‘मैं अपनी गलतियों के लिए माफी मांगता हूं… अब बंदूक नहीं, परिवार के साथ सामान्य जिंदगी जीना चाहता हूं।’ मंच से यह कहते हुए नक्सली सुरेश कोड़ा ने तीन बार ‘एसटीएफ जिंदाबाद’ के नारे लगाए और आत्मसमर्पण कर दिया। बिहार के मुंगेर जिले में लंबे समय से सक्रिय और भाकपा (माओवादी) का स्पेशल एरिया कमांडर सुरेश कोड़ा पर 3 लाख रुपए का इनाम घोषित था। पुलिस का दावा है कि उसके सरेंडर से बिहार के 23 जिले नक्सल मुक्त हो गए हैं। सुरेश कोड़ा मुंगेर, लखीसराय और जमुई के पहाड़ी क्षेत्रों में हाल के दिनों तक सक्रिय रहा है। उसपर 50 से अधिक केस दर्ज हैं। हालांकि अब वह हथियार छोड़कर नई जिंदगी की शुरुआत की है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट कैसे हुआ सरेंडर, सिलसिलेवार जानिए घटनाक्रम… मुंगेर पुलिस केंद्र में सुरेश कोड़ा ने डीआईजी राकेश कुमार के सामने हथियार रखकर सरेंडर किया। उसने एक AK-47, एक AK-56, दो इंसास राइफल और 505 जिंदा कारतूस पुलिस को सौंपे। इस दौरान डीआईजी के अलावा डीएम और एसटीएफ के अधिकारी मौजूद थे। सुरेश कोड़ा मुंगेर जिले के लड़ैयांटांड थाना क्षेत्र के पैसरा गांव का रहने वाला है। 2008 में सुरेश पर दर्ज किया गया पहला केस
2008 में सुरेश पर पहला केस दर्ज किया गया और जुलाई 2025 तक उसके खिलाफ केस दर्ज होते रहे। जुलाई 2025 में हवेली खड़गपुर के राजासराय-कंदनी जंगल में एसटीएफ से उसकी बड़ी मुठभेड़ हुई थी। दोनों तरफ से भारी गोलीबारी हुई थी। घायल होने की खबर के बावजूद वह जंगल का फायदा उठाकर भाग निकला था। तब से सुरक्षा बल लगातार उसकी तलाश में थी। सुरेश का नाम कई बड़ी वारदातों से जुड़ी थी। इनमें चौकीदार की हत्या, विस्फोट और आगजनी, मुखिया की हत्या, दो भाइयों की हत्या, एसएसबी जवान की हत्या और लेवी नहीं देने पर वाहनों को जलाना। इसके साथ ही कई बार पुलिस से मुठभेड़ में भी वह शामिल रहा है। डीआईजी बोले- बिहार के 23 जिले नक्सल मुक्त
मुंगेर रेंज के डीआईजी राकेश कुमार ने कहा कि सुरेश कोड़ा के आत्मसमर्पण के बाद न केवल मुंगेर जिला, बल्कि बिहार आधिकारिक तौर पर नक्सल मुक्त हो गया है। वर्तमान समय में बिहार में कोई भी हथियारबंद नक्सली सक्रिय नहीं है। DM निखिल धनराज निप्पीणीकर ने कहा कि यह मुंगेर और बिहार के लिए गौरव का क्षण है। भारत सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत सुरेश कोड़ा को मिलने वाले लाभ शीघ्र प्रदान किए जाएंगे। अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से विकास कार्य किए जाएंगे। एसटीएफ जिंदाबाद का नारा लगाया
आत्मसमर्पण के बाद सुरेश ने कहा, ‘मुझसे जो गलती हुई, उसके लिए हम माफी मांगता है। अब हम सामान्य जिंदगी जीना चाहता है और परिवार के साथ रहना चाहता है। इस दौरान उसने तीन बार “एसटीएफ जिंदाबाद” के नारे भी लगाया। अब जानिए मुठभेड़ और कॉम्बिंग ऑपरेशन की कहानी हिरण के सींग और 865 गोलियां मिली मई-जून 2025 की बात है। सुरक्षा एजेंसियों को लगातार इनपुट मिल रहे थे कि हवेली खड़गपुर के राजासराय-कंदनी जंगल इलाके में नक्सलियों की गतिविधि बढ़ गई है। इसी दौरान एसएसबी ने जंगल में एक घर पर छापेमारी की। इसमें 865 गोलियां और हिरण के चार सींग बरामद किए। इसके बाद जून महीने में खड़गपुर जंगल में एक बम भी डिफ्यूज किया गया। इन घटनाओं के बाद साफ हो गया था कि इलाके में नक्सली सक्रिय हैं और बड़ी कार्रवाई की तैयारी चल रही है। इनपुट मिलने के बाद एसटीएफ ने डीएसपी सुनील कुमार के नेतृत्व में जंगल में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। टीम राजासराय इलाके में पहुंची तो नक्सलियों से आमना-सामना हो गया। अचानक दोनों तरफ से गोलियां चलनी शुरू हो गई। इस मुठभेड़ में करीब 100 राउंड गोलियां चलीं। अंधेरा और घना जंगल होने की वजह से नक्सली मौके का फायदा उठाकर भाग निकले। इसके बाद हवेली खड़गपुर थाने में सुरेश कोड़ा समेत तीन नामजद और कई अज्ञात नक्सलियों पर केस दर्ज किया गया। 5 जुलाई 2025 की बड़ी मुठभेड़ 5 जुलाई 2025 की शाम करीब 6:15 बजे एसटीएफ की विशेष टीम दुबारा राजासराय-कंदनी जंगल पहुंची। इस बार सुरेश कोड़ा के दस्ते से सीधी मुठभेड़ हुई। करीब एक घंटे तक दोनों तरफ से लगातार फायरिंग होती रही। इस मुठभेड़ में लगभग 200 राउंड गोलियां चलीं। पुलिस ने मौके से 40 खाली खोखे बरामद किए। मुठभेड़ के दौरान सुरेश कोड़ा के घायल होने की भी खबर सामने आई। इसके बावजूद वह जंगल और पहाड़ी इलाके का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा। बताया जाता है कि उसने अपने साथियों को बचाने के लिए पुलिस से मुठभेड़ किया और अंधेरे का फायदा उठाकर निकल गया। मुठभेड़ के बाद लगातार कॉम्बिंग ऑपरेशन इस मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने कॉम्बिंग ऑपरेशन शुरू किया। घायल सुरेश कोड़ा की तलाश में जंगल और पहाड़ी इलाकों में लगातार छापेमारी की गई। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां उसे पकड़ने के लिए लगातार दबाव बनाए रहे थे। इसी दबाव और लगातार कार्रवाई के बाद सुरेश ने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करने का फैसला लिया। ‘मैं अपनी गलतियों के लिए माफी मांगता हूं… अब बंदूक नहीं, परिवार के साथ सामान्य जिंदगी जीना चाहता हूं।’ मंच से यह कहते हुए नक्सली सुरेश कोड़ा ने तीन बार ‘एसटीएफ जिंदाबाद’ के नारे लगाए और आत्मसमर्पण कर दिया। बिहार के मुंगेर जिले में लंबे समय से सक्रिय और भाकपा (माओवादी) का स्पेशल एरिया कमांडर सुरेश कोड़ा पर 3 लाख रुपए का इनाम घोषित था। पुलिस का दावा है कि उसके सरेंडर से बिहार के 23 जिले नक्सल मुक्त हो गए हैं। सुरेश कोड़ा मुंगेर, लखीसराय और जमुई के पहाड़ी क्षेत्रों में हाल के दिनों तक सक्रिय रहा है। उसपर 50 से अधिक केस दर्ज हैं। हालांकि अब वह हथियार छोड़कर नई जिंदगी की शुरुआत की है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट कैसे हुआ सरेंडर, सिलसिलेवार जानिए घटनाक्रम… मुंगेर पुलिस केंद्र में सुरेश कोड़ा ने डीआईजी राकेश कुमार के सामने हथियार रखकर सरेंडर किया। उसने एक AK-47, एक AK-56, दो इंसास राइफल और 505 जिंदा कारतूस पुलिस को सौंपे। इस दौरान डीआईजी के अलावा डीएम और एसटीएफ के अधिकारी मौजूद थे। सुरेश कोड़ा मुंगेर जिले के लड़ैयांटांड थाना क्षेत्र के पैसरा गांव का रहने वाला है। 2008 में सुरेश पर दर्ज किया गया पहला केस
2008 में सुरेश पर पहला केस दर्ज किया गया और जुलाई 2025 तक उसके खिलाफ केस दर्ज होते रहे। जुलाई 2025 में हवेली खड़गपुर के राजासराय-कंदनी जंगल में एसटीएफ से उसकी बड़ी मुठभेड़ हुई थी। दोनों तरफ से भारी गोलीबारी हुई थी। घायल होने की खबर के बावजूद वह जंगल का फायदा उठाकर भाग निकला था। तब से सुरक्षा बल लगातार उसकी तलाश में थी। सुरेश का नाम कई बड़ी वारदातों से जुड़ी थी। इनमें चौकीदार की हत्या, विस्फोट और आगजनी, मुखिया की हत्या, दो भाइयों की हत्या, एसएसबी जवान की हत्या और लेवी नहीं देने पर वाहनों को जलाना। इसके साथ ही कई बार पुलिस से मुठभेड़ में भी वह शामिल रहा है। डीआईजी बोले- बिहार के 23 जिले नक्सल मुक्त
मुंगेर रेंज के डीआईजी राकेश कुमार ने कहा कि सुरेश कोड़ा के आत्मसमर्पण के बाद न केवल मुंगेर जिला, बल्कि बिहार आधिकारिक तौर पर नक्सल मुक्त हो गया है। वर्तमान समय में बिहार में कोई भी हथियारबंद नक्सली सक्रिय नहीं है। DM निखिल धनराज निप्पीणीकर ने कहा कि यह मुंगेर और बिहार के लिए गौरव का क्षण है। भारत सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति के तहत सुरेश कोड़ा को मिलने वाले लाभ शीघ्र प्रदान किए जाएंगे। अब नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में तेजी से विकास कार्य किए जाएंगे। एसटीएफ जिंदाबाद का नारा लगाया
आत्मसमर्पण के बाद सुरेश ने कहा, ‘मुझसे जो गलती हुई, उसके लिए हम माफी मांगता है। अब हम सामान्य जिंदगी जीना चाहता है और परिवार के साथ रहना चाहता है। इस दौरान उसने तीन बार “एसटीएफ जिंदाबाद” के नारे भी लगाया। अब जानिए मुठभेड़ और कॉम्बिंग ऑपरेशन की कहानी हिरण के सींग और 865 गोलियां मिली मई-जून 2025 की बात है। सुरक्षा एजेंसियों को लगातार इनपुट मिल रहे थे कि हवेली खड़गपुर के राजासराय-कंदनी जंगल इलाके में नक्सलियों की गतिविधि बढ़ गई है। इसी दौरान एसएसबी ने जंगल में एक घर पर छापेमारी की। इसमें 865 गोलियां और हिरण के चार सींग बरामद किए। इसके बाद जून महीने में खड़गपुर जंगल में एक बम भी डिफ्यूज किया गया। इन घटनाओं के बाद साफ हो गया था कि इलाके में नक्सली सक्रिय हैं और बड़ी कार्रवाई की तैयारी चल रही है। इनपुट मिलने के बाद एसटीएफ ने डीएसपी सुनील कुमार के नेतृत्व में जंगल में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। टीम राजासराय इलाके में पहुंची तो नक्सलियों से आमना-सामना हो गया। अचानक दोनों तरफ से गोलियां चलनी शुरू हो गई। इस मुठभेड़ में करीब 100 राउंड गोलियां चलीं। अंधेरा और घना जंगल होने की वजह से नक्सली मौके का फायदा उठाकर भाग निकले। इसके बाद हवेली खड़गपुर थाने में सुरेश कोड़ा समेत तीन नामजद और कई अज्ञात नक्सलियों पर केस दर्ज किया गया। 5 जुलाई 2025 की बड़ी मुठभेड़ 5 जुलाई 2025 की शाम करीब 6:15 बजे एसटीएफ की विशेष टीम दुबारा राजासराय-कंदनी जंगल पहुंची। इस बार सुरेश कोड़ा के दस्ते से सीधी मुठभेड़ हुई। करीब एक घंटे तक दोनों तरफ से लगातार फायरिंग होती रही। इस मुठभेड़ में लगभग 200 राउंड गोलियां चलीं। पुलिस ने मौके से 40 खाली खोखे बरामद किए। मुठभेड़ के दौरान सुरेश कोड़ा के घायल होने की भी खबर सामने आई। इसके बावजूद वह जंगल और पहाड़ी इलाके का फायदा उठाकर भागने में सफल रहा। बताया जाता है कि उसने अपने साथियों को बचाने के लिए पुलिस से मुठभेड़ किया और अंधेरे का फायदा उठाकर निकल गया। मुठभेड़ के बाद लगातार कॉम्बिंग ऑपरेशन इस मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने कॉम्बिंग ऑपरेशन शुरू किया। घायल सुरेश कोड़ा की तलाश में जंगल और पहाड़ी इलाकों में लगातार छापेमारी की गई। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां उसे पकड़ने के लिए लगातार दबाव बनाए रहे थे। इसी दबाव और लगातार कार्रवाई के बाद सुरेश ने हथियार छोड़कर आत्मसमर्पण करने का फैसला लिया।


