औरंगाबाद जिले में 39 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे:जीवनरेखा बना सदर अस्पताल का ब्लड बैंक, प्रतिमाह पीड़ितों के लिए 50 से 60 यूनिट रक्त की आवश्यकता

औरंगाबाद जिले में 39 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे:जीवनरेखा बना सदर अस्पताल का ब्लड बैंक, प्रतिमाह पीड़ितों के लिए 50 से 60 यूनिट रक्त की आवश्यकता

औरंगाबाद सदर अस्पताल स्थित ब्लड बैंक थैलीसीमिया से पीड़ित बच्चों के लिए जीवनरेखा बनकर उभरा है। बिहार में थैलीसीमिया मरीजों को नियमित और निशुल्क रक्त उपलब्ध कराने में यह ब्लड बैंक अग्रणी भूमिका निभा रहा है। अप्रैल 2025 से 15 जनवरी 2026 तक ब्लड बैंक के माध्यम से कुल 395 थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों को ब्लड उपलब्ध कराया गया। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में 39 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे हैं। जिन्हें प्रतिमाह ब्लड की आवश्यकता पड़ती है। यह बैंक प्रतिमाह औसतन 50 से 60 यूनिट ब्लड निशुल्क उपलब्ध करा रहा है। प्रबंधन के अनुसार, थैलीसीमिया एक गंभीर आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें पीड़ित बच्चों को जीवनभर नियमित रूप से रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। समय पर उपलब्ध न होने की स्थिति में बच्चों की जान पर गंभीर संकट खड़ा हो जाता है। ऐसे में सदर अस्पताल का ब्लड बैंक न सिर्फ जिले, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के मरीजों के लिए भी बड़ी राहत साबित हो रहा है। लोगों से रक्तदान करने की अपील ब्लड बैंक के सीनियर लैब टेक्नीशियन आशुतोष मिश्रा ने बताया कि थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों के इलाज में रक्तदान की भूमिका सबसे अहम होती है। इन बच्चों का जीवन पूरी तरह रक्तदान पर निर्भर है। अगर नियमित रूप से लोग आगे आकर रक्तदान करे, तो किसी भी बच्चे की जान ब्लड की कमी से नहीं जाएगी। स्वस्थ व्यक्ति स्वेच्छा से रक्तदान करें, ताकि जरूरतमंद बच्चों को समय पर जीवनरक्षक रक्त मिल सके। ब्लड की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ब्लड बैंक द्वारा समय-समय पर रक्तदान शिविरों का आयोजन भी किया जाता है। इसके साथ ही स्वयंसेवी संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और युवा वर्ग भी बढ़-चढ़कर सहभागिता निभा रहे हैं। ब्लड बैंक और कर्मचारियों का जताया आभार ब्लड बैंक कर्मियों ने बताया कि रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित है और इससे दाता के स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। बल्कि यह समाज के प्रति एक महत्वपूर्ण मानवीय कर्तव्य है। थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों के परिजनों ने सदर अस्पताल के ब्लड बैंक और वहां कार्यरत कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि समय पर रक्त उपलब्ध होने से ही बच्चों का इलाज संभव हो पा रहा है और यह सेवा उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। ब्लड बैंक प्रबंधन ने यह भी बताया कि भविष्य में थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए ब्लड की मांग और अधिक हो सकती है। ऐसे में समाज के हर वर्ग को रक्तदान के प्रति जागरूक होना आवश्यक है। जिस महीने में रक्तदान नहीं होता है, उस महीने में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए रक्त उपलब्ध कराना मुश्किल होता है। सीनियर लैब टेक्नीशियन आशुतोष मिश्रा ने दोहराया कि एक यूनिट रक्त किसी मासूम की पूरी जिंदगी बचा सकता है। इसलिए सभी सक्षम लोगों से अपील की गई है कि वे नियमित रूप से रक्तदान करें और मानवता के इस पुनीत कार्य में सहभागी बनें। औरंगाबाद सदर अस्पताल स्थित ब्लड बैंक थैलीसीमिया से पीड़ित बच्चों के लिए जीवनरेखा बनकर उभरा है। बिहार में थैलीसीमिया मरीजों को नियमित और निशुल्क रक्त उपलब्ध कराने में यह ब्लड बैंक अग्रणी भूमिका निभा रहा है। अप्रैल 2025 से 15 जनवरी 2026 तक ब्लड बैंक के माध्यम से कुल 395 थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों को ब्लड उपलब्ध कराया गया। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिले में 39 थैलेसीमिया पीड़ित बच्चे हैं। जिन्हें प्रतिमाह ब्लड की आवश्यकता पड़ती है। यह बैंक प्रतिमाह औसतन 50 से 60 यूनिट ब्लड निशुल्क उपलब्ध करा रहा है। प्रबंधन के अनुसार, थैलीसीमिया एक गंभीर आनुवंशिक बीमारी है, जिसमें पीड़ित बच्चों को जीवनभर नियमित रूप से रक्त चढ़ाने की आवश्यकता होती है। समय पर उपलब्ध न होने की स्थिति में बच्चों की जान पर गंभीर संकट खड़ा हो जाता है। ऐसे में सदर अस्पताल का ब्लड बैंक न सिर्फ जिले, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के मरीजों के लिए भी बड़ी राहत साबित हो रहा है। लोगों से रक्तदान करने की अपील ब्लड बैंक के सीनियर लैब टेक्नीशियन आशुतोष मिश्रा ने बताया कि थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों के इलाज में रक्तदान की भूमिका सबसे अहम होती है। इन बच्चों का जीवन पूरी तरह रक्तदान पर निर्भर है। अगर नियमित रूप से लोग आगे आकर रक्तदान करे, तो किसी भी बच्चे की जान ब्लड की कमी से नहीं जाएगी। स्वस्थ व्यक्ति स्वेच्छा से रक्तदान करें, ताकि जरूरतमंद बच्चों को समय पर जीवनरक्षक रक्त मिल सके। ब्लड की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए ब्लड बैंक द्वारा समय-समय पर रक्तदान शिविरों का आयोजन भी किया जाता है। इसके साथ ही स्वयंसेवी संगठन, सामाजिक कार्यकर्ता और युवा वर्ग भी बढ़-चढ़कर सहभागिता निभा रहे हैं। ब्लड बैंक और कर्मचारियों का जताया आभार ब्लड बैंक कर्मियों ने बताया कि रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित है और इससे दाता के स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। बल्कि यह समाज के प्रति एक महत्वपूर्ण मानवीय कर्तव्य है। थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों के परिजनों ने सदर अस्पताल के ब्लड बैंक और वहां कार्यरत कर्मचारियों के प्रति आभार व्यक्त किया है। उनका कहना है कि समय पर रक्त उपलब्ध होने से ही बच्चों का इलाज संभव हो पा रहा है और यह सेवा उनके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। ब्लड बैंक प्रबंधन ने यह भी बताया कि भविष्य में थैलीसीमिया पीड़ित बच्चों की संख्या बढ़ने की संभावना को देखते हुए ब्लड की मांग और अधिक हो सकती है। ऐसे में समाज के हर वर्ग को रक्तदान के प्रति जागरूक होना आवश्यक है। जिस महीने में रक्तदान नहीं होता है, उस महीने में थैलेसीमिया पीड़ित बच्चों के लिए रक्त उपलब्ध कराना मुश्किल होता है। सीनियर लैब टेक्नीशियन आशुतोष मिश्रा ने दोहराया कि एक यूनिट रक्त किसी मासूम की पूरी जिंदगी बचा सकता है। इसलिए सभी सक्षम लोगों से अपील की गई है कि वे नियमित रूप से रक्तदान करें और मानवता के इस पुनीत कार्य में सहभागी बनें।  

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