मोतिहारी में 1 जनवरी 2026 को डॉक्टर ने ऑपरेशन कर एक महिला के पेट से 6 इंच की कैंची निकाली है। कैंची निकालने के 6 घंटे बाद महिला की मौत हो गई। मृतका के परिजन का आरोप है, डेढ़ साल पहले ऑपरेशन के दौरान उसके पेट में डॉक्टर संगीता ने कैंची छोड़ दी थी। इसी वजह से उसकी मौत हुई है। वहीं, डॉक्टर संगीता का कहना है डेढ़ साल पहले मैंने महिला का ऑपरेशन कर बच्ची को निकाला था। मैंने यूटरस के जरिए बच्चा को निकाला था। कैंची पेट से निकली है। यूटरस से पेट तक कैंची कैसे पहुंच गई। वहीं, लास्ट बार जिस डॉक्टर ने महिला का ऑपरेशन किया था, उनका कहना है यूटरस मृतका की पहचान जितना थाना क्षेत्र के रहने वाले मणिभूषण कुमार की पत्नी उषा देवी(25) के रूप में हुई है। इस घटना से पीड़ित परिवार में गुस्सा है। अब सिलसिलेवार तरीके से समझिए पूरी घटना… 6 साल पहले महिला की हुई थी शादी मृतका के जेठ त्रिलोकीनाथ प्रसाद ने बताया, उषा देवी की 6 साल पहले मेरे भाई मणिभूषण से शादी हुई थी। इस दौरान उसे दो बच्चा हुआ, लेकिन दोनों की मौत हो गई। दूसरा बच्चा ऑपरेशन के जरिए ही हुआ था। 2024 में उषा देवी तीसरी बार प्रेग्नेंट हुई। इस दौरान उषा का डॉक्टर संगीता से इलाज चल रहा था। डॉक्टर संगीता ने उषा के यूटरस का ऑपरेशन कर बच्ची को निकाला था। इसके बाद करीब 6 महीने तक मरीज को कोई दिक्कत नहीं हुई। पिछले एक साल में उसके पेट में रह-रहकर दर्द उठता था। एक साल में 3 बार करवाया अल्ट्रासाउंड, नहीं दिखी कैंची एक साल में 2-3 बार उषा का अल्ट्रासाउंड भी करवाया गया, लेकिन कहीं भी कैंची होने की हमें जानकारी नहीं दी गई। 31 दिसंबर 2025 की रात उषा के पेट में बहुत तेज दर्ज हुआ। हमलोग उसे डॉक्टर कमलेश के पास लेकर गए। इस दौरान डॉक्टर ने सबसे पहले CT स्कैन करवाने के लिए कहा। जब CT स्कैन करवाया गया, तो उसमें पेट में 6 इंच की कैंची होने की बात सामने आई। CT स्कैन के एक्स-रे कॉपी में कैंची का इमेज दिख रहा है। रहमानिया में 31 दिसंबर की रात हुआ ऑपरेशन इसके बाद डॉक्टर कमलेश ने बताया, इनके पेट में ऑपरेशन के दौरान किसी ने कैंची छोड़ दी है। इसी वजह से बार-बार पेट दर्द हो रहा है। मरीज का तुरंत ऑपरेशन करना होगा। इसको तुरंत रहमानिया में ले जाइए। उषा के आंत में कैंची की वजह से छेद हो गया है। अगर इसका तुरंत ऑपरेशन नहीं किया गया तो उसकी मौत हो जाएगी। हमलोग तुरंत उषा को रहमानिया अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां 1 जनवरी को उसका ऑपरेशन किया गया। पेट से करीब 6 इंच की कैंची निकाली गई, लेकिन 6 घंटे बाद उषा की मौत हो गई। हमलोग उसे अस्पताल से फिर घर लेकर आ गए। आज महिला का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। डॉक्टर कमलेश ने बताया, महिला के पेट में बहुत अंदर में कैंची मिली है। वो अंतड़ियों को फाड़ते हुए अंदर पहुंच गई थी। इसी वजह से वहां पर घाव भी हो गए थे। महिला का जो फर्स्ट ऑपरेशन हुआ था, वो कहीं लोकल क्लिनिक से करवाया गया था। डॉक्टर ज्यादा ट्रेंड नहीं होंगे जिसके कारण ये हादसा हो सकता है। डेढ़ साल पहले डॉक्टर संगीता ने जो ऑपरेशन किया है, उन्होंने पेट को टच नहीं किया था। इस वजह से उनकी गलती के कारण ये हादसा नहीं हुआ है। डॉक्टर कमलेश ने आगे बताया, सर्जरी के दौरान पेट के अंदर काफी इंफेक्टेड फ्लूइड भी पाया गया, जिसकी मात्रा करीब 700 एमएल बताई जा रही है। पहले भी दो बार हो चुका था ऑपरेशन डॉक्टरों ने बताया कि मरीज की मेडिकल हिस्ट्री के अनुसार वह पहले भी दो बार ऑपरेशन करा चुकी थी। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया कि ये ऑपरेशन किसी बड़े या पूरी तरह क्वालिफाइड मेडिकल सेंटर में नहीं हुए थे। आशंका जताई जा रही है कि पहले किए गए ऑपरेशनों के दौरान ही कोई सर्जिकल सामग्री पेट के अंदर छूट गई होगी, जो समय के साथ गंभीर समस्या का कारण बन गई। सिजेरियन ऑपरेशन से जुड़ा हो सकता है मामला डॉक्टरों का कहना है कि महिला का सिजेरियन (सी-सेक्शन) ऑपरेशन पहले हो चुका था। सामान्यतः सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान गर्भाशय (यूटरस) पूरी तरह सामने होता है और उसमें किसी वस्तु के छूटने की संभावना बहुत कम होती है, बशर्ते ऑपरेशन सही तरीके से और प्रशिक्षित डॉक्टर द्वारा किया गया हो। ऐसे मामलों में सभी सर्जिकल उपकरणों की गिनती (काउंटिंग और रिकाउंटिंग) की जाती है। क्वालिफाइड डॉक्टरों में लापरवाही की संभावना कम डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि यदि ऑपरेशन किसी प्रशिक्षित और योग्य डॉक्टर द्वारा किया गया हो, तो सर्जिकल सामग्री छूटने की संभावना लगभग नहीं होती। ऑपरेशन थिएटर में स्टाफ को सभी उपकरणों की जानकारी होती है और हर प्रक्रिया के बाद उपकरणों की गिनती अनिवार्य होती है। ऐसे में इस मामले में लापरवाही की आशंका उन स्थानों पर ज्यादा मानी जा रही है, जहां पूरी मेडिकल सुविधाएं और प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद नहीं होता। ऑपरेशन के दौरान आईं कई जटिलताएं मौजूदा ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। पेट के अंदर अंग आपस में चिपके हुए थे और एक हिस्सा पूरी तरह सील हो चुका था। पहले किए गए ऑपरेशन के निशान के कारण सीधे उस हिस्से तक पहुंचना संभव नहीं था, इसलिए डॉक्टरों को ऊपर से अलग रास्ता बनाकर सर्जरी करनी पड़ी। फॉरेन बॉडी दूसरे कम्पार्टमेंट में फंसी हुई थी, जिससे ऑपरेशन और अधिक जटिल हो गया। समय लगाकर सुरक्षित निकाली गई वस्तु डॉक्टरों की टीम ने सावधानीपूर्वक ऑपरेशन कर फंसी हुई विदेशी वस्तु को बाहर निकाला। इस दौरान कहीं-कहीं टिश्यू डैमेज भी पाया गया, जिसकी मरम्मत (रिपेयर) करनी पड़ी। डॉक्टरों के अनुसार यदि समय पर ऑपरेशन नहीं किया जाता तो यह स्थिति मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती थी। लोकल सेंटरों में ऑपरेशन पर उठे सवाल इस मामले ने एक बार फिर बिना पर्याप्त सुविधाओं और क्वालिफाइड डॉक्टरों के किए जा रहे ऑपरेशनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मरीजों को ऑपरेशन से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इलाज किसी पंजीकृत और मान्यता प्राप्त अस्पताल में ही कराया जाए। मोतिहारी में 1 जनवरी 2026 को डॉक्टर ने ऑपरेशन कर एक महिला के पेट से 6 इंच की कैंची निकाली है। कैंची निकालने के 6 घंटे बाद महिला की मौत हो गई। मृतका के परिजन का आरोप है, डेढ़ साल पहले ऑपरेशन के दौरान उसके पेट में डॉक्टर संगीता ने कैंची छोड़ दी थी। इसी वजह से उसकी मौत हुई है। वहीं, डॉक्टर संगीता का कहना है डेढ़ साल पहले मैंने महिला का ऑपरेशन कर बच्ची को निकाला था। मैंने यूटरस के जरिए बच्चा को निकाला था। कैंची पेट से निकली है। यूटरस से पेट तक कैंची कैसे पहुंच गई। वहीं, लास्ट बार जिस डॉक्टर ने महिला का ऑपरेशन किया था, उनका कहना है यूटरस मृतका की पहचान जितना थाना क्षेत्र के रहने वाले मणिभूषण कुमार की पत्नी उषा देवी(25) के रूप में हुई है। इस घटना से पीड़ित परिवार में गुस्सा है। अब सिलसिलेवार तरीके से समझिए पूरी घटना… 6 साल पहले महिला की हुई थी शादी मृतका के जेठ त्रिलोकीनाथ प्रसाद ने बताया, उषा देवी की 6 साल पहले मेरे भाई मणिभूषण से शादी हुई थी। इस दौरान उसे दो बच्चा हुआ, लेकिन दोनों की मौत हो गई। दूसरा बच्चा ऑपरेशन के जरिए ही हुआ था। 2024 में उषा देवी तीसरी बार प्रेग्नेंट हुई। इस दौरान उषा का डॉक्टर संगीता से इलाज चल रहा था। डॉक्टर संगीता ने उषा के यूटरस का ऑपरेशन कर बच्ची को निकाला था। इसके बाद करीब 6 महीने तक मरीज को कोई दिक्कत नहीं हुई। पिछले एक साल में उसके पेट में रह-रहकर दर्द उठता था। एक साल में 3 बार करवाया अल्ट्रासाउंड, नहीं दिखी कैंची एक साल में 2-3 बार उषा का अल्ट्रासाउंड भी करवाया गया, लेकिन कहीं भी कैंची होने की हमें जानकारी नहीं दी गई। 31 दिसंबर 2025 की रात उषा के पेट में बहुत तेज दर्ज हुआ। हमलोग उसे डॉक्टर कमलेश के पास लेकर गए। इस दौरान डॉक्टर ने सबसे पहले CT स्कैन करवाने के लिए कहा। जब CT स्कैन करवाया गया, तो उसमें पेट में 6 इंच की कैंची होने की बात सामने आई। CT स्कैन के एक्स-रे कॉपी में कैंची का इमेज दिख रहा है। रहमानिया में 31 दिसंबर की रात हुआ ऑपरेशन इसके बाद डॉक्टर कमलेश ने बताया, इनके पेट में ऑपरेशन के दौरान किसी ने कैंची छोड़ दी है। इसी वजह से बार-बार पेट दर्द हो रहा है। मरीज का तुरंत ऑपरेशन करना होगा। इसको तुरंत रहमानिया में ले जाइए। उषा के आंत में कैंची की वजह से छेद हो गया है। अगर इसका तुरंत ऑपरेशन नहीं किया गया तो उसकी मौत हो जाएगी। हमलोग तुरंत उषा को रहमानिया अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां 1 जनवरी को उसका ऑपरेशन किया गया। पेट से करीब 6 इंच की कैंची निकाली गई, लेकिन 6 घंटे बाद उषा की मौत हो गई। हमलोग उसे अस्पताल से फिर घर लेकर आ गए। आज महिला का अंतिम संस्कार कर दिया गया है। डॉक्टर कमलेश ने बताया, महिला के पेट में बहुत अंदर में कैंची मिली है। वो अंतड़ियों को फाड़ते हुए अंदर पहुंच गई थी। इसी वजह से वहां पर घाव भी हो गए थे। महिला का जो फर्स्ट ऑपरेशन हुआ था, वो कहीं लोकल क्लिनिक से करवाया गया था। डॉक्टर ज्यादा ट्रेंड नहीं होंगे जिसके कारण ये हादसा हो सकता है। डेढ़ साल पहले डॉक्टर संगीता ने जो ऑपरेशन किया है, उन्होंने पेट को टच नहीं किया था। इस वजह से उनकी गलती के कारण ये हादसा नहीं हुआ है। डॉक्टर कमलेश ने आगे बताया, सर्जरी के दौरान पेट के अंदर काफी इंफेक्टेड फ्लूइड भी पाया गया, जिसकी मात्रा करीब 700 एमएल बताई जा रही है। पहले भी दो बार हो चुका था ऑपरेशन डॉक्टरों ने बताया कि मरीज की मेडिकल हिस्ट्री के अनुसार वह पहले भी दो बार ऑपरेशन करा चुकी थी। प्रारंभिक जानकारी में सामने आया कि ये ऑपरेशन किसी बड़े या पूरी तरह क्वालिफाइड मेडिकल सेंटर में नहीं हुए थे। आशंका जताई जा रही है कि पहले किए गए ऑपरेशनों के दौरान ही कोई सर्जिकल सामग्री पेट के अंदर छूट गई होगी, जो समय के साथ गंभीर समस्या का कारण बन गई। सिजेरियन ऑपरेशन से जुड़ा हो सकता है मामला डॉक्टरों का कहना है कि महिला का सिजेरियन (सी-सेक्शन) ऑपरेशन पहले हो चुका था। सामान्यतः सिजेरियन ऑपरेशन के दौरान गर्भाशय (यूटरस) पूरी तरह सामने होता है और उसमें किसी वस्तु के छूटने की संभावना बहुत कम होती है, बशर्ते ऑपरेशन सही तरीके से और प्रशिक्षित डॉक्टर द्वारा किया गया हो। ऐसे मामलों में सभी सर्जिकल उपकरणों की गिनती (काउंटिंग और रिकाउंटिंग) की जाती है। क्वालिफाइड डॉक्टरों में लापरवाही की संभावना कम डॉक्टरों ने स्पष्ट किया कि यदि ऑपरेशन किसी प्रशिक्षित और योग्य डॉक्टर द्वारा किया गया हो, तो सर्जिकल सामग्री छूटने की संभावना लगभग नहीं होती। ऑपरेशन थिएटर में स्टाफ को सभी उपकरणों की जानकारी होती है और हर प्रक्रिया के बाद उपकरणों की गिनती अनिवार्य होती है। ऐसे में इस मामले में लापरवाही की आशंका उन स्थानों पर ज्यादा मानी जा रही है, जहां पूरी मेडिकल सुविधाएं और प्रशिक्षित स्टाफ मौजूद नहीं होता। ऑपरेशन के दौरान आईं कई जटिलताएं मौजूदा ऑपरेशन के दौरान डॉक्टरों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। पेट के अंदर अंग आपस में चिपके हुए थे और एक हिस्सा पूरी तरह सील हो चुका था। पहले किए गए ऑपरेशन के निशान के कारण सीधे उस हिस्से तक पहुंचना संभव नहीं था, इसलिए डॉक्टरों को ऊपर से अलग रास्ता बनाकर सर्जरी करनी पड़ी। फॉरेन बॉडी दूसरे कम्पार्टमेंट में फंसी हुई थी, जिससे ऑपरेशन और अधिक जटिल हो गया। समय लगाकर सुरक्षित निकाली गई वस्तु डॉक्टरों की टीम ने सावधानीपूर्वक ऑपरेशन कर फंसी हुई विदेशी वस्तु को बाहर निकाला। इस दौरान कहीं-कहीं टिश्यू डैमेज भी पाया गया, जिसकी मरम्मत (रिपेयर) करनी पड़ी। डॉक्टरों के अनुसार यदि समय पर ऑपरेशन नहीं किया जाता तो यह स्थिति मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती थी। लोकल सेंटरों में ऑपरेशन पर उठे सवाल इस मामले ने एक बार फिर बिना पर्याप्त सुविधाओं और क्वालिफाइड डॉक्टरों के किए जा रहे ऑपरेशनों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। डॉक्टरों का कहना है कि मरीजों को ऑपरेशन से पहले यह सुनिश्चित करना चाहिए कि इलाज किसी पंजीकृत और मान्यता प्राप्त अस्पताल में ही कराया जाए।


