प्रकृति में गणेश के 38 रूप:लखनऊ की कला स्रोत आर्ट गैलरी में ‘गजानन’ प्रदर्शनी

प्रकृति में गणेश के 38 रूप:लखनऊ की कला स्रोत आर्ट गैलरी में ‘गजानन’ प्रदर्शनी

लखनऊ में प्रतिभाशाली छायाकार पुनीत कात्यायन की विशेष फोटो प्रदर्शनी ‘गजानन’ का आयोजन कला स्रोत आर्ट गैलरी में किया गया। इस प्रदर्शनी में प्रकृति में स्वतः बने भगवान गणेश के 38 अद्भुत रूपों को छायाचित्रों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया, जिसने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। भगवान गणेश का प्रिय नाम गजानन है, जो बुद्धि, शुभारंभ और विघ्नहर्ता के रूप में पूजनीय हैं। इसी सकारात्मक ऊर्जा को केंद्र में रखकर पुनीत कात्यायन ने वृक्षों की छाल पर उभरे प्राकृतिक आकारों में गणेश के स्वरूपों को खोजा और उन्हें कैमरे में कैद किया। कलाकार और विद्यार्थी इस प्रदर्शनी को देखने पहुंचे प्रदर्शनी का उद्घाटन पद्मश्री से सम्मानित अनिल रस्तोगी सहित कई गणमान्य अतिथियों ने किया। महाशिवरात्रि के अवसर पर बड़ी संख्या में कला प्रेमी, कलाकार और विद्यार्थी इस प्रदर्शनी को देखने पहुंचे।पुनीत कात्यायन लखनऊ के स्वतंत्र छायाकार और विजुअल स्टोरीटेलर हैं, जिनके पास 15 वर्षों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय के कॉलेज ऑफ आर्ट्स से कला शिक्षा प्राप्त की है और लंबे समय तक विज्ञापन एजेंसियों में आर्ट डायरेक्टर के रूप में कार्य किया है। वर्तमान में, वे एमिटी विश्वविद्यालय, लखनऊ में असिस्टेंट प्रोफेसर के तौर पर युवाओं को प्रशिक्षण दे रहे हैं। छायाचित्र पर्यावरण संरक्षण का मजबूत संदेश उनकी ‘ट्री बार्क सीरीज़’ प्रकृति, अध्यात्म और मानवीय चेतना के गहरे संबंध को दर्शाती है। कटे-फटे वृक्षों में भी दिव्यता तलाशते उनके छायाचित्र पर्यावरण संरक्षण का मजबूत संदेश देते हैं। लाल, भूरे और स्लेटी रंगों में उभरे ये चित्र दर्शकों को आध्यात्मिक अनुभूति कराते हैं।नगर के वरिष्ठ छायाकार अनिल रिसाल ने इस प्रदर्शनी को नवाचार, कल्पनाशीलता और संवेदनशील दृष्टि का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि फोटोग्राफी आज तकनीक और कला का सशक्त मेल है, जो अभिव्यक्ति के साथ-साथ समाज और प्रकृति को समझने का जरिया भी है।

​ 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *