औरंगाबाद में चालू खरीफ विपणन वर्ष के तहत धान अधिप्राप्ति की प्रक्रिया जारी है। धान बेचने के लिए कुल 48,513 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया है। इनमें 26,737 रैयत किसान जबकि 21,777 गैर रैयत किसान शामिल हैं। आवेदन करने वाले किसानों में से 44,946 किसानों ने पैक्स और 3,568 किसानों ने व्यापार मंडल के माध्यम से धान बेचने के लिए रजीस्ट्रेशन कराया है। प्रखंडवार आंकड़ों पर नजर डालें, तो सबसे अधिक आवेदन ओबरा प्रखंड से 5,553 किसानों की ओर से किया गया है। नबीनगर से 5,428, कुटुंबा से 5,083, गोह से 5,964, दाउदनगर से 4,818, बरुण से 4,307, रफीगंज से 4,014, औरंगाबाद सदर से 3,665, देव से 3,586, मदनपुर से 3,240 और हसपुरा से 3,056 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया है। 188 समितियों की ओर से की जा रही धान की अधिप्राप्ति धान अधिप्राप्ति की स्थिति की बात करें, तो जिले में कुल 188 समितियों के माध्यम से धान की खरीद की जा रही है। इनमें 178 पैक्स और 10 व्यापार मंडल शामिल हैं। इन समितियों की ओर से अब तक 11,414 किसानों से कुल 1,01,666.436 मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है। प्रखंडवार धान खरीद के आंकड़े भी सामने आए हैं। गोह प्रखंड में सबसे अधिक 11,789.088 एमटी धान की अधिप्राप्ति हुई है, जबकि हसपुरा प्रखंड में सबसे कम 6,374.500 एमटी धान की खरीद दर्ज की गई है। अन्य प्रखंडों में औरंगाबाद सदर में 7,971.652 एमटी, बरुण में 10,300.298 एमटी, दाउदनगर में 8,604.157 एमटी, देव में 7,274.738 एमटी, कुटुंबा में 10,065.736 एमटी, मदनपुर में 6,388.300 एमटी, नबीनगर में 10,931.076 एमटी, ओबरा में 11,544.291 एमटी और रफीगंज में 10,417.200 एमटी धान की खरीद की गई है। निर्धारित समय पर लक्ष्य को पूरा किया जाएगा जिला सहकारिता पदाधिकारी ने दावा किया है कि निर्धारित समय-सीमा के अंदर शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा और किसानों को सरकार की मंशा के अनुरूप लाभ दिया जाएगा। हालांकि, जमीनी हकीकत इससे इतर नजर आ रही है। जिले के अधिकांश किसानों का कहना है कि इस साल उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का फायदा नहीं मिल सका। बुमरू गांव निवासी किसान संजय सिंह और सुही गांव के सुदर्शन पांडेय सहित अन्य किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से इस बार धान खरीद का लक्ष्य पहले से ही काफी कम निर्धारित किया गया है। ऐसे में पैक्स स्तर पर सीमित मात्रा में ही धान की खरीद हो रही है। लक्ष्य बढ़ाने की मांग किसानों का यह भी कहना है कि कई पैक्स अध्यक्षों की ओर से अपने चहेते किसानों से ही धान की अधिप्राप्ति की जा रही है, जिससे बड़ी संख्या में वास्तविक किसान एमएसपी के फायदे से वंचित रह गए हैं। किसानों ने प्रशासन से धान खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और लक्ष्य बढ़ाने की मांग की है। औरंगाबाद में चालू खरीफ विपणन वर्ष के तहत धान अधिप्राप्ति की प्रक्रिया जारी है। धान बेचने के लिए कुल 48,513 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया है। इनमें 26,737 रैयत किसान जबकि 21,777 गैर रैयत किसान शामिल हैं। आवेदन करने वाले किसानों में से 44,946 किसानों ने पैक्स और 3,568 किसानों ने व्यापार मंडल के माध्यम से धान बेचने के लिए रजीस्ट्रेशन कराया है। प्रखंडवार आंकड़ों पर नजर डालें, तो सबसे अधिक आवेदन ओबरा प्रखंड से 5,553 किसानों की ओर से किया गया है। नबीनगर से 5,428, कुटुंबा से 5,083, गोह से 5,964, दाउदनगर से 4,818, बरुण से 4,307, रफीगंज से 4,014, औरंगाबाद सदर से 3,665, देव से 3,586, मदनपुर से 3,240 और हसपुरा से 3,056 किसानों ने ऑनलाइन आवेदन किया है। 188 समितियों की ओर से की जा रही धान की अधिप्राप्ति धान अधिप्राप्ति की स्थिति की बात करें, तो जिले में कुल 188 समितियों के माध्यम से धान की खरीद की जा रही है। इनमें 178 पैक्स और 10 व्यापार मंडल शामिल हैं। इन समितियों की ओर से अब तक 11,414 किसानों से कुल 1,01,666.436 मीट्रिक टन धान की खरीद की जा चुकी है। प्रखंडवार धान खरीद के आंकड़े भी सामने आए हैं। गोह प्रखंड में सबसे अधिक 11,789.088 एमटी धान की अधिप्राप्ति हुई है, जबकि हसपुरा प्रखंड में सबसे कम 6,374.500 एमटी धान की खरीद दर्ज की गई है। अन्य प्रखंडों में औरंगाबाद सदर में 7,971.652 एमटी, बरुण में 10,300.298 एमटी, दाउदनगर में 8,604.157 एमटी, देव में 7,274.738 एमटी, कुटुंबा में 10,065.736 एमटी, मदनपुर में 6,388.300 एमटी, नबीनगर में 10,931.076 एमटी, ओबरा में 11,544.291 एमटी और रफीगंज में 10,417.200 एमटी धान की खरीद की गई है। निर्धारित समय पर लक्ष्य को पूरा किया जाएगा जिला सहकारिता पदाधिकारी ने दावा किया है कि निर्धारित समय-सीमा के अंदर शत-प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर लिया जाएगा और किसानों को सरकार की मंशा के अनुरूप लाभ दिया जाएगा। हालांकि, जमीनी हकीकत इससे इतर नजर आ रही है। जिले के अधिकांश किसानों का कहना है कि इस साल उन्हें न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) का फायदा नहीं मिल सका। बुमरू गांव निवासी किसान संजय सिंह और सुही गांव के सुदर्शन पांडेय सहित अन्य किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार की ओर से इस बार धान खरीद का लक्ष्य पहले से ही काफी कम निर्धारित किया गया है। ऐसे में पैक्स स्तर पर सीमित मात्रा में ही धान की खरीद हो रही है। लक्ष्य बढ़ाने की मांग किसानों का यह भी कहना है कि कई पैक्स अध्यक्षों की ओर से अपने चहेते किसानों से ही धान की अधिप्राप्ति की जा रही है, जिससे बड़ी संख्या में वास्तविक किसान एमएसपी के फायदे से वंचित रह गए हैं। किसानों ने प्रशासन से धान खरीद प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और लक्ष्य बढ़ाने की मांग की है।


