ग्वालियर. वित्त वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित नई कलेक्टर गाइडलाइन पर इस बार ज्यादा लोगों ने विरोध दर्ज किया है। 30 आपत्तियां प्राप्त हुई हैं, जो पिछले पांच वर्षों में सबसे अधिक संख्या है। इन आपत्तियों में जमीनों के रेट बढ़ाने का विरोध किया गया है, क्योंकि इससे संपत्ति की खरीद फरोख्त प्रभावित होगी और लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ेगा। पंजीयन विभाग ने इन आपत्तियों का अध्ययन कर कुछ सुधार किए हैं। अब अंतिम प्रस्ताव 18 मार्च को जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में पेश किया जाएगा। बैठक में चर्चा के बाद प्रस्ताव पास होकर केंद्रीय मूल्यांकन समिति को भेजा जाएगा, जिसके बाद नई गाइडलाइन 1 अप्रेल से लागू हो सकती है।
क्षेत्रवार प्रस्तावित बढ़ोतरी
-वृत्त-1 में औसत 23% की बढ़ोतरी।
-वृत्त-2 में औसत 24% की बढ़ोतरी।
-डबरा में 18% और भितरवार में 7.21% की बढ़ोतरी प्रस्तावित।
कुल 1652 लोकेशनों पर औसत बढ़ोतरी 18.75%।
पहली बैठक में 74% लोकेशनों पर बढ़ोतरी का प्रस्ताव
27 फरवरी को जिला मूल्यांकन समिति की पहली बैठक हुई थी, जिसमें जिले की कुल 2226 लोकेशनों में से 1652 पर बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा गया था-यानी करीब 74% लोकेशनों में वृद्धि प्रस्तावित थी। इनमें से 35 लोकेशनों पर 100% से अधिक की बढ़ोतरी का प्रस्ताव था। विभाग ने एनआइसी पोर्टल पर प्रस्ताव अपलोड कर लोगों से दावे-आपत्तियां मांगीं, जिसके बाद अब तक 30 आपत्तियां आई हैं।
आपत्तियों की मुख्य वजह
अनुचित बढ़ोतरी और आसपास की असमानता
-अड़ूपुरा जागीर का मामला — यहां प्रति हेक्टेयर 35 लाख रुपये की गाइडलाइन प्रस्तावित है, जबकि आसपास के क्षेत्रों में सिर्फ 18 लाख और सुसेरा पाड़ा में 16 लाख रुपये प्रति हेक्टेयर है। लोग इसे अनुचित मान रहे हैं।
-डोंगरपुर-पुतलीघर क्षेत्र — पिछले साल की बढ़ोतरी से पहले ही खर्च बढ़ गया था। अब फिर से रेट बढ़ाने पर आपत्ति जताई गई है, ताकि आम आदमी पर और बोझ न पड़े। कम से कम वह अपना एक आशियाना तो बना सके।
किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी प्रस्तावित
मुरार, बड़ागांव, खुरेरी, सैथरी, ओहदपुर, अलापुर, डोंगरपुर, महलगांव, बेहटा, सिकरोदा जैसे क्षेत्रों में नए आवासीय कॉलोनियों और प्रोजेक्ट्स के कारण बढ़ोतरी प्रस्तावित है। इसी तरह एबी रोड, मुरैना लिंक रोड, पिपरोली, सालूपुरा, नाका चंद्रवदनी मुख्य रोड और आनंद नगर में भी वृद्धि का प्रस्ताव है। यह बढ़ोतरी संपत्ति रजिस्ट्री, स्टांप ड्यूटी और अन्य शुल्कों को सीधे प्रभावित करेगी। लोग इसे महंगा सौदा मान रहे हैं, जिससे पिछले पांच सालों में सबसे ज्यादा आपत्तियां आई हैं। जिला प्रशासन अब बैठक में इन आपत्तियों पर अंतिम फैसला लेगा, ताकि गाइडलाइन संतुलित और उचित रहे।


