Online Shopping: जेन-जेड पीढ़ी यानी 14 से 30 वर्ष के युवाओं के दम पर वर्ष 2025 में भारत का ऑनलाइन (ई-कॉमर्स, क्विक – कॉमर्स) बाजार सालाना आधार पर 21% बढ़कर 66 अरब डॉलर यानी 6.13 लाख करोड़ रुपए को पार कर गया है। बेन एंड कंपनी की रिपोर्ट ‘हाउ इंडिया शॉप्स ऑनलाइन 2026’ के मुताबिक, जीएसटी दरों में कटौती, आयकर में राहत, महंगाई में कमी और ब्याज दरों में गिरावट के दम पर 2025 में देश में निजी उपभोग में 10.5% की वृद्धी व खर्च 7% बढ़ा है, जिससे ई-रिटेल को और अधिक बढ़ावा मिल रहा है।
ई-कॉमर्स को बढ़ाने में जेन जेड का सबसे ज्यादा योगदान
ई-कॉमर्स को बढ़ाने में जेन जेड का सबसे ज्यादा योगदान है। ई-रिटेल खरीदारों में जेन जेड की 40-45% भागीदारी है। महानगरों में जेन जेड का ऑनलाइन खरीदारी पर खर्च अन्य समूहों की तुलना में प्रति खरीदार 2.5 गुना अधिक है। 11 अरब डॉलर का बाजार है भारत में क्विक कॉमर्स का। शहरों में कुल ग्रॉसरी खरीदारी में इनकी 6-7% हिस्सेदारी, 2030 तक 65-70 अरब डॉलर का होगा यह बाजार।
कितने यूजर्स करते हैं ऑनलाइन शॉपिंग
चीन में 92 फीसदी यूजर्स ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं। अमेरिका में यह आंकड़ा 74 फीसदी है। इंडोनेशिया में 57 फीसदी यूजर्स ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं। ब्राजील में 46 फीसदी यूजर्स ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं। वहीं, भारत में 30 फीसदी यूजर्स ऑनलाइन शॉपिंग करते हैं।
खूब हैं संभावनाएं
बेन ऐंड कंपनी ने कहा, जैसे-जैसे भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी 4,000 डॉलर के उस अहम मोड़ के करीब पहुंच रही है, विवेकाधीन खर्च में ऐतिहासिक रूप से तेजी आई है और ई-रिटेल को बढ़ाव मिल रहा है। मजबूत विस्तार के बावजूद भारत में ई-रिटेल की पैठ जीडीपी का 1.6% ही है, जबकि चीन में यह 13-14% है। यह दिखाता है कि देश में ई-कॉमर्स के विस्तार की पर्याप्त संभावना है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया है कि भारत का ई-रिटेल बाजार 2030 तक 170-180 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा।


