बिहार के गौरवशाली जिलों में से एक बक्सर आज अपना 36वां जिला स्थापना दिवस मना रहा है। ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण बक्सर की पूरे देश में एक विशिष्ट पहचान है। जिला स्थापना दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन और कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा संयुक्त रूप से सुबह 6 बजे से शाम तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। कई स्थानों पर केक काटकर भी इस दिन को ‘हैप्पी बर्थडे बक्सर’ के रूप में मनाया जाएगा। 17 मार्च 1991 को बिहार का स्वतंत्र जिला हुआ घोषित बक्सर को 17 मार्च 1991 को बिहार का स्वतंत्र जिला घोषित किया गया था, जो भोजपुर जिले से अलग होकर बना। इसके गठन के लिए 11 वर्षों तक लंबा जनसंघर्ष चला था। दीपक कुमार जिले के पहले जिलाधिकारी बने थे। गंगा नदी के किनारे स्थित बक्सर को ‘बिहार का प्रवेश द्वार’ भी कहा जाता है। इसका इतिहास सदियों पुराना है और यह कई महत्वपूर्ण घटनाओं का साक्षी रहा है। प्राचीन काल में बक्सर का नाम ‘व्याघ्रसर’ था इतिहासकारों के अनुसार, प्राचीन काल में बक्सर का नाम ‘व्याघ्रसर’ था, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में बाघ पाए जाते थे। यह वही पवित्र भूमि मानी जाती है, जहां महर्षि विश्वामित्र के आश्रम में भगवान राम और लक्ष्मण ने प्रारंभिक शिक्षा और शस्त्र प्रशिक्षण प्राप्त किया था। बक्सर कई ऐतिहासिक युद्धों की भूमि रहा है। 26 जून 1539 को चौसा के मैदान में मुगल सम्राट हुमायूं और अफगान शासक शेरशाह सूरी के बीच युद्ध हुआ था। इसके अतिरिक्त, 1764 का बक्सर का युद्ध भारतीय इतिहास की निर्णायक घटनाओं में से एक माना जाता है, जिसने भारत में ब्रिटिश शासन की नींव को मजबूत किया। धार्मिक आस्था का भी एक प्रमुख केंद्र है बक्सर बक्सर धार्मिक आस्था का भी एक प्रमुख केंद्र है। गंगा किनारे स्थित रामरेखा घाट पर हर साल लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए आते हैं, विशेषकर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है। जिले की प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों में ब्रह्मपुर का ब्रह्मेश्वर नाथ शिव मंदिर, नाथ बाबा मंदिर, नौ लखा मंदिर, रानी घाट और रानी कुआं शामिल हैं। पंचकोशी परिक्रमा और लिट्टी-चोखा की परंपरा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार त्रेता युग में भगवान राम ने ताड़का, सुबाहु और मारीच का वध करने के बाद नारी हत्या दोष से मुक्ति पाने के लिए पंचकोशी यात्रा की शुरुआत की थी। इस यात्रा के अंतिम पड़ाव पर बक्सर के चरित्रवन में उन्होंने लिट्टी-चोखा खाया था। उसी परंपरा को निभाते हुए आज भी पंचकोशी मेले के दौरान हजारों लोग लिट्टी-चोखा बनाकर भगवान को भोग लगाते हैं और प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। 36 साल बाद फिर खुलेगा लाइट एंड साउंड घर जिला स्थापना दिवस के अवसर पर एक और बड़ी पहल की जा रही है। करीब 36 वर्षों से बंद बक्सर का “लाइट एंड साउंड” घर इस महीने आम लोगों के लिए फिर से खोला जाएगा।
इसके माध्यम से एक बार फिर बक्सर और आसपास के लोग लाइट एंड साउंड शो के जरिए भगवान राम और बक्सर की धार्मिक-ऐतिहासिक गाथाओं को देख और सुन सकेंगे। इस परियोजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है। बिजली परियोजना से रोजगार की उम्मीद बक्सरवासियों के लिए रोजगार और विकास के क्षेत्र में भी बड़ी खबर है। केंद्र सरकार की 1320 मेगावाट क्षमता वाली थर्मल पावर परियोजना की एक यूनिट चालू कर दी गई है।
वहीं दूसरी यूनिट के निर्माण का कार्य भी अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इससे क्षेत्र में बिजली उत्पादन के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है। स्थापना दिवस पर कई कार्यक्रम जिला जनसंपर्क कार्यालय के अनुसार स्थापना दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं— 01:00 से 03:00 बजे तक सदर अस्पताल में रक्तदान शिविर, 04:00 से 06:00 बजे तक नगर भवन में सांस्कृतिक कार्यक्रम और केक कटिंग आज बक्सर जिला अपनी ऐतिहासिक धरोहर को संजोते हुए पर्यटन, शिक्षा, कृषि और उद्योग के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जिला स्थापना दिवस बक्सर के गौरवशाली इतिहास, सांस्कृतिक पहचान और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक बन गया है। बिहार के गौरवशाली जिलों में से एक बक्सर आज अपना 36वां जिला स्थापना दिवस मना रहा है। ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व के कारण बक्सर की पूरे देश में एक विशिष्ट पहचान है। जिला स्थापना दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन और कला एवं संस्कृति विभाग द्वारा संयुक्त रूप से सुबह 6 बजे से शाम तक विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। कई स्थानों पर केक काटकर भी इस दिन को ‘हैप्पी बर्थडे बक्सर’ के रूप में मनाया जाएगा। 17 मार्च 1991 को बिहार का स्वतंत्र जिला हुआ घोषित बक्सर को 17 मार्च 1991 को बिहार का स्वतंत्र जिला घोषित किया गया था, जो भोजपुर जिले से अलग होकर बना। इसके गठन के लिए 11 वर्षों तक लंबा जनसंघर्ष चला था। दीपक कुमार जिले के पहले जिलाधिकारी बने थे। गंगा नदी के किनारे स्थित बक्सर को ‘बिहार का प्रवेश द्वार’ भी कहा जाता है। इसका इतिहास सदियों पुराना है और यह कई महत्वपूर्ण घटनाओं का साक्षी रहा है। प्राचीन काल में बक्सर का नाम ‘व्याघ्रसर’ था इतिहासकारों के अनुसार, प्राचीन काल में बक्सर का नाम ‘व्याघ्रसर’ था, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में बाघ पाए जाते थे। यह वही पवित्र भूमि मानी जाती है, जहां महर्षि विश्वामित्र के आश्रम में भगवान राम और लक्ष्मण ने प्रारंभिक शिक्षा और शस्त्र प्रशिक्षण प्राप्त किया था। बक्सर कई ऐतिहासिक युद्धों की भूमि रहा है। 26 जून 1539 को चौसा के मैदान में मुगल सम्राट हुमायूं और अफगान शासक शेरशाह सूरी के बीच युद्ध हुआ था। इसके अतिरिक्त, 1764 का बक्सर का युद्ध भारतीय इतिहास की निर्णायक घटनाओं में से एक माना जाता है, जिसने भारत में ब्रिटिश शासन की नींव को मजबूत किया। धार्मिक आस्था का भी एक प्रमुख केंद्र है बक्सर बक्सर धार्मिक आस्था का भी एक प्रमुख केंद्र है। गंगा किनारे स्थित रामरेखा घाट पर हर साल लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए आते हैं, विशेषकर कार्तिक पूर्णिमा के अवसर पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है। जिले की प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक धरोहरों में ब्रह्मपुर का ब्रह्मेश्वर नाथ शिव मंदिर, नाथ बाबा मंदिर, नौ लखा मंदिर, रानी घाट और रानी कुआं शामिल हैं। पंचकोशी परिक्रमा और लिट्टी-चोखा की परंपरा पौराणिक मान्यताओं के अनुसार त्रेता युग में भगवान राम ने ताड़का, सुबाहु और मारीच का वध करने के बाद नारी हत्या दोष से मुक्ति पाने के लिए पंचकोशी यात्रा की शुरुआत की थी। इस यात्रा के अंतिम पड़ाव पर बक्सर के चरित्रवन में उन्होंने लिट्टी-चोखा खाया था। उसी परंपरा को निभाते हुए आज भी पंचकोशी मेले के दौरान हजारों लोग लिट्टी-चोखा बनाकर भगवान को भोग लगाते हैं और प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। 36 साल बाद फिर खुलेगा लाइट एंड साउंड घर जिला स्थापना दिवस के अवसर पर एक और बड़ी पहल की जा रही है। करीब 36 वर्षों से बंद बक्सर का “लाइट एंड साउंड” घर इस महीने आम लोगों के लिए फिर से खोला जाएगा।
इसके माध्यम से एक बार फिर बक्सर और आसपास के लोग लाइट एंड साउंड शो के जरिए भगवान राम और बक्सर की धार्मिक-ऐतिहासिक गाथाओं को देख और सुन सकेंगे। इस परियोजना को अंतिम रूप दिया जा रहा है। बिजली परियोजना से रोजगार की उम्मीद बक्सरवासियों के लिए रोजगार और विकास के क्षेत्र में भी बड़ी खबर है। केंद्र सरकार की 1320 मेगावाट क्षमता वाली थर्मल पावर परियोजना की एक यूनिट चालू कर दी गई है।
वहीं दूसरी यूनिट के निर्माण का कार्य भी अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इससे क्षेत्र में बिजली उत्पादन के साथ-साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ने की उम्मीद है। स्थापना दिवस पर कई कार्यक्रम जिला जनसंपर्क कार्यालय के अनुसार स्थापना दिवस पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं— 01:00 से 03:00 बजे तक सदर अस्पताल में रक्तदान शिविर, 04:00 से 06:00 बजे तक नगर भवन में सांस्कृतिक कार्यक्रम और केक कटिंग आज बक्सर जिला अपनी ऐतिहासिक धरोहर को संजोते हुए पर्यटन, शिक्षा, कृषि और उद्योग के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। जिला स्थापना दिवस बक्सर के गौरवशाली इतिहास, सांस्कृतिक पहचान और उज्ज्वल भविष्य का प्रतीक बन गया है।


