इलाहाबाद हाईकोर्ट ने थाना मुसाफिर खाना, सुल्तानपुर में 48 साल पहले पूर्व सैनिक की हत्या आरोपी गुरू प्रसाद की उम्रकैद की सजा रद कर दी है।सत्र अदालत ने हत्या मैं शामिल होने का दोषी माना सजा सुनाई थी। हाईकोर्ट ने कहा अभियोजन अपीलार्थी के विरुद्ध आरोप साबित करने में नाकाम रहा। उसके हाथ में लाठी थी, हत्या सह अभियुक्त की बंदूक की गोली से हुई थी। जिसमें इसकी भूमिका नहीं थी।
1981 को सत्र अदालत ने दी थी उम्रकैद
कोर्ट ने 18 मार्च 81 को सत्र अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा रद कर दी।और जमानत बंधपत्र निरस्त कर दिया। यह फैसला न्यायमूर्ति सी डी सिंह तथा न्यायमूर्ति देवेन्द्र सिंह की खंडपीठ ने राम हृदय,शिवराम व गुरू प्रसाद की अपीलों की सुनवाई करते हुए दिया।दो आरोपितों की मौत होने से अपील अवेट हो चुकी थी। मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर लखनऊ खंडपीठ से अपील इलाहाबाद हाईकोर्ट प्रधान पीठ निस्तारण के लिए नामित की गई थी। लखनऊ मिलिट्री अस्पताल में हुई थी मौत मालूम हो कि भगवती सेवक पांच भाई हैं। उन्होंने अपने भाई पर जानलेवा हमला करने की एफआईआर दर्ज कराई। आरोप लगाया कि वह भाइयों के साथ बैठा था, पट्टीदार आरोपी व अन्य ने असलहे व लाठी लेकर घेर लिया। मुख्य आरोपी ने फायर कर दिया। जिसमें त्रिभुवन दत्त को गोली लगी।यह दुश्मनी के कारण हुआ।घटना 1978की है। घायल को अस्पताल ले जाया गया।बाद में लखनऊ मिलिट्री अस्पताल भेजा गया। इलाज के दौरान मौत हो गई।डाक्टरी रिपोर्ट में मौत का कारण सेप्टीसीमिया बताया गया।मृतक की आयु 35साल की थी। पुलिस ने चार्जशीट दी।सत्र अदालत ने सजा सुनाई थी।जिसे अपील में चुनौती दी गई थी।


