राजधानी की जीवनरेखा खारुन नदी एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार किसी विकास कार्य के लिए नहीं, बल्कि सरकारी लापरवाही के कारण। साबरमती रिवर फ्रंट की तर्ज पर प्रस्तावित खारुन रिवर फ्रंट परियोजना की फाइल अब हमेशा के लिए बंद हो गई है। 3 साल पहले इस परियोजना को बजट में शामिल किया गया था। इसके तहत खारुन नदी के दोनों किनारों पर 45 किमी लंबे हिस्से में सौंदर्याकरण, सड़क निर्माण और हरियाली विकसित करने की योजना थी। इसके लिए लगभग 550 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट तैयार किया गया था, लेकिन शासन से अंतिम बजट मंजूरी नहीं मिली। नियमों के तहत परियोजना स्वतः निरस्त हो गई। अब रिवर फ्रंट के नाम पर शासन ने 108 करोड़ रुपए की लागत से महादेव घाट के सौंदर्याकरण का फैसला लिया है, जिसे लोग बड़े सपने के बदले सीमित खानापूर्ति मान रहे हैं। तीन चरणों में डेवलप किया जाना था 45 किमी का रिवर फ्रंट खारुन रिवर फ्रंट योजना आमदी से बेंद्री तक तीन चरणों में प्रस्तावित थी। 45 किमी दोनों किनारों का विकास होना था। 550 करोड़ का प्रस्ताव सिंचाई विभाग नेतैयार किया था। 2023-24 और फिर 2024-25 के बजट में शामिल किया, पर दोनों बार बजट स्वीकृत नहीं हुआ। नतीजा – समय-सीमा पूरी होते ही प्रोजेक्ट रद्द सिस्टम और फंड ने रोका विकास ये हैं 3 अधूरे प्रोजेक्ट रायपुर में खारुन रिवर फ्रंट के अलावा भी कई प्रोजेक्ट अधूरे हैं। • पहला – मोवा से जोरा बीच 14.7 किमी एक्सप्रेस-वे-2 प्रस्तावित, लागत 1295 करोड़, मंजूरी लंबित। दूसरे चरण – खालसा स्कूल से पंडरी थाना ओवरब्रिज स्वीकृत, 300 करोड़ का प्रोजेक्ट अटका। तीसरे चरण – गोदवारा ओवरब्रिज से खमतराई रेलवे क्रॉसिंग सड़क चौड़ीकरण, शासन हरी झंडी नहीं। वजह-तकनीकी कारण खारुन रिवर फ्रंट में पीडब्ल्यूडी को सड़क, बस स्टैंड, पार्किंग आदि का निर्माण करना था, लेकिन तकनीकी कारणों से शुरू नहीं हो पाया। वीके भतपहरी, ईएनसी पीडब्ल्यूडी खारून रिवर फ्रंट के लिए एरिगेशन ने बजट बनाकर दिया था, पर दो बार से रिजेक्ट हो रहा है। इसकी जानकारी मुझे नहीं है, मैं पता करके बता पाऊंगा। राजेश कुमार टोप्पो, सचिव एरिगेशन विभाग छत्तीसगढ़


