150 प्रोजेक्ट पर 50 करोड़ खर्च होंगे, 75 पार्षदों को 1-1 करोड़ मिलेगा…पैसा कहां से आएगा पता नहीं

150 प्रोजेक्ट पर 50 करोड़ खर्च होंगे, 75 पार्षदों को 1-1 करोड़ मिलेगा…पैसा कहां से आएगा पता नहीं

नगर निगम की सालाना कमाई 122 करोड़ और 125 करोड़ रूपए खर्च का प्रस्ताव
पटना नगर निगम की सोमवार को हुई सशक्त स्थायी समिति की 19वीं साधारण बैठक में 150 योजनाओं को स्वीकृति दी गई। इसमें करीब 45 वार्डों को कवर किया गया, जहां विभिन्न प्रोजेक्ट को पूरा करने पर 50 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होंगे। इसी तरह चौथी बार शहर के सभी 75 वार्ड पार्षदों को 1-1 करोड़ रुपए की राशि देने पर मुहर लगाई गई है।इसपर नगर निगम को 75 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे। जबकि, इन योजनाओं को पूरा करने के लिए राशि कहां से आएगी, इसकी जानकारी निगम प्रशासन और कार्यकारिणी को नहीं है। बता दें कि नगर निगम को सालाना अधिकतम 122 करोड़ रुपए ही राजस्व के तौर पर मिलता है। इस राजस्व का बड़ा हिस्सा कर्मियों को सैलरी देने में ही खर्च हो जाता है। इससे साफ जाहिर होता है कि बगैर किसी रोडमैप के इन योजनाओं को सशक्त स्थायी समिति से मंजूरी मिल गई है। इस बैठक में महापौर सीता साहू, नगर आयुक्त यशपाल मीणा, उपनगर आयुक्त रेशमी कुमार के साथ ही सशक्त स्थायी समिति के सदस्य भी शामिल हुए। पार्षदों की मांग पर मेयर 19 करोड़ खर्च करेंगी जिन योजनाओं को स्वीकृति दी गई है, उसमें महापौर के क्षेत्र भ्रमण के दौरान मिली अनुशंसाओं का हवाला दिया गया है। इसमें 40 से अधिक वार्डों को चिह्नित किया गया है, जिसमें 49 तरह के निर्माण कार्य किए जाएंगे। इसपर करीब 19 करोड़ रुपए की लागत आएगी। महापौर के क्षेत्र भ्रमण के दौरान स्थानीय पार्षदों ने इन योजनाओं की मांग की थी। इसके बाद महापौर ने बैठक में इन योजनाओं की स्वीकृति दी है। पहले की कार्यवाहियों की संपुष्टि इस बार की बैठक में कुछ खास बात रही। पूर्व में आयोजित 14वीं, 15वीं, 16वीं, 17वीं और 18वीं साधारण बैठकों की कार्यवाहियों की संपुष्टि भी कर दी गई। साथ ही सशक्त स्थायी समिति की चतुर्थ विशेष बैठक (बजट 2025-26) की कार्यवाही को भी अनुमोदित दिया गया। पहले की बजट के दौरान कई ऐसे पेंडिंग प्रोजेक्ट हैं, जो अभी तक केवल कागजों में ही दर्ज हैं। इसको लेकर पटना नगर निगम किसी स्तर पर पहल नहीं कर रहा है। नौ जगहों पर बनेंगे फायर हाईड्रेंट निगम उच्च क्षमता वाली बोरिंग करा रहा है। साथ ही शहर के 3 अंचलों- कंकड़बाग, नूतन राजधानी और बांकीपुर के वार्डों में 9 जगहों पर अग्निशमन की सुविधा के लिए फायर हाईड्रेंट की स्थापना होगी। वार्डों में मैनहोल निर्माण/मरम्मत, मैनहोल एम्बुलेंस के संचालन से जुड़े प्रावधानों पर निर्णय लिया गया। इधर, नगर निगम के वार्ड 3, 7, 25, 30, 42, 57, 63, 65, 67, 69, 70 सहित अन्य वार्डों में पेयजल आपूर्ति के लिए जलापूर्ति पाइपलाइन का विस्तार होगा। बैठक में ड्रेनेज एवं सड़क सुधार कार्यों पर स्वीकृति दी गई। कहीं फ्लोर मैनेजमेंट की तैयारी तो नहीं इस बार की सशक्त स्थायी समिति की बैठक में वार्डों में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्यों को मंजूर किया गया है। एक साथ 150 से अधिक प्रोजेक्ट पर मुहर लगी है। कहा जा रहा है कि यह पूरी कवायद आने वाले दिनों में सशक्त स्थायी समिति के चुनाव को लेकर है। अधिक से अधिक पार्षदों को खुश और अपने पाले में रखने के लिए ऐसा किया गया है। दरअसल, मार्च में नगर निगम में सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों का चुनाव पार्षदों के मतों से होना है। ऐसे में चुनावी अधिसूचना जारी होते ही वर्तमान के सभी सशक्त स्थायी समिति के सदस्य बाहर हो जाएंगे। नगर निगम की गलियारे में ये बातें कही जाने लगी हैं कि अपने पार्षदों को स्टैंडिंग में जिताने के लिए इस बार इन योजनाओं की स्वीकृति दी गई है। इसे फ्लोर मैनेजमेंट कहा जा रहा है। नगर निगम की सालाना कमाई 122 करोड़ और 125 करोड़ रूपए खर्च का प्रस्ताव
पटना नगर निगम की सोमवार को हुई सशक्त स्थायी समिति की 19वीं साधारण बैठक में 150 योजनाओं को स्वीकृति दी गई। इसमें करीब 45 वार्डों को कवर किया गया, जहां विभिन्न प्रोजेक्ट को पूरा करने पर 50 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होंगे। इसी तरह चौथी बार शहर के सभी 75 वार्ड पार्षदों को 1-1 करोड़ रुपए की राशि देने पर मुहर लगाई गई है।इसपर नगर निगम को 75 करोड़ रुपए खर्च करने होंगे। जबकि, इन योजनाओं को पूरा करने के लिए राशि कहां से आएगी, इसकी जानकारी निगम प्रशासन और कार्यकारिणी को नहीं है। बता दें कि नगर निगम को सालाना अधिकतम 122 करोड़ रुपए ही राजस्व के तौर पर मिलता है। इस राजस्व का बड़ा हिस्सा कर्मियों को सैलरी देने में ही खर्च हो जाता है। इससे साफ जाहिर होता है कि बगैर किसी रोडमैप के इन योजनाओं को सशक्त स्थायी समिति से मंजूरी मिल गई है। इस बैठक में महापौर सीता साहू, नगर आयुक्त यशपाल मीणा, उपनगर आयुक्त रेशमी कुमार के साथ ही सशक्त स्थायी समिति के सदस्य भी शामिल हुए। पार्षदों की मांग पर मेयर 19 करोड़ खर्च करेंगी जिन योजनाओं को स्वीकृति दी गई है, उसमें महापौर के क्षेत्र भ्रमण के दौरान मिली अनुशंसाओं का हवाला दिया गया है। इसमें 40 से अधिक वार्डों को चिह्नित किया गया है, जिसमें 49 तरह के निर्माण कार्य किए जाएंगे। इसपर करीब 19 करोड़ रुपए की लागत आएगी। महापौर के क्षेत्र भ्रमण के दौरान स्थानीय पार्षदों ने इन योजनाओं की मांग की थी। इसके बाद महापौर ने बैठक में इन योजनाओं की स्वीकृति दी है। पहले की कार्यवाहियों की संपुष्टि इस बार की बैठक में कुछ खास बात रही। पूर्व में आयोजित 14वीं, 15वीं, 16वीं, 17वीं और 18वीं साधारण बैठकों की कार्यवाहियों की संपुष्टि भी कर दी गई। साथ ही सशक्त स्थायी समिति की चतुर्थ विशेष बैठक (बजट 2025-26) की कार्यवाही को भी अनुमोदित दिया गया। पहले की बजट के दौरान कई ऐसे पेंडिंग प्रोजेक्ट हैं, जो अभी तक केवल कागजों में ही दर्ज हैं। इसको लेकर पटना नगर निगम किसी स्तर पर पहल नहीं कर रहा है। नौ जगहों पर बनेंगे फायर हाईड्रेंट निगम उच्च क्षमता वाली बोरिंग करा रहा है। साथ ही शहर के 3 अंचलों- कंकड़बाग, नूतन राजधानी और बांकीपुर के वार्डों में 9 जगहों पर अग्निशमन की सुविधा के लिए फायर हाईड्रेंट की स्थापना होगी। वार्डों में मैनहोल निर्माण/मरम्मत, मैनहोल एम्बुलेंस के संचालन से जुड़े प्रावधानों पर निर्णय लिया गया। इधर, नगर निगम के वार्ड 3, 7, 25, 30, 42, 57, 63, 65, 67, 69, 70 सहित अन्य वार्डों में पेयजल आपूर्ति के लिए जलापूर्ति पाइपलाइन का विस्तार होगा। बैठक में ड्रेनेज एवं सड़क सुधार कार्यों पर स्वीकृति दी गई। कहीं फ्लोर मैनेजमेंट की तैयारी तो नहीं इस बार की सशक्त स्थायी समिति की बैठक में वार्डों में बड़े पैमाने पर निर्माण कार्यों को मंजूर किया गया है। एक साथ 150 से अधिक प्रोजेक्ट पर मुहर लगी है। कहा जा रहा है कि यह पूरी कवायद आने वाले दिनों में सशक्त स्थायी समिति के चुनाव को लेकर है। अधिक से अधिक पार्षदों को खुश और अपने पाले में रखने के लिए ऐसा किया गया है। दरअसल, मार्च में नगर निगम में सशक्त स्थायी समिति के सदस्यों का चुनाव पार्षदों के मतों से होना है। ऐसे में चुनावी अधिसूचना जारी होते ही वर्तमान के सभी सशक्त स्थायी समिति के सदस्य बाहर हो जाएंगे। नगर निगम की गलियारे में ये बातें कही जाने लगी हैं कि अपने पार्षदों को स्टैंडिंग में जिताने के लिए इस बार इन योजनाओं की स्वीकृति दी गई है। इसे फ्लोर मैनेजमेंट कहा जा रहा है।  

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