संयुक्त राष्ट्र के 80 साल के इतिहास में पहली बार शीर्ष पद पर महिला नेतृत्व की उम्मीद बनी है। मौजूदा प्रमुख एंटोनियो गुटेरेस का कार्यकाल दिसंबर में खत्म होगा। इस बार चार उम्मीदवार शार्ट लिस्ट हुए हैं। इनमें दो महिलाएं मिशेल बैचलेट (74) व रेबेका ग्रिनस्पैन (70) हैं। न्यूयॉर्क में 21-22 अप्रैल को दोनों की डिबेट होगी। मिशेल चिली की पहली महिला राष्ट्रपति रहीं जबकि रेबेका कोस्टा रिका की उप राष्ट्रपति रह चुकी हैं। मिशेल – संसाधनों की कमी से मरीज को तड़पते देख डॉक्टरी की पढ़ाई की 1973 में चिली में जनरल ऑगस्टो पिनोशे ने सैन्य तख्तापलट किया, तब मिशेल पैडिएट्रिक्स की पढ़ाई कर रही थीं। उस दौरान राष्ट्रपति सल्वाडोर से करीबी संबंध के चलते मिशेल के परिवार को बंधक बनाकर यातनाएं दी गईं। जेल में हाथ बांध लात-घूसे मारे गए। तब बंदियों को लोहे की ग्रिल से बिजली के झटके तक दिए जाते। यातनाओं से पिता की मौत के बाद भी मिशेल नहीं झुकीं। स्वास्थ्य मंत्री व रक्षा मंत्री के बाद 2006 में पहली महिला राष्ट्रपति बनीं। तब शॉपिंग के लिए मॉल जाती तो प्रशंसक घेर लेते। उन्होंने डॉक्टरी की पढ़ाई का फैसला क्लीनिक में संसाधनों की कमी से तड़पते मरीज को देखकर ली। रेबेका – एक कॉल से कोस्टा रिका के उपराष्ट्रपति पद तक पहुंची थीं 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होते ही वैश्विक खाद्य संकट गहराने लगा। यूक्रेन से गेहूं, मक्का, जौ का निर्यात ठप हुआ, दाम बढ़े व भुखमरी का खतरा पैदा हुआ। तब रेबेका यूएन व्यापार-विकास सम्मेलन की महासचिव थीं। उन्होंने मुख्य वार्ताकार बन रूस, तुर्किए व यूक्रेन में बातचीत कराई। नतीजा काला सागर से निर्यात का समझौता हुआ, जिससे 3.3 करोड़ टन अनाज बाजार पहुंचा। कीमतें 23% तक घटीं। उनकी राजनीति 80 के दशक में राष्ट्रपति ऑफिस से एक फोन कॉल से शुरू हुई, जिसने उन्हें आर्थिक सलाहकार बनाया फिर वित्त उप मंत्री होते हुए 1994 में मध्य अमेरिकी देश कोस्टा रिका की उपराष्ट्रपति बनीं।
यूएन प्रमुख की रेस में 4 नाम, 2 महिलाएं:जेल में पिटाई, बिजली के झटके सहे, नहीं झुकीं मिशेल; रेबेका ने अनाज संकट से बचाया


