मधेपुरा पॉक्सो कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में दोषी अमीन सिंह (58) को 30 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। एडीजे-6 न्यायाधीश अमित कुमार पांडे की अदालत ने दोषी पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। विशेष लोक अभियोजक विजय कुमार विजेता ने बताया कि यह मामला करीब दो साल पुराना है। आरोपी अमीन सिंह ने गांव की एक नाबालिग बच्ची को खाने-पीने की वस्तु में बेहोशी की दवा मिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया था। इस घटना के बाद बच्ची गर्भवती हो गई थी। पीड़िता तीन-चार महीने की गर्भवती हो गई घटना का खुलासा तब हुआ जब पीड़िता तीन-चार महीने की गर्भवती हो गई। आरोपी अमीन सिंह उसे गर्भपात कराने के बहाने चुपचाप कहीं ले गया था। पीड़िता की मां ने अपनी बेटी की तलाश की, तो उन्हें पता चला कि वह अमीन सिंह के पास है। जब पीड़िता की मां आरोपी के घर पहुंचीं, तो अमीन सिंह ने उन्हें धमकी दी कि यदि इस बारे में किसी को बताया तो वह बच्ची को वापस नहीं करेगा। अपनी संतान की सुरक्षा के डर से मां कुछ दिनों तक खामोश रहीं। पंचायत के फैसले को मानने से इनकार कर दिया 22 सितंबर 2024 को बच्ची घर लौटी और उसने रोते हुए अपनी मां को पूरी आपबीती सुनाई। इसके बाद सामाजिक स्तर पर न्याय दिलाने का प्रयास किया गया और गांव में पंचायत बुलाई गई। हालांकि, अमीन सिंह ने पंचायत के फैसले को मानने से इनकार कर दिया, जिसके बाद पीड़िता के परिवार ने पुलिस की शरण ली। अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को सुनने के बाद 1 अप्रैल को ही आरोपी को दोषी करार दिया था। सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत 20 वर्ष की कैद और 50 हजार रुपये अर्थदंड, तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 89 के तहत 10 वर्ष की कैद और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। दोनों धाराओं में तीन-तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि यदि दोषी जुर्माना राशि जमा नहीं करता है, तो उसे दोनों धाराओं में तीन-तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके साथ ही, अदालत ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए पीड़िता को 4 लाख रुपये का मुआवजा DLSA को देने का भी निर्देश दिया है, ताकि वह अपने भविष्य को संवार सके। मधेपुरा पॉक्सो कोर्ट ने नाबालिग से दुष्कर्म के एक मामले में दोषी अमीन सिंह (58) को 30 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। एडीजे-6 न्यायाधीश अमित कुमार पांडे की अदालत ने दोषी पर एक लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। विशेष लोक अभियोजक विजय कुमार विजेता ने बताया कि यह मामला करीब दो साल पुराना है। आरोपी अमीन सिंह ने गांव की एक नाबालिग बच्ची को खाने-पीने की वस्तु में बेहोशी की दवा मिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया था। इस घटना के बाद बच्ची गर्भवती हो गई थी। पीड़िता तीन-चार महीने की गर्भवती हो गई घटना का खुलासा तब हुआ जब पीड़िता तीन-चार महीने की गर्भवती हो गई। आरोपी अमीन सिंह उसे गर्भपात कराने के बहाने चुपचाप कहीं ले गया था। पीड़िता की मां ने अपनी बेटी की तलाश की, तो उन्हें पता चला कि वह अमीन सिंह के पास है। जब पीड़िता की मां आरोपी के घर पहुंचीं, तो अमीन सिंह ने उन्हें धमकी दी कि यदि इस बारे में किसी को बताया तो वह बच्ची को वापस नहीं करेगा। अपनी संतान की सुरक्षा के डर से मां कुछ दिनों तक खामोश रहीं। पंचायत के फैसले को मानने से इनकार कर दिया 22 सितंबर 2024 को बच्ची घर लौटी और उसने रोते हुए अपनी मां को पूरी आपबीती सुनाई। इसके बाद सामाजिक स्तर पर न्याय दिलाने का प्रयास किया गया और गांव में पंचायत बुलाई गई। हालांकि, अमीन सिंह ने पंचायत के फैसले को मानने से इनकार कर दिया, जिसके बाद पीड़िता के परिवार ने पुलिस की शरण ली। अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों को सुनने के बाद 1 अप्रैल को ही आरोपी को दोषी करार दिया था। सजा के बिंदु पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट की धारा 6 के तहत 20 वर्ष की कैद और 50 हजार रुपये अर्थदंड, तथा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 89 के तहत 10 वर्ष की कैद और 50 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। दोनों धाराओं में तीन-तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि यदि दोषी जुर्माना राशि जमा नहीं करता है, तो उसे दोनों धाराओं में तीन-तीन महीने का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। इसके साथ ही, अदालत ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए पीड़िता को 4 लाख रुपये का मुआवजा DLSA को देने का भी निर्देश दिया है, ताकि वह अपने भविष्य को संवार सके।


