में बस टकटकी लगाए आने-जाने वालों को देखते रहे। मां रंजना देवी बेटे के शव से लिपट कर रोती रही। अंकित बीएड और सीटीईटी पास कर चुका था। मधेपुरा में रहकर शिक्षक भर्ती और BPSC परीक्षा की तैयारी करता था। इसके साथ ही बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाता था। उसका उसका एक छोटा भाई है। क्या कहते हैं प्रत्यक्षदर्शी? हमने घटना के प्रत्यक्षदर्शी पान दुकानदार राजीव कुमार से बात की। उन्होंने कहा, ‘रात में मैं अपनी दुकान में सो रहा था। अचानक तेज टक्कर और कुछ गिरने की आवाज सुनाई दी। बाहर निकला तो देखा कि दो बिजली के पोल और पास की एक दुकान क्षतिग्रस्त हो गई है।’ उन्होंने कहा, ‘मोबाइल की रोशनी में मैंने नदी में झांका। एक कार पानी में गिरी हुई थी। उसका केवल पिछला हिस्सा ही नजर आ रहा था। इसके बाद मैंने तुरंत डायल 112 पर पुलिस को सूचना दी। पुलिस आई तो स्थानीय लोगों की मदद से कार को बाहर निकाला गया। रात में ही कार के अंदर से दो शव बरामद कर लिए गए थे। तीसरा शव शनिवार सुबह करीब 7 बजे निकाला गया।’ बारिश के चलते शव निकालने में हुई परेशानी पुल के पास रहने वाले अरार निवासी अरुण कुमार ने बताया, ‘थानाध्यक्ष ने मुझे घटना के बारे में बताया था। जानकारी मिलते ही मैं तुरंत घटनास्थल पर पहुंचा। देखा कि पुल के नीचे नदी में कार डूबी हुई थी। कार का केवल पीछे का हिस्सा दिखाई दे रहा था। बारिश के चलते शव निकालने में परेशानी हुई।’ उन्होंने कहा, ‘जेसीबी की मदद से कार बाहर निकाला गया। कार पूरी तरह क्षतिग्रस्त थी। उसमें दो युवक गाड़ी के आगे के सीट पर मृत मिले। लगभग आधा घंटा की कड़ी मशक्कत के बाद कार को नदी से बाहर निकाला गया।’


