बिना चर्चा 45 मिनट में 211 प्रस्ताव पास 135.85 करोड़ की सड़कों को हरी झंडी

बिना चर्चा 45 मिनट में 211 प्रस्ताव पास 135.85 करोड़ की सड़कों को हरी झंडी

शहर में 135.85 करोड़ रुपए की सड़कों के अपग्रेडेशन का रास्ता साफ करने के लिए वीरवार शाम को एफएंडसीसी की बैठक अचानक बुला ली गई। लोकल बाडीज मंत्री संजीव अरोड़ा के आदेशों के बाद हुई इस बैठक में 211 प्रस्ताव पेश किए गए और सभी को महज 45 मिनट में मंजूरी दे दी गई। खास बात यह रही कि किसी भी प्रस्ताव पर विस्तार से चर्चा नहीं हुई, बल्कि एजेंडा पढ़े जाने के साथ ही मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर, डिप्टी मेयर और निगम कमिश्नर की ओर से ओके-ओके कहकर प्रस्ताव पारित कर दिए गए। शाम 5:45 बजे शुरू हुई बैठक 6:30 बजे समाप्त हो गई। इनमें सबसे अहम पांच प्रस्ताव स्पेशल असिस्टेंस योजना से जुड़े थे, जिनके तहत सात विधानसभा हल्कों की सड़कों को अपग्रेड करने के लिए केंद्र सरकार से 135.85 करोड़ रुपए लेने हैं। इन प्रस्तावों को मंजूरी देना जरूरी था ताकि संबंधित कार्यों के वर्क ऑर्डर जारी किए जा सकें। अफसरों ने जताई टेंडर पूल की आशंका बैठक में लुक (हॉट मिक्स) सड़कों के टेंडरों को लेकर ये बात सामने आई कि अधिकांश टेंडर अनुमानित लागत से केवल 2 से 5 प्रतिशत कम पर आए हैं। अधिकारियों ने इसे असामान्य बताते हुए पूल की आशंका जताई। इस पर निर्णय लिया गया कि इतने कम अंतर वाले टेंडरों को कम से कम 7 प्रतिशत तक कम दर पर अलॉट करने के लिए लिखा जाए ताकि प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित हो सके और निगम को वित्तीय लाभ मिल सके। जनरल काम पार्षद कोटे में ट्रांसफर बैठक में एक अहम निर्णय यह भी लिया गया कि वार्डों के जो कार्य पहले जनरल कोटे में दर्शाए गए थे, उन्हें अब पार्षद कोटे में ट्रांसफर किया जाएगा। निगम इंजीनियरों के प्रस्ताव पर यह फैसला हुआ। इससे वार्ड स्तर पर विकास कार्यों की जिम्मेदारी सीधे पार्षदों के खाते में दर्ज होगी। 211 प्रस्तावों में इंटरलॉकिंग टाइल्स, पार्कों, सीवरेज लाइनें, आरएमसी सड़कें, लुक वाली सड़कें समेत कई प्रकार की डेवलपमेंट कराने के वर्क आर्डर थे, जिनको मंजूरी दी है। एडवांस एजेंडा जारी नहींं हुआ, पारदर्शिता पर भी उठ रहे सवाल बैठक का एडवांस एजेंडा जारी नहीं किया गया। बैठक वाले दिन ही एजेंडा सदस्यों को दिया गया। इतनी बड़ी संख्या में प्रस्तावों को बिना चर्चा पारित किए जाने से पारदर्शिता पर भी सवाल उठ रहे हैं। दरअसल, इन प्रोजेक्ट्स को 31 मार्च तक पूरा करना अनिवार्य है, वरना केंद्र से मिलने वाला फंड अटक सकता है। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद एफएंडसीसी की बैठक में देरी के कारण ठेकेदारों को काम अलॉट नहीं हो पा रहा था। दैनिक भास्कर ने भी पहले खुलासा किया था कि तय समय सीमा तक काम पूरे न होने पर फंड जारी नहीं होगा। खबर के बाद मंत्री अरोड़ा ने कड़ा संज्ञान लेते हुए आदेश जारी किए कि लंबित वर्क ऑर्डर तुरंत पास किए जाएं। मेयर इंद्रजीत कौर ने वीरवार को अचानक बैठक बुला ली।

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