उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के छात्र प्रवीण चौधरी ने पटना में प्रसिद्ध शिक्षक खान सर से मिलने के लिए लगभग 500 किलोमीटर की पैदल यात्रा शुरू की है। उनका उद्देश्य संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षा की तैयारी के लिए मार्गदर्शन प्राप्त करना है। प्रवीण ने यह यात्रा 9 मार्च को प्रतापगढ़ से शुरू की थी। 22 मार्च, रविवार की सुबह वह बिहार के बक्सर जिले के चौसा पहुंचे, जो उनकी यात्रा का 13वां दिन था। चौसा पहुंचने पर स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। लोगों ने उन्हें फूल-मालाएं पहनाकर उनके जज्बे की सराहना की और आगे की यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं। पैर में चोट लगने के कारण छोड़ा हॉकी प्रवीण चौधरी का सपना एक प्रशासनिक अधिकारी बनना है। उन्होंने बताया कि वह पहले एक बेहतरीन हॉकी खिलाड़ी थे, लेकिन पैर में गंभीर चोट लगने के कारण उन्हें खेल छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण प्रवीण को जीवनयापन के लिए एक होटल में रोटी बनाने का काम करना पड़ रहा है। इन चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी है। वह स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं और अब सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करना चाहते हैं। नॉन-टेक्निकल परीक्षा भी की उत्तीर्ण प्रवीण ने बताया कि वह पहले भी खान सर की ऑनलाइन कक्षाओं से जुड़े रहे हैं और उन्हें इससे काफी लाभ हुआ है। उन्होंने एयरफोर्स की नॉन-टेक्निकल परीक्षा भी उत्तीर्ण की है, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य सिविल सेवा में चयनित होना है। उनका मानना है कि खान सर का मार्गदर्शन उन्हें अपने लक्ष्य के करीब पहुंचने में मदद करेगा। इस यात्रा की सबसे खास बात यह है कि प्रवीण ने पटना पहुंचने के लिए किसी भी आसान साधन का उपयोग नहीं किया। उन्होंने जानबूझकर पैदल यात्रा का रास्ता चुना। उनका कहना है कि वे चाहते हैं कि उनकी इस यात्रा का वीडियो और उनकी कहानी खान सर तक पहुंचे, ताकि उनके जज्बे से प्रभावित होकर वे उन्हें मिलने का अवसर दें और मार्गदर्शन करें। रोजाना 20 किलोमीटर चलते है पैदल प्रवीण रोजाना करीब 15 से 20 किलोमीटर पैदल चलते हैं। इस दौरान वह रास्ते में मंदिर, मस्जिद, रेलवे स्टेशन या किसी स्थानीय व्यक्ति के घर पर रुककर रात बिताते हैं। इस यात्रा में उन्हें अनजान लोगों का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है, जो उनके लिए भोजन और ठहरने की व्यवस्था कर रहे हैं। छह भाई-बहनों में सबसे छोटे प्रवीण चौधरी का यह संघर्ष केवल उनके व्यक्तिगत सपनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश कर रहा है। उनका यह साहस और समर्पण यह संदेश देता है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ जिले के छात्र प्रवीण चौधरी ने पटना में प्रसिद्ध शिक्षक खान सर से मिलने के लिए लगभग 500 किलोमीटर की पैदल यात्रा शुरू की है। उनका उद्देश्य संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षा की तैयारी के लिए मार्गदर्शन प्राप्त करना है। प्रवीण ने यह यात्रा 9 मार्च को प्रतापगढ़ से शुरू की थी। 22 मार्च, रविवार की सुबह वह बिहार के बक्सर जिले के चौसा पहुंचे, जो उनकी यात्रा का 13वां दिन था। चौसा पहुंचने पर स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। लोगों ने उन्हें फूल-मालाएं पहनाकर उनके जज्बे की सराहना की और आगे की यात्रा के लिए शुभकामनाएं दीं। पैर में चोट लगने के कारण छोड़ा हॉकी प्रवीण चौधरी का सपना एक प्रशासनिक अधिकारी बनना है। उन्होंने बताया कि वह पहले एक बेहतरीन हॉकी खिलाड़ी थे, लेकिन पैर में गंभीर चोट लगने के कारण उन्हें खेल छोड़ना पड़ा। इसके बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया। परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण प्रवीण को जीवनयापन के लिए एक होटल में रोटी बनाने का काम करना पड़ रहा है। इन चुनौतियों के बावजूद, उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी है। वह स्नातक तक की शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं और अब सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करना चाहते हैं। नॉन-टेक्निकल परीक्षा भी की उत्तीर्ण प्रवीण ने बताया कि वह पहले भी खान सर की ऑनलाइन कक्षाओं से जुड़े रहे हैं और उन्हें इससे काफी लाभ हुआ है। उन्होंने एयरफोर्स की नॉन-टेक्निकल परीक्षा भी उत्तीर्ण की है, लेकिन उनका अंतिम लक्ष्य सिविल सेवा में चयनित होना है। उनका मानना है कि खान सर का मार्गदर्शन उन्हें अपने लक्ष्य के करीब पहुंचने में मदद करेगा। इस यात्रा की सबसे खास बात यह है कि प्रवीण ने पटना पहुंचने के लिए किसी भी आसान साधन का उपयोग नहीं किया। उन्होंने जानबूझकर पैदल यात्रा का रास्ता चुना। उनका कहना है कि वे चाहते हैं कि उनकी इस यात्रा का वीडियो और उनकी कहानी खान सर तक पहुंचे, ताकि उनके जज्बे से प्रभावित होकर वे उन्हें मिलने का अवसर दें और मार्गदर्शन करें। रोजाना 20 किलोमीटर चलते है पैदल प्रवीण रोजाना करीब 15 से 20 किलोमीटर पैदल चलते हैं। इस दौरान वह रास्ते में मंदिर, मस्जिद, रेलवे स्टेशन या किसी स्थानीय व्यक्ति के घर पर रुककर रात बिताते हैं। इस यात्रा में उन्हें अनजान लोगों का भी भरपूर सहयोग मिल रहा है, जो उनके लिए भोजन और ठहरने की व्यवस्था कर रहे हैं। छह भाई-बहनों में सबसे छोटे प्रवीण चौधरी का यह संघर्ष केवल उनके व्यक्तिगत सपनों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर उस युवा के लिए प्रेरणा है जो कठिन परिस्थितियों के बावजूद अपने लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश कर रहा है। उनका यह साहस और समर्पण यह संदेश देता है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।


