नीतीश के इस्तीफे से पहले 3 इमरजेंसी मीटिंग, पढ़िए इनसाइट:निशांत की पॉलिटिक्स, JDU को टूटने से बचाने की बनाई स्ट्रेटेजी, फिर लगाया दिल्ली फोन

नीतीश के इस्तीफे से पहले 3 इमरजेंसी मीटिंग, पढ़िए इनसाइट:निशांत की पॉलिटिक्स, JDU को टूटने से बचाने की बनाई स्ट्रेटेजी, फिर लगाया दिल्ली फोन

CM नीतीश कुमार अब बिहार विधानमंडल दल के सदस्य नहीं रहे। सोमवार को उन्होंने विधान परिषद सभापति को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उनके साथ BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी विधानसभा अध्यक्ष को अपना त्यागपत्र दे दिया। एक घंटे के भीतर दोनों का इस्तीफा स्वीकार भी हो गया। अब दोनों एक साथ 10 अप्रैल को राज्यसभा के सदस्य की शपथ ले सकते हैं। इस्तीफे से पहले रविवार को पूरे दिन गहमागहमी रहे। पहले सूचना आई कि नितिन नवीन रविवार को ही इस्तीफा देंगे, लेकिन आखिरी समय में उनका इस्तीफा टल गया। इसके बाद 24 घंटे के भीतर नीतीश कुमार ने तीन इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। इसमें नीतीश कुमार के साथ कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, मंत्री विजय चौधरी और टीम निशांत के विधायक शामिल हुए। इसमें निशांत की पॉलिटिक्स और JDU के भविष्य पर घंटों मंथन हुआ। इसके बाद दिल्ली फोन लगाया गया। भास्कर ने पूरे मामले की पड़ताल की। पढ़िए, नीतीश की मीटिंग के 24 घंटे पहले हुई हलचल और सीक्रेट मीटिंग की इनसाइड स्टोरी…
सबसे पहले रविवार की दो घटना जानिए अलग-अलग की जगह एक साथ इस्तीफा का फैसला हुआ दरअसल, रामनवमी के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष पटना आए थे। रविवार को उन्हें दो दिवसीय दौरे पर असम जाना था। ऐसे में वे नीतीश कुमार से एक दिन पहले इस्तीफा देकर असम जाना चाहते थे। आखिरी समय में निर्णय लिया गया कि 30 मार्च को जब नीतीश कुमार का इस्तीफा होगा, उसी दौरान नितिन नवीन इस्तीफा देंगे। ऐसे में उन्होंने अपना इस्तीफा बिहार के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को सौंपकर चले गए। अब 4 पॉइंट में जानिए, JDU की मीटिंग की पूरी कहानी 1. पार्टी की एकजुटता पर तो कोई खतरा नहीं आएगा मीटिंग में शामिल टीम निशांत के एक मेंबर ने भास्कर को बताया कि नीतीश कुमार इस्तीफा देने और बिहार छोड़ने से पहले इस बात को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित हैं कि क्या BJP पर भरोसा किया जा सकता है। नीतीश को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं उनकी पार्टी को दूसरी क्षेत्रीय पार्टी की तरह तोड़ तो नहीं दिया जाएगा। अगर नीतीश कुमार बिहार की सियासत से बाहर होते हैं तो पार्टी पर क्या असर पड़ेगा? क्या नफा-नुकसान हो सकता है? सबसे ज्यादा मंथन इसी बात पर हुई। इसके साथ ही निशांत कहां कमजोर पड़ सकते हैं और उनके एक्टिव पॉलिटिक्स में आने से पार्टी को किस बात का फायदा मिलेगा। इस पर भी बात हुई। पार्टी को अगर तोड़ने की कोशिश की जाती है तो इसे कैसे बचाया जा सकता है, इस पर भी चर्चा हुई। ललन सिंह और संजय झा के साथ विजय चौधरी ने उन्हें इस मामले पर भरोसा दिया कि निशांत के आने के बाद पार्टी एकजुट रहेगी। 2. बिहार से बाहर दिल्ली में नीतीश की क्या भूमिका होगी बैठक के दौरान इस बात पर भी चर्चा हुई कि बिहार छोड़ दिल्ली जाने पर नीतीश कुमार की क्या भूमिका रहने वाली है। हालांकि इस मामले पर कोई नेता कुछ भी बताने से बचते रहे। हालांकि एक्सपर्ट की मानें तो नीतीश कुमार के पास तीन ऑप्शन हैं। केंद्र की तरफ से उन्हें किसी पावरफुल मिनिस्ट्री का जिम्मा दे दिया जाए। राज्यसभा के उपसभापति का पद हरिवंश के जाने के बाद खाली हुआ है, उसे भी नीतीश कुमार को दिया जा सकता है। इसके अलावा NDA के संयोजक का पद भी वर्षों से JDU के हिस्से ही रहा है, ऐसे में नीतीश कुमार को नए सिरे से एक बार फिर से NDA का संयोजक बनाया जा सकता है। हालांकि, इस पर अंतिम मुहर नीतीश कुमार और BJP के टॉप लीडरशिप के साथ बैठक में ही लग सकती है। 3. बिहार सरकार में जदयू का क्या रोल होगा? बैठक में इस बात की भी चर्चा की गई है कि सरकार में जदयू की क्या भूमिका होने वाली है। ये तय माना जा रहा है कि नया CM BJP का ही होगा। ऐसे में JDU के हिस्से दो डिप्टी CM का पद मिल सकता है। सूत्रों की मानें तो JDU का एक धड़ा केवल निशांत कुमार को ही डिप्टी CM बनाना चाहता है। जबकि ज्यादातर लोग उनके साथ एक और नेता को डिप्टी CM के तौर पर चाहते हैं। ऐसे में इस बार भी वही फॉर्मूला लागू हो सकता है जो बिहार में 2017 से चलते आ रहा है। यानी एक CM दो डिप्टी CM । निशांत के साथ नीतीश के भरोसे मंद विजय चौधरी को नए सरकार में डिप्टी CM बनाया जा सकता है। हालांकि अभी इस पर अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। JDU के बड़े नेता सरकार के मौजूदा समीकरण के तहत दो डिप्टी CM के साथ स्पीकर का पद भी अपने पास रखना चाहते हैं। ऐसे में स्पीकर के लिए भी एक भरोसेमंद और अच्छी समझ वाले नेता की जरूरत होगी। विजय चौधरी पहले भी विधानसभा के स्पीकर रह चुके हैं, ऐसे में उन्हें स्पीकर बनाने की भी बात चल रही है। हालांकि अंतिम मुहर BJP के सााथ बैठक में लगेगी। 4. टीम निशांत को सरकार में हिस्सेदारी मिलने के संकेत जदयू के टॉप नेताओं के बीच चर्चा का एक विषय कैबिनेट में चेहरों को लेकर भी रही। अभी तक जदयू का कैबिनेट नीतीश कुमार और जातीय संतुलन के हिसाब से रहा है। मौजूदा सरकार में जदयू कोटे से नीतीश कुमार समेत कुल 9 मंत्री हैं। इनकी औसत आयु लगभग 60 साल है। ऐसे में अब जब सरकार में नीतीश की जगह निशांत की एंट्री होगी तो उनके सहयोग के लिए उनके उम्र के नेता को भी कैबिनेट में जगह मिल सकती है। टीम निशांत में फिलहाल 14 विधायक हैं। सूत्रों के मुताबिक, इनमें से कुछ चेहरों को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। जदयू कोटे से 15-16 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। ललन सिंह को घर तक ड्रॉप करने गए नीतीश बैठक के दौरान पार्टी की टॉप लीडरशिप के अलावा जदयू के कई युवा विधायक भी मौजूद थे। मीटिंग बंद कमरे में हुई। बैठक के बाद नीतीश कुमार सभी से मिले। इसके बाद उन्होंने अपनी गाड़ी में बिठाकर ललन सिंह को उनके घर तक ड्रॉप किया। इस दौरान एक ही गाड़ी में नीतीश कुमार के साथ ललन सिंह, संजय झा और विजय चौधरी मौजूद थे। लौटते वक्त ललन सिंह के अलावा तीनों नेता वापस सीएम हाउस पहुंचे। CM नीतीश कुमार अब बिहार विधानमंडल दल के सदस्य नहीं रहे। सोमवार को उन्होंने विधान परिषद सभापति को अपना इस्तीफा सौंप दिया। उनके साथ BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने भी विधानसभा अध्यक्ष को अपना त्यागपत्र दे दिया। एक घंटे के भीतर दोनों का इस्तीफा स्वीकार भी हो गया। अब दोनों एक साथ 10 अप्रैल को राज्यसभा के सदस्य की शपथ ले सकते हैं। इस्तीफे से पहले रविवार को पूरे दिन गहमागहमी रहे। पहले सूचना आई कि नितिन नवीन रविवार को ही इस्तीफा देंगे, लेकिन आखिरी समय में उनका इस्तीफा टल गया। इसके बाद 24 घंटे के भीतर नीतीश कुमार ने तीन इमरजेंसी मीटिंग बुलाई। इसमें नीतीश कुमार के साथ कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, मंत्री विजय चौधरी और टीम निशांत के विधायक शामिल हुए। इसमें निशांत की पॉलिटिक्स और JDU के भविष्य पर घंटों मंथन हुआ। इसके बाद दिल्ली फोन लगाया गया। भास्कर ने पूरे मामले की पड़ताल की। पढ़िए, नीतीश की मीटिंग के 24 घंटे पहले हुई हलचल और सीक्रेट मीटिंग की इनसाइड स्टोरी…
सबसे पहले रविवार की दो घटना जानिए अलग-अलग की जगह एक साथ इस्तीफा का फैसला हुआ दरअसल, रामनवमी के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए BJP के राष्ट्रीय अध्यक्ष पटना आए थे। रविवार को उन्हें दो दिवसीय दौरे पर असम जाना था। ऐसे में वे नीतीश कुमार से एक दिन पहले इस्तीफा देकर असम जाना चाहते थे। आखिरी समय में निर्णय लिया गया कि 30 मार्च को जब नीतीश कुमार का इस्तीफा होगा, उसी दौरान नितिन नवीन इस्तीफा देंगे। ऐसे में उन्होंने अपना इस्तीफा बिहार के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी को सौंपकर चले गए। अब 4 पॉइंट में जानिए, JDU की मीटिंग की पूरी कहानी 1. पार्टी की एकजुटता पर तो कोई खतरा नहीं आएगा मीटिंग में शामिल टीम निशांत के एक मेंबर ने भास्कर को बताया कि नीतीश कुमार इस्तीफा देने और बिहार छोड़ने से पहले इस बात को लेकर सबसे ज्यादा चिंतित हैं कि क्या BJP पर भरोसा किया जा सकता है। नीतीश को इस बात का डर सता रहा है कि कहीं उनकी पार्टी को दूसरी क्षेत्रीय पार्टी की तरह तोड़ तो नहीं दिया जाएगा। अगर नीतीश कुमार बिहार की सियासत से बाहर होते हैं तो पार्टी पर क्या असर पड़ेगा? क्या नफा-नुकसान हो सकता है? सबसे ज्यादा मंथन इसी बात पर हुई। इसके साथ ही निशांत कहां कमजोर पड़ सकते हैं और उनके एक्टिव पॉलिटिक्स में आने से पार्टी को किस बात का फायदा मिलेगा। इस पर भी बात हुई। पार्टी को अगर तोड़ने की कोशिश की जाती है तो इसे कैसे बचाया जा सकता है, इस पर भी चर्चा हुई। ललन सिंह और संजय झा के साथ विजय चौधरी ने उन्हें इस मामले पर भरोसा दिया कि निशांत के आने के बाद पार्टी एकजुट रहेगी। 2. बिहार से बाहर दिल्ली में नीतीश की क्या भूमिका होगी बैठक के दौरान इस बात पर भी चर्चा हुई कि बिहार छोड़ दिल्ली जाने पर नीतीश कुमार की क्या भूमिका रहने वाली है। हालांकि इस मामले पर कोई नेता कुछ भी बताने से बचते रहे। हालांकि एक्सपर्ट की मानें तो नीतीश कुमार के पास तीन ऑप्शन हैं। केंद्र की तरफ से उन्हें किसी पावरफुल मिनिस्ट्री का जिम्मा दे दिया जाए। राज्यसभा के उपसभापति का पद हरिवंश के जाने के बाद खाली हुआ है, उसे भी नीतीश कुमार को दिया जा सकता है। इसके अलावा NDA के संयोजक का पद भी वर्षों से JDU के हिस्से ही रहा है, ऐसे में नीतीश कुमार को नए सिरे से एक बार फिर से NDA का संयोजक बनाया जा सकता है। हालांकि, इस पर अंतिम मुहर नीतीश कुमार और BJP के टॉप लीडरशिप के साथ बैठक में ही लग सकती है। 3. बिहार सरकार में जदयू का क्या रोल होगा? बैठक में इस बात की भी चर्चा की गई है कि सरकार में जदयू की क्या भूमिका होने वाली है। ये तय माना जा रहा है कि नया CM BJP का ही होगा। ऐसे में JDU के हिस्से दो डिप्टी CM का पद मिल सकता है। सूत्रों की मानें तो JDU का एक धड़ा केवल निशांत कुमार को ही डिप्टी CM बनाना चाहता है। जबकि ज्यादातर लोग उनके साथ एक और नेता को डिप्टी CM के तौर पर चाहते हैं। ऐसे में इस बार भी वही फॉर्मूला लागू हो सकता है जो बिहार में 2017 से चलते आ रहा है। यानी एक CM दो डिप्टी CM । निशांत के साथ नीतीश के भरोसे मंद विजय चौधरी को नए सरकार में डिप्टी CM बनाया जा सकता है। हालांकि अभी इस पर अंतिम सहमति नहीं बन पाई है। JDU के बड़े नेता सरकार के मौजूदा समीकरण के तहत दो डिप्टी CM के साथ स्पीकर का पद भी अपने पास रखना चाहते हैं। ऐसे में स्पीकर के लिए भी एक भरोसेमंद और अच्छी समझ वाले नेता की जरूरत होगी। विजय चौधरी पहले भी विधानसभा के स्पीकर रह चुके हैं, ऐसे में उन्हें स्पीकर बनाने की भी बात चल रही है। हालांकि अंतिम मुहर BJP के सााथ बैठक में लगेगी। 4. टीम निशांत को सरकार में हिस्सेदारी मिलने के संकेत जदयू के टॉप नेताओं के बीच चर्चा का एक विषय कैबिनेट में चेहरों को लेकर भी रही। अभी तक जदयू का कैबिनेट नीतीश कुमार और जातीय संतुलन के हिसाब से रहा है। मौजूदा सरकार में जदयू कोटे से नीतीश कुमार समेत कुल 9 मंत्री हैं। इनकी औसत आयु लगभग 60 साल है। ऐसे में अब जब सरकार में नीतीश की जगह निशांत की एंट्री होगी तो उनके सहयोग के लिए उनके उम्र के नेता को भी कैबिनेट में जगह मिल सकती है। टीम निशांत में फिलहाल 14 विधायक हैं। सूत्रों के मुताबिक, इनमें से कुछ चेहरों को कैबिनेट में शामिल किया जा सकता है। जदयू कोटे से 15-16 विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाई जा सकती है। ललन सिंह को घर तक ड्रॉप करने गए नीतीश बैठक के दौरान पार्टी की टॉप लीडरशिप के अलावा जदयू के कई युवा विधायक भी मौजूद थे। मीटिंग बंद कमरे में हुई। बैठक के बाद नीतीश कुमार सभी से मिले। इसके बाद उन्होंने अपनी गाड़ी में बिठाकर ललन सिंह को उनके घर तक ड्रॉप किया। इस दौरान एक ही गाड़ी में नीतीश कुमार के साथ ललन सिंह, संजय झा और विजय चौधरी मौजूद थे। लौटते वक्त ललन सिंह के अलावा तीनों नेता वापस सीएम हाउस पहुंचे।  

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