वाराणसी के मोहनसराय में विकसित हो रही ट्रांसपोर्ट नगर परियोजना पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी। चीफ जस्टिस समेत तीन जजों की पीठ ने याचिका पर सुनवाई के बाद स्टे दे दिया। ट्रांसपोर्ट नगर योजना की जमीन का सीमांकन फिलहाल नहीं कराया जा सकेगा और इसको बढ़ाने की प्रक्रिया भी रुक जाएगी। कोर्ट के इस फैसले वाराणसी विकास प्राधिकरण को तगड़ा झटका लगा है, किसानों को बड़ी राहत मिली है। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने ट्रांसपोर्ट नगर योजना की जमीन के सीमांकन और पुलिसिया कार्रवाई पर कड़ी टिप्पणी की। इसके साथ अधिग्रहीत जमीन के सीमांकन पर रोक लगा दी गई। साथ ही अगली सुनवाई के दौरान पूरी रिपोर्ट तलब की गई। अधिवक्ता ने बताया कि परियोजना को लेकर विरोध, अफसरों की मनमानी, पुलिस की बर्बरता और जनसमर्थन से जुड़े संबंधित वीडियो, फोटोग्राफ हाईकोर्ट में प्रस्तुत किया गया। हालांकि अब अगली तारीख पर कोर्ट मामले में सुनवाई करेगी। किसानों के अधिवक्ता ने दलील दी कि 337 किसानों की जमीन 2012 में ली गई थी। इन्हीं किसानों ने मुआवजा भी लिया है। 857 किसान ऐसे हैं, जिन्होंने किसी तरह का मुआवजा ही नहीं लिया है। इसके बावजूद जमीन कब्जाई जा रही है। किसानों के अधिवक्ता ने कहा कि वर्ष 2003 में वीडीए ने बिना मुआवजा दिए ही जमीन की खतौनी में अपना नाम दर्ज करा लिया। भूमि अधिग्रहण के लिए किसानों की सहमति नही ली गई है। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल दोनों पक्षों को सुनने के बाद सीमांकन पर रोक लगा दी। विस्तार की तैयारियों की रफ्तार थमी वाराणसी में मोहनसराय के ट्रांसपोर्ट नगर परियोजना का विस्तार पर भी सुप्रीम कोर्ट का आदेश असर डालेगा। इसके लिए 30 एकड़ जमीन का अधिग्रहण नए सर्किल रेट से किया जाना था, इसके लिए डीएम सत्येंद्र कुमार ने विकास प्राधिकरण से प्रस्ताव मांगा था लेकिन अब इसे आगे नहीं बढ़ाया जा सकेगा। वीडीए की ओर से मोहनसराय से सटे चार गांवों करनाडाडी, मिल्कीचक, सरायमोहन और बैरवन की लगभग 48.0769 हेक्टेयर भूमि पर ट्रांसपोर्ट नगर विकसित किया जा रहा है। व्यापारियों, उद्यमियों औऱ ट्रांसपोर्टर को जमीन का आवंटन भी हो चुका है। यहां अब बस स्टेशन, पार्किंग, गेस्ट हाउस, वेयरहाउसिंग, टॉयलेट ब्लॉक, अस्पताल, ग्रुप हाउसिंग, ट्रक पार्किंग, फायर स्टेशन, एसटीपी, पुलिस पोस्ट को भी विकसित करने की तैयारी चल रही थी।


