औरंगाबाद में महाशिवरात्रि पर्व पर मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। गोह प्रखंड के देवकुंड स्थित बाबा दूधेश्वरनाथ मंदिर में अब तक करीब 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। दूर-दराज के गांवों सहित पड़ोसी जिलों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर रहे हैं। मंदिर प्रबंधन समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जलाभिषेक के लिए अलग-अलग कतारों की व्यवस्था की है। ताकि भीड़ के बावजूद पूजा सुचारु रूप से संपन्न हो सके। लगभग एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। विधि व्यवस्था को लेकर प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मठ कमेटी के सदस्यों ने बताया कि इस वर्ष महाशिवरात्रि पर विशेष रूद्राभिषेक किया गया। पूरे मंदिर परिसर में ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो रहा है । श्रद्धालुओं के लिए भजन-कीर्तन और भक्ति जागरण का भी आयोजन किया गया है, जिसमें स्थानीय कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। गाजे-बाजे के साथ निकलेगी शिव-बारात महाशिवरात्रि की संध्या बेला में मठ परिसर से भव्य शिव बारात निकाली जाएगी। शिव बारात में भगवान शिव की झांकी, देवी-देवताओं के स्वरूप और पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकार शामिल होंगे। ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजे के साथ निकाली जाने वाली इस बारात को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़ते हैं। शिव बारात नगर भ्रमण करते हुए पुनः मंदिर परिसर में पहुंचेगी, जहां शिव-पार्वती विवाह की रस्में संपन्न की जाएंगी। यह विवाह समारोह श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र होता है। जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन मठाधीश महंत कन्हैयानंद पुरी के नेतृत्व में शिव-पार्वती विवाह की पारंपरिक रस्म अदा की जाएगी। वैदिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच इस आयोजन को संपन्न कराया जाएगा। श्रद्धालु इस पावन दृश्य के साक्षी बनकर स्वयं को धन्य महसूस करते हैं। मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। दो दिवसीय ‘देवकुंड महोत्सव’ इधर, जिला प्रशासन भी महाशिवरात्रि को लेकर पूरी तरह सतर्क है। प्रशासनिक अधिकारियों के नेतृत्व में 16 और 17 फरवरी को देवकुंड खेल मैदान में दो दिवसीय ‘देवकुंड महोत्सव’ का आयोजन किया जाएगा। इस महोत्सव में स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ बाहर से आए प्रसिद्ध कलाकार भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देंगे। लोकगीत, भक्ति संगीत और सांस्कृतिक नृत्य कार्यक्रमों के माध्यम से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन होगा। महोत्सव को लेकर खेल मैदान में मंच, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। भीड़ प्रबंधन के लिए पुलिस बल की तैनाती श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पेयजल, शौचालय, चिकित्सा शिविर तथा अस्थायी पार्किंग की व्यवस्था की गई है। भीड़ प्रबंधन के लिए पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या असामाजिक गतिविधि पर तत्काल नजर रखी जा सके। महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष पुलिस बल की भी व्यवस्था रहेगी। स्थानीय प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें। श्रद्धालुओं को कतारबद्ध होकर पूजा करने और अफवाहों पर ध्यान न देने की सलाह दी गई है। आपात स्थिति के लिए नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है, जहां से पूरे आयोजन की निगरानी की जाएगी। देवकुंड का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व भी इस अवसर पर विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यहां स्थित बाबा दूधेश्वरनाथ मंदिर प्राचीन काल से श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। बाबा दूधेश्वरनाथ मंदिर में स्थित शिवलिंग नीलम पत्थर का बना है। महाशिवरात्रि के दिन यहां दर्शन-पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। यही कारण है कि हर वर्ष हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन औरंगाबाद शहर में महाशिवरात्रि को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। शहर के विभिन्न मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है और पूजा-अर्चना के साथ धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। शहर के वी-मार्ट के पीछे स्थित शिवालय को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से भव्य रूप दिया गया है। शनिवार रात्रि भगवान शिव-पार्वती विवाह कार्यक्रम का आयोजन विधि-विधान के साथ संपन्न कराया गया। रस्म अदायगी के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। रविवार सुबह से ही यहां जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का सिलसिला जारी है। 24 घंटे का अखंड कीर्तन वहीं, कचहरी परिसर के समीप स्थित महाकाल मंदिर में 24 घंटे के अखंड कीर्तन का आयोजन किया गया है। उड़ीसा से पहुंचे रामभक्त पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर धुन पर राम नाम संकीर्तन कर रहे हैं। मंदिर परिसर को लगभग 2000 किलो गेंदा फूलों से सजाया गया है, जिससे इसकी भव्यता देखते ही बन रही है। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंच रहे हैं। आयोजन समिति के अनुसार पूजा-अर्चना के बाद भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा। अदरी नदी किनारे स्थित बुढ़वा महादेव मंदिर में भी सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। शहर के प्राचीन मंदिरों में शामिल इस मंदिर से प्रतिवर्ष भगवान शिव की बारात निकाली जाती है। संध्या में पारंपरिक गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य शिव बारात निकलेगी। कुल मिलाकर महाशिवरात्रि को लेकर पूरे शहर में श्रद्धा और उत्साह का वातावरण है। औरंगाबाद में महाशिवरात्रि पर्व पर मंदिर में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। गोह प्रखंड के देवकुंड स्थित बाबा दूधेश्वरनाथ मंदिर में अब तक करीब 50 हजार से ज्यादा श्रद्धालुओं ने जलाभिषेक किया। दूर-दराज के गांवों सहित पड़ोसी जिलों से भी श्रद्धालु यहां पहुंचकर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक कर रहे हैं। मंदिर प्रबंधन समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जलाभिषेक के लिए अलग-अलग कतारों की व्यवस्था की है। ताकि भीड़ के बावजूद पूजा सुचारु रूप से संपन्न हो सके। लगभग एक लाख से अधिक श्रद्धालुओं के पहुंचने का अनुमान है। विधि व्यवस्था को लेकर प्रशासन द्वारा सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। मठ कमेटी के सदस्यों ने बताया कि इस वर्ष महाशिवरात्रि पर विशेष रूद्राभिषेक किया गया। पूरे मंदिर परिसर में ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो रहा है । श्रद्धालुओं के लिए भजन-कीर्तन और भक्ति जागरण का भी आयोजन किया गया है, जिसमें स्थानीय कलाकार अपनी प्रस्तुति देंगे। गाजे-बाजे के साथ निकलेगी शिव-बारात महाशिवरात्रि की संध्या बेला में मठ परिसर से भव्य शिव बारात निकाली जाएगी। शिव बारात में भगवान शिव की झांकी, देवी-देवताओं के स्वरूप और पारंपरिक वेशभूषा में सजे कलाकार शामिल होंगे। ढोल-नगाड़ों और बैंड-बाजे के साथ निकाली जाने वाली इस बारात को देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग उमड़ते हैं। शिव बारात नगर भ्रमण करते हुए पुनः मंदिर परिसर में पहुंचेगी, जहां शिव-पार्वती विवाह की रस्में संपन्न की जाएंगी। यह विवाह समारोह श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र होता है। जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन मठाधीश महंत कन्हैयानंद पुरी के नेतृत्व में शिव-पार्वती विवाह की पारंपरिक रस्म अदा की जाएगी। वैदिक विधि-विधान और मंत्रोच्चार के बीच इस आयोजन को संपन्न कराया जाएगा। श्रद्धालु इस पावन दृश्य के साक्षी बनकर स्वयं को धन्य महसूस करते हैं। मान्यता है कि महाशिवरात्रि के दिन सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। दो दिवसीय ‘देवकुंड महोत्सव’ इधर, जिला प्रशासन भी महाशिवरात्रि को लेकर पूरी तरह सतर्क है। प्रशासनिक अधिकारियों के नेतृत्व में 16 और 17 फरवरी को देवकुंड खेल मैदान में दो दिवसीय ‘देवकुंड महोत्सव’ का आयोजन किया जाएगा। इस महोत्सव में स्थानीय कलाकारों के साथ-साथ बाहर से आए प्रसिद्ध कलाकार भी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति देंगे। लोकगीत, भक्ति संगीत और सांस्कृतिक नृत्य कार्यक्रमों के माध्यम से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन होगा। महोत्सव को लेकर खेल मैदान में मंच, प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। भीड़ प्रबंधन के लिए पुलिस बल की तैनाती श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पेयजल, शौचालय, चिकित्सा शिविर तथा अस्थायी पार्किंग की व्यवस्था की गई है। भीड़ प्रबंधन के लिए पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या असामाजिक गतिविधि पर तत्काल नजर रखी जा सके। महिला श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष पुलिस बल की भी व्यवस्था रहेगी। स्थानीय प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें और व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें। श्रद्धालुओं को कतारबद्ध होकर पूजा करने और अफवाहों पर ध्यान न देने की सलाह दी गई है। आपात स्थिति के लिए नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है, जहां से पूरे आयोजन की निगरानी की जाएगी। देवकुंड का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व भी इस अवसर पर विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यहां स्थित बाबा दूधेश्वरनाथ मंदिर प्राचीन काल से श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। बाबा दूधेश्वरनाथ मंदिर में स्थित शिवलिंग नीलम पत्थर का बना है। महाशिवरात्रि के दिन यहां दर्शन-पूजन का विशेष महत्व माना जाता है। यही कारण है कि हर वर्ष हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं और भोलेनाथ का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन औरंगाबाद शहर में महाशिवरात्रि को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। शहर के विभिन्न मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है और पूजा-अर्चना के साथ धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। शहर के वी-मार्ट के पीछे स्थित शिवालय को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से भव्य रूप दिया गया है। शनिवार रात्रि भगवान शिव-पार्वती विवाह कार्यक्रम का आयोजन विधि-विधान के साथ संपन्न कराया गया। रस्म अदायगी के बाद विशाल भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। रविवार सुबह से ही यहां जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का सिलसिला जारी है। 24 घंटे का अखंड कीर्तन वहीं, कचहरी परिसर के समीप स्थित महाकाल मंदिर में 24 घंटे के अखंड कीर्तन का आयोजन किया गया है। उड़ीसा से पहुंचे रामभक्त पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मधुर धुन पर राम नाम संकीर्तन कर रहे हैं। मंदिर परिसर को लगभग 2000 किलो गेंदा फूलों से सजाया गया है, जिससे इसकी भव्यता देखते ही बन रही है। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए पहुंच रहे हैं। आयोजन समिति के अनुसार पूजा-अर्चना के बाद भव्य भंडारे का आयोजन किया जाएगा। अदरी नदी किनारे स्थित बुढ़वा महादेव मंदिर में भी सुबह से श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी है। शहर के प्राचीन मंदिरों में शामिल इस मंदिर से प्रतिवर्ष भगवान शिव की बारात निकाली जाती है। संध्या में पारंपरिक गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ भव्य शिव बारात निकलेगी। कुल मिलाकर महाशिवरात्रि को लेकर पूरे शहर में श्रद्धा और उत्साह का वातावरण है।


