बक्सर नौलखा मंदिर में 50वां ब्रह्म उत्सव:सजे-धजे रथ पर भगवान वेंकटेश की भव्य रथ यात्रा निकाली, भक्तों ने लगाए जयकारे

बक्सर नौलखा मंदिर में 50वां ब्रह्म उत्सव:सजे-धजे रथ पर भगवान वेंकटेश की भव्य रथ यात्रा निकाली, भक्तों ने लगाए जयकारे

बिहार के बक्सर स्थित प्रसिद्ध नौलखा मंदिर में 50वां ब्रह्म उत्सव मनाया गया। इस स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर भगवान वेंकटेश की भव्य रथ यात्रा निकाली गई। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और जयकारों से वातावरण गूंज उठा। रथ यात्रा की शुरुआत नौलखा मंदिर से हुई। सजे-धजे रथ पर भगवान वेंकटेश की प्रतिमा को फूल-मालाओं और रंग-बिरंगी सजावट के बीच विराजमान किया गया था। रथ के आगे ध्वज लेकर भक्तों का समूह चल रहा था, जबकि सैकड़ों श्रद्धालु रस्सियां पकड़कर रथ को खींच रहे थे। डीजे और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर भजन-कीर्तन किए गए। रथ यात्रा नौलखा मंदिर से निकलकर चरित्रवन, बसांव मठिया पंचमुखी मंदिर, टीचर कॉलोनी, लक्ष्मी नारायण मंदिर और श्रीनिवास मंदिर होते हुए त्रिदंडी स्वामी आश्रम पहुंची। आश्रम परिसर में भगवान वेंकटेश का विधि-विधान से गंगा स्नान कराया गया। इसके बाद शोभायात्रा के साथ प्रतिमा को पुनः नौलखा मंदिर लाया गया। पूरे मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा पुष्प वर्षा की गई और भंडारे आयोजित किए गए। संतों ने भक्तों को धर्म, सेवा और सद्भाव का संदेश दिया इस अवसर पर दक्षिण भारत से संत श्रीधर स्वामी और मुंबई से कृष्णा मेहता मुख्य पुजारी के रूप में उपस्थित रहे। मंदिर प्रशासन की ओर से शिवम स्वामी, अमित स्वामी तथा लक्ष्मी नारायण मंदिर के स्वामी राजगोपाल आचार्य ने भी आयोजन की व्यवस्थाएं संभालीं। संतों ने भक्तों को धर्म, सेवा और सद्भाव का संदेश दिया। नौलखा मंदिर अपनी दक्षिण भारतीय वास्तुकला के लिए विख्यात है। इसकी नक्काशी और संरचना दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। मंदिर की स्थापना 1974 में त्रिदंडी स्वामी जी महाराज की प्रेरणा से हुई थी। प्राण प्रतिष्ठा उत्तर और दक्षिण भारत के 108-108 पुजारियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराई गई थी। बिहार के बक्सर स्थित प्रसिद्ध नौलखा मंदिर में 50वां ब्रह्म उत्सव मनाया गया। इस स्वर्ण जयंती वर्ष के अवसर पर भगवान वेंकटेश की भव्य रथ यात्रा निकाली गई। सुबह से ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी और जयकारों से वातावरण गूंज उठा। रथ यात्रा की शुरुआत नौलखा मंदिर से हुई। सजे-धजे रथ पर भगवान वेंकटेश की प्रतिमा को फूल-मालाओं और रंग-बिरंगी सजावट के बीच विराजमान किया गया था। रथ के आगे ध्वज लेकर भक्तों का समूह चल रहा था, जबकि सैकड़ों श्रद्धालु रस्सियां पकड़कर रथ को खींच रहे थे। डीजे और पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर भजन-कीर्तन किए गए। रथ यात्रा नौलखा मंदिर से निकलकर चरित्रवन, बसांव मठिया पंचमुखी मंदिर, टीचर कॉलोनी, लक्ष्मी नारायण मंदिर और श्रीनिवास मंदिर होते हुए त्रिदंडी स्वामी आश्रम पहुंची। आश्रम परिसर में भगवान वेंकटेश का विधि-विधान से गंगा स्नान कराया गया। इसके बाद शोभायात्रा के साथ प्रतिमा को पुनः नौलखा मंदिर लाया गया। पूरे मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं द्वारा पुष्प वर्षा की गई और भंडारे आयोजित किए गए। संतों ने भक्तों को धर्म, सेवा और सद्भाव का संदेश दिया इस अवसर पर दक्षिण भारत से संत श्रीधर स्वामी और मुंबई से कृष्णा मेहता मुख्य पुजारी के रूप में उपस्थित रहे। मंदिर प्रशासन की ओर से शिवम स्वामी, अमित स्वामी तथा लक्ष्मी नारायण मंदिर के स्वामी राजगोपाल आचार्य ने भी आयोजन की व्यवस्थाएं संभालीं। संतों ने भक्तों को धर्म, सेवा और सद्भाव का संदेश दिया। नौलखा मंदिर अपनी दक्षिण भारतीय वास्तुकला के लिए विख्यात है। इसकी नक्काशी और संरचना दूर-दराज से आने वाले श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। मंदिर की स्थापना 1974 में त्रिदंडी स्वामी जी महाराज की प्रेरणा से हुई थी। प्राण प्रतिष्ठा उत्तर और दक्षिण भारत के 108-108 पुजारियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ संपन्न कराई गई थी।  

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