पहले यह तस्वीर देखिए… पीले रंग की चेक शर्ट पहने, ललाट पर गुलाल लगाए और नजरें झुकाए। साधारण लग रहे जिस शख्स को आप देख रहे हैं, उसका नाम रौशन कुमार है। 2 मार्च तक इसकी पहचान असिस्टेंट इंजीनियर के रूप में थी। बेतिया के जिला शिक्षा कार्यालय में पोस्टिंग थी। अब ठिकाना बदल गया है। जनाब जेल में बंद हैं। होली पटना के बेउर जेल में मनी है। अब पूछिए ऐसा क्यों? क्योंकि साहब अवैध कमाई कर रहे थे। रंगे हाथ रिश्वत लेते पकड़े गए। होलिका दहन की शाम (2 मार्च) को पटना से गई स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) की टीम ने रौशन को रिश्वत के तौर पर 5 लाख रुपए कैश और एक स्मार्ट वॉच लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। उसे उनके ऑफिस के पास के ही चाय दुकान से पकड़ा गया। 40 हजार रुपए सैलरी वाले इंजीनियर के घर 42 लाख कैश मिला। पूछने पर बोला कि सारा पैसा मेरा नहीं है। होली बाद बड़े अफसरों को एक करोड़ देना था। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए, 6 महीने के कॉन्ट्रैक्ट की जॉब से रौशन कुमार ने कैसे 42 लाख रुपए जुटा लिए? पकड़े जाने के बाद किन अधिकारियों का नाम लिया? रिश्वत के पैसे किन लोगों तक पहुंचाए जाने वाले थे? कार्टून में रखे थे 42 लाख रुपए, गिनने के लिए मंगाई मशीन पटना से SVU की टीम पूरी तैयारी के साथ बेतिया गई थी। टीम रौशन की पूरी कुंडली खंगाल चुकी थी। पहले से इनपुट थी कि इसने रिश्वत में लाखों रुपए कमाए हैं। ये पैसे इसके पास हैं। अधिकारियों को रौशन के बेतिया में किराए पर लिए गए फ्लैट का पता मालूम नहीं था। इसलिए रंगेहाथ रिश्वत लेते पकड़ने के बाद रौशन से उसके ऑफिस में ही शुरुआती पूछताछ की गई। उससे फ्लैट का पता पूछा गया। रौशन बार-बार इस बात से इनकार कर रहा था कि उसने कोई किराए पर फ्लैट ले रखा है। जब टीम ने सख्ती दिखाई तो वह टूटा और पता बता दिया। इसके बाद SVU के अधिकारी रौशन को साथ लेकर बेतिया के पयूनी बाग पहुंचे। वहां लेदर फैक्ट्री के पास इसने किराए पर दो कमरे का एक फ्लैट ले रखा था। SVU ने इसके पूरे फ्लैट को खंगाला। इसी दौरान एक कमरे के छज्जा पर रखा कार्टून मिला। टीम ने खोला तो देखा कि कार्टून पैसे से भरा है। 500-500 रुपए के नोट इतने अधिक थे कि गिनने के लिए मशीन मंगवाई गई। नोटों की गिनती 42 लाख 500 रुपए के आंकड़े पर खत्म हुई। पैसे SVU ने जब्त कर लिए हैं। रौशन ने ये पैसे रिश्वत लेकर जुटाए थे। फ्लैट पर सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात 11:30 से 2 बजे तक छापेमारी चली। 60 हजार का वेतन छोड़कर 40 हजार में किया कॉन्ट्रैक्ट पर काम
5 जनवरी 1990 को जन्मे रौशन कुमार की उम्र 36 साल है। वह मूल रूप से लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा का है। पिता का नाम राजकिशोर सिंह है। रौशन ने बीटेक तक पढ़ाई की है। ऐसा नहीं है कि रौशन पढ़ाई पूरी करने के बाद सरकारी नौकरी में आ गया था। इसने झारखंड और पश्चिम बंगाल की प्राइवेट कंपनियों में लंबे वक्त तक काम किया है। इसकी शुरुआती सैलरी मात्र 25 हजार रुपए थी। इसने 60 हजार रुपए वेतन छोड़कर 40 हजार रुपए में कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर सरकार के लिए काम किया। रिश्वत में लाखों रुपए लिए। 40 हजार सैलरी, 6 महीने की नौकरी, वसूल लिए 42 लाख रुपए रौशन कुमार की असिस्टेंट इंजीनियर की नौकरी परमानेंट नहीं है। वह एक संविदाकर्मी है। मतलब बिहार सरकार के शिक्षा विभाग में कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर उसकी बहाली हुई थी। सैलरी 40 हजार रुपए थी। उसने इस पद पर 6 महीने ही नौकरी की थी। SVU ने जो उसकी कुंडली खंगाली है, उसके मुताबिक अगस्त 2025 में ही इसने कांट्रैक्ट पर शिक्षा विभाग जॉइन किया। तब से लेकर पकड़े जाने तक इसकी पोस्टिंग बेतिया के जिला शिक्षा कार्यालय में थी। अब जांच एजेंसी के सामने सवाल उठ रहे हैं कि 40 हजार रुपए की सैलरी और 6 महीने की नौकरी करने वाले इस शख्स के पास से बरामद 42 लाख रुपए आए कहां से? इसने किस तरह इतने पैसे वसूल लिए? ठेकेदारों को लूटने का चल रहा था खेल
दरअसल, लंबे वक्त से बेतिया में ठेकेदारों को लूटने का खेल चल रहा था। सरकारी योजना के तहत काम करने के बाद अपने ही रुपए लेने के लिए ठेकदारों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही थी। उनसे पेंडिंग बिल पास कराने के नाम पर 10 प्रतिशत कमिशन मांगी जा रही थी। इसे इस तरह से समझिए। मोतिहारी के नौतन के रहने वाले शम्स तबरेज ठेकेदार हैं। सिविल वर्क का ठेका लेते हैं। बिहार शिक्षा परियोजना के तहत बेतिया के सरकारी स्कूलों में पानी के लिए बोरिंग करने का इन्हें 57 लाख रुपए का ठेका मिला था। तबरेज ने काम कर दिया। इसके बाद भी काफी समय से इनका बिल पेंडिंग था। इस बिल को पास करने के नाम पर असिस्टेंट इंजीनियर रौशन कुमार 10 प्रतिशत के रूप में 5 लाख 70 हजार रुपए मांग रहा था। जिला शिक्षा परियोजना के तहत मिलने वाला ठेका होली बाद छापेमारी होती तो मिलते 1 करोड़ रुपए
सूत्रों के मुताबिक, SVU की टीम अगर होली के बाद छापेमारी करती तो 1 करोड़ रुपए से अधिक कैश बरामद होते। इसकी वजह ये है कि अलग-अलग योजनाओं के तहत ठेका लेकर और अपने रुपए खर्च कर काम पूरा कर चुके कई ठेकेदारों के बिल अब भी पेंडिंग हैं। उन सभी से पेंडिंग बिल पास करने के नाम पर 10 प्रतिशत की कमिशन मांगी गई थी। SVU के इस कार्रवाई से जिला शिक्षा कार्यालय में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के अंदर हड़कंप मचा हुआ है। दो अधिकारियों तक पहुंचाने वाले थे पैसे
जेल जाने से पहले गिरफ्तार असिस्टेंट इंजीनियर रौशन कुमार ने उन अधिकारियों की पोल खोल दी है, जो पर्दे के पीछे से कमिशन के खेल में शामिल थे। SVU से जुड़े सूत्रों के अनुसार रौशन से लंबी पूछताछ हुई थी। पहले तो वह कुछ बता नहीं रहा था, लेकिन थोड़ी सख्ती बरतने के बाद टूट गया। उसने जिले के दो बड़े पद वाले अधिकारियों का नाम लिया है। उसके अनुसार रिश्वत के 5 लाख और फ्लैट के जब्त 42 लाख रुपए में से जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला परियोजना पदाधिकारी तक उसका हिस्सा पहुंचने वाला था। रौशन के इस बयान की भी पड़ताल होगी। बेतिया DEO के ठिकानों से मिले थे 3.55 करोड़ रुपए पिछले साल जनवरी में SVU ने बेतिया के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) रजनीकांत के ठिकानों पर छापेमारी की थी। दो जिलों में मौजूद इनके ठिकानों से 3 करोड़ 55 लाख 22 हजार रुपए कैश बरामद किए गए थे। इसमें रजनीकांत के बेतिया वाले घर से 54 लाख 62 हजार तो मधुबनी में इनकी पत्नी सुषमा के किराए के घर से 3 करोड़ 60 हजार रुपए कैश बरामद हुए थे। इसके अलावा 3 करोड़ 12 लाख रुपए से अधिक की अचल संपत्ति का पता चला था। रजनीकांत ने मधुबनी में 7, दरभंगा में 6, पटना में 3 और मुजफ्फरपुर में जमीन का एक प्लॉट खरीद रखा था। आय से अधिक संपत्ति के केस में रजनीकांत जेल में बंद है। SVU ने अपनी जांच में इनके काली कमाई की पुष्टि की है। कोर्ट में दाखिल किए गए चार्जशीट में पति और पत्नी, दोनों को आरोपी बनाया है। दूसरी FIR कर खंगाली जाएगी चल-अचल संपत्ति
असिस्टेंट इंजीनियर रौशन के खिलाफ SVU ने प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट (2018) के तहत कार्रवाई की है। एक्ट की धारा 7 के तहत FIR (नंबर 9/2026) दर्ज हुई। इसी केस के तहत उसे रंगे हाथ रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया और जेल भेजा गया। अब बहुत जल्द इसके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का दूसरा केस दर्ज किया जाएगा। इसके बाद जांच एजेंसी इसकी पूरी चल-अचल संपत्ति खंगालेगी। काली कमाई कर इसने कब, कहां और कितनी संपत्ति खरीद रखी है, इसका पता लगाएगी। पहले यह तस्वीर देखिए… पीले रंग की चेक शर्ट पहने, ललाट पर गुलाल लगाए और नजरें झुकाए। साधारण लग रहे जिस शख्स को आप देख रहे हैं, उसका नाम रौशन कुमार है। 2 मार्च तक इसकी पहचान असिस्टेंट इंजीनियर के रूप में थी। बेतिया के जिला शिक्षा कार्यालय में पोस्टिंग थी। अब ठिकाना बदल गया है। जनाब जेल में बंद हैं। होली पटना के बेउर जेल में मनी है। अब पूछिए ऐसा क्यों? क्योंकि साहब अवैध कमाई कर रहे थे। रंगे हाथ रिश्वत लेते पकड़े गए। होलिका दहन की शाम (2 मार्च) को पटना से गई स्पेशल विजिलेंस यूनिट (SVU) की टीम ने रौशन को रिश्वत के तौर पर 5 लाख रुपए कैश और एक स्मार्ट वॉच लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया। उसे उनके ऑफिस के पास के ही चाय दुकान से पकड़ा गया। 40 हजार रुपए सैलरी वाले इंजीनियर के घर 42 लाख कैश मिला। पूछने पर बोला कि सारा पैसा मेरा नहीं है। होली बाद बड़े अफसरों को एक करोड़ देना था। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए, 6 महीने के कॉन्ट्रैक्ट की जॉब से रौशन कुमार ने कैसे 42 लाख रुपए जुटा लिए? पकड़े जाने के बाद किन अधिकारियों का नाम लिया? रिश्वत के पैसे किन लोगों तक पहुंचाए जाने वाले थे? कार्टून में रखे थे 42 लाख रुपए, गिनने के लिए मंगाई मशीन पटना से SVU की टीम पूरी तैयारी के साथ बेतिया गई थी। टीम रौशन की पूरी कुंडली खंगाल चुकी थी। पहले से इनपुट थी कि इसने रिश्वत में लाखों रुपए कमाए हैं। ये पैसे इसके पास हैं। अधिकारियों को रौशन के बेतिया में किराए पर लिए गए फ्लैट का पता मालूम नहीं था। इसलिए रंगेहाथ रिश्वत लेते पकड़ने के बाद रौशन से उसके ऑफिस में ही शुरुआती पूछताछ की गई। उससे फ्लैट का पता पूछा गया। रौशन बार-बार इस बात से इनकार कर रहा था कि उसने कोई किराए पर फ्लैट ले रखा है। जब टीम ने सख्ती दिखाई तो वह टूटा और पता बता दिया। इसके बाद SVU के अधिकारी रौशन को साथ लेकर बेतिया के पयूनी बाग पहुंचे। वहां लेदर फैक्ट्री के पास इसने किराए पर दो कमरे का एक फ्लैट ले रखा था। SVU ने इसके पूरे फ्लैट को खंगाला। इसी दौरान एक कमरे के छज्जा पर रखा कार्टून मिला। टीम ने खोला तो देखा कि कार्टून पैसे से भरा है। 500-500 रुपए के नोट इतने अधिक थे कि गिनने के लिए मशीन मंगवाई गई। नोटों की गिनती 42 लाख 500 रुपए के आंकड़े पर खत्म हुई। पैसे SVU ने जब्त कर लिए हैं। रौशन ने ये पैसे रिश्वत लेकर जुटाए थे। फ्लैट पर सोमवार-मंगलवार की दरम्यानी रात 11:30 से 2 बजे तक छापेमारी चली। 60 हजार का वेतन छोड़कर 40 हजार में किया कॉन्ट्रैक्ट पर काम
5 जनवरी 1990 को जन्मे रौशन कुमार की उम्र 36 साल है। वह मूल रूप से लखीसराय जिले के सूर्यगढ़ा का है। पिता का नाम राजकिशोर सिंह है। रौशन ने बीटेक तक पढ़ाई की है। ऐसा नहीं है कि रौशन पढ़ाई पूरी करने के बाद सरकारी नौकरी में आ गया था। इसने झारखंड और पश्चिम बंगाल की प्राइवेट कंपनियों में लंबे वक्त तक काम किया है। इसकी शुरुआती सैलरी मात्र 25 हजार रुपए थी। इसने 60 हजार रुपए वेतन छोड़कर 40 हजार रुपए में कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर सरकार के लिए काम किया। रिश्वत में लाखों रुपए लिए। 40 हजार सैलरी, 6 महीने की नौकरी, वसूल लिए 42 लाख रुपए रौशन कुमार की असिस्टेंट इंजीनियर की नौकरी परमानेंट नहीं है। वह एक संविदाकर्मी है। मतलब बिहार सरकार के शिक्षा विभाग में कॉन्ट्रैक्ट के आधार पर उसकी बहाली हुई थी। सैलरी 40 हजार रुपए थी। उसने इस पद पर 6 महीने ही नौकरी की थी। SVU ने जो उसकी कुंडली खंगाली है, उसके मुताबिक अगस्त 2025 में ही इसने कांट्रैक्ट पर शिक्षा विभाग जॉइन किया। तब से लेकर पकड़े जाने तक इसकी पोस्टिंग बेतिया के जिला शिक्षा कार्यालय में थी। अब जांच एजेंसी के सामने सवाल उठ रहे हैं कि 40 हजार रुपए की सैलरी और 6 महीने की नौकरी करने वाले इस शख्स के पास से बरामद 42 लाख रुपए आए कहां से? इसने किस तरह इतने पैसे वसूल लिए? ठेकेदारों को लूटने का चल रहा था खेल
दरअसल, लंबे वक्त से बेतिया में ठेकेदारों को लूटने का खेल चल रहा था। सरकारी योजना के तहत काम करने के बाद अपने ही रुपए लेने के लिए ठेकदारों को कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही थी। उनसे पेंडिंग बिल पास कराने के नाम पर 10 प्रतिशत कमिशन मांगी जा रही थी। इसे इस तरह से समझिए। मोतिहारी के नौतन के रहने वाले शम्स तबरेज ठेकेदार हैं। सिविल वर्क का ठेका लेते हैं। बिहार शिक्षा परियोजना के तहत बेतिया के सरकारी स्कूलों में पानी के लिए बोरिंग करने का इन्हें 57 लाख रुपए का ठेका मिला था। तबरेज ने काम कर दिया। इसके बाद भी काफी समय से इनका बिल पेंडिंग था। इस बिल को पास करने के नाम पर असिस्टेंट इंजीनियर रौशन कुमार 10 प्रतिशत के रूप में 5 लाख 70 हजार रुपए मांग रहा था। जिला शिक्षा परियोजना के तहत मिलने वाला ठेका होली बाद छापेमारी होती तो मिलते 1 करोड़ रुपए
सूत्रों के मुताबिक, SVU की टीम अगर होली के बाद छापेमारी करती तो 1 करोड़ रुपए से अधिक कैश बरामद होते। इसकी वजह ये है कि अलग-अलग योजनाओं के तहत ठेका लेकर और अपने रुपए खर्च कर काम पूरा कर चुके कई ठेकेदारों के बिल अब भी पेंडिंग हैं। उन सभी से पेंडिंग बिल पास करने के नाम पर 10 प्रतिशत की कमिशन मांगी गई थी। SVU के इस कार्रवाई से जिला शिक्षा कार्यालय में काम करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों के अंदर हड़कंप मचा हुआ है। दो अधिकारियों तक पहुंचाने वाले थे पैसे
जेल जाने से पहले गिरफ्तार असिस्टेंट इंजीनियर रौशन कुमार ने उन अधिकारियों की पोल खोल दी है, जो पर्दे के पीछे से कमिशन के खेल में शामिल थे। SVU से जुड़े सूत्रों के अनुसार रौशन से लंबी पूछताछ हुई थी। पहले तो वह कुछ बता नहीं रहा था, लेकिन थोड़ी सख्ती बरतने के बाद टूट गया। उसने जिले के दो बड़े पद वाले अधिकारियों का नाम लिया है। उसके अनुसार रिश्वत के 5 लाख और फ्लैट के जब्त 42 लाख रुपए में से जिला शिक्षा पदाधिकारी और जिला परियोजना पदाधिकारी तक उसका हिस्सा पहुंचने वाला था। रौशन के इस बयान की भी पड़ताल होगी। बेतिया DEO के ठिकानों से मिले थे 3.55 करोड़ रुपए पिछले साल जनवरी में SVU ने बेतिया के जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) रजनीकांत के ठिकानों पर छापेमारी की थी। दो जिलों में मौजूद इनके ठिकानों से 3 करोड़ 55 लाख 22 हजार रुपए कैश बरामद किए गए थे। इसमें रजनीकांत के बेतिया वाले घर से 54 लाख 62 हजार तो मधुबनी में इनकी पत्नी सुषमा के किराए के घर से 3 करोड़ 60 हजार रुपए कैश बरामद हुए थे। इसके अलावा 3 करोड़ 12 लाख रुपए से अधिक की अचल संपत्ति का पता चला था। रजनीकांत ने मधुबनी में 7, दरभंगा में 6, पटना में 3 और मुजफ्फरपुर में जमीन का एक प्लॉट खरीद रखा था। आय से अधिक संपत्ति के केस में रजनीकांत जेल में बंद है। SVU ने अपनी जांच में इनके काली कमाई की पुष्टि की है। कोर्ट में दाखिल किए गए चार्जशीट में पति और पत्नी, दोनों को आरोपी बनाया है। दूसरी FIR कर खंगाली जाएगी चल-अचल संपत्ति
असिस्टेंट इंजीनियर रौशन के खिलाफ SVU ने प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट (2018) के तहत कार्रवाई की है। एक्ट की धारा 7 के तहत FIR (नंबर 9/2026) दर्ज हुई। इसी केस के तहत उसे रंगे हाथ रिश्वत लेते हुए पकड़ा गया और जेल भेजा गया। अब बहुत जल्द इसके खिलाफ आय से अधिक संपत्ति का दूसरा केस दर्ज किया जाएगा। इसके बाद जांच एजेंसी इसकी पूरी चल-अचल संपत्ति खंगालेगी। काली कमाई कर इसने कब, कहां और कितनी संपत्ति खरीद रखी है, इसका पता लगाएगी।


