लैंड फॉर जॉब केस में शुक्रवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती, हेमा यादव, तेजप्रताप यादव और तेजस्वी समेत 41 लोगों पर आरोप तय किया। अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी। CBI ने अपनी चार्जशीट में आरोप लगाया है कि लालू परिवार ने 200 करोड़ रुपए की जमीन बेहद कम कीमत में अपने नाम कराई। 63 करोड़ रुपए की जमीन वाली कंपनी राबड़ी ने 1 लाख रुपए में ले ली। मीसा ने अपने नाम जमीन कराई। हेमा भी डील में शामिल थी। किस तरह लालू परिवार ने अपने नाम जमीन ट्रांसफर कराई? इस मामले में लालू परिवार की महिलाओं (राबड़ी, मीसा और हेमा) का क्या रोल है? खास रिपोर्ट में जानें… CBI के अनुसार राबड़ी देवी की क्या है भूमिका? CBI ने अपनी चार्जशीट में लालू यादव को डायरेक्ट बेनीफिशियरी के रूप में आरोपी बनाया। कहा है कि राबड़ी ने लालू यादव के रेल मंत्री रहते कई महंगी जमीन सस्ते दामों या गिफ्ट डीड से अपने नाम कराई। पटना के किशुन देव राय ने 6 फरवरी 2008 को 3,375 वर्गफुट जमीन मात्र 3.75 लाख रुपए में राबड़ी के नाम रजिस्ट्री की। इसकी कीमत बाजार में करोड़ों रुपए में थी। बदले में उनके परिवार के राजकुमार सिंह, मिथिलेश कुमार व अजय कुमार को रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरी मिली। इसी तरह महुआबाग के रहने वाले संजय राय ने 3.75 लाख में जमीन दी। बदले में संजय के घर के 2 लोगों को नौकरी मिली। पटना के हजारी राय ने 9,527 स्क्वायर फीट जमीन दिल्ली की कंपनी एके इंफोसिस्टम प्राइवेट लिमिटेड को 10.83 लाख रुपए में बेची। हजारी के 2 भतीजों (दिलचंद कुमार और प्रेम चंद कुमार) को वेस्ट-सेंट्रल रेलवे जबलपुर और साउथ-ईस्टर्न रेलवे कोलकाता में नौकरी मिली। पटना के लाल बाबू राय ने मई 2015 में 13 लाख रुपए में 1,360 वर्ग फीट जमीन राबड़ी देवी के नाम की। उनके बेटे लाल चंद कुमार को 2006 में नॉर्थ-वेस्टर्न रेलवे जयपुर में नौकरी मिली। लाल बाबू राय के बेटे को नौकरी मिलने के वर्षों बाद जमीन राबड़ी को ट्रांसफर हुई। CBI का कहना है कि राबड़ी ने अपने निजी स्टाफ हृदयनंद चौधरी व ललन चौधरी के जरिए ये डील कराई। हृदयनंद चौधरी बिहार के गोपालगंज जिले के इटवा गांव के हैं। लालू के घर गौशाला में काम करते थे। ईस्ट सेंट्रल रेलवे में सब्स्टिट्यूट के रूप में ग्रुप-डी नौकरी की है। CBI ने 2022 में गिरफ्तार किया। ईडी चार्जशीट में उन्हें राबड़ी देवी का स्टाफ सदस्य बताया है। वह अपराध की आय छिपाने के लिए इस्तेमाल हुए। रेलवे कर्मचारी रहते लालू परिवार के हित साधने का काम करते थे। लालू परिवार को जमीन दिलाने में हृदयनंद की क्या थी भूमिका? CBI व ईडी जांच में हृदयनंद की भूमिका जमीन ट्रांसफर के मध्यस्थ व लाभार्थी के रूप में सामने आई। मार्च 2008 में बृज नंदन राय ने 3,375 वर्ग फुट जमीन हृदयनंद को 4.21 लाख रुपए में दी। यह जमीन बाद 13 फरवरी 2014 को हृदयनंद ने गिफ्ट डीड से लालू की बेटी हेमा यादव के नाम ट्रांसफर कर दी। कीमत 62 लाख रुपए आंकी गई। CBI के आरोप हैं कि हृदयनंद ने नौकरी पाने वालों से जमीन सस्ते में ली, फिर लालू परिवार को ट्रांसफर की ताकि ट्रेल छिप जाए। हेमा यादव पर आरोप है कि गोपालगंज के हृदयनंद से जमीन गिफ्ट ली। ईडी के अनुसार, राबड़ी के स्टाफ हृदयनंद व ललन चौधरी के नाम पर जमीन लेकर परिवार को ट्रांसफर की गई। चार्जशीट में 7 प्रमुख डील्स में हृदयनंद का नाम है। वह भोला यादव (लालू के पूर्व ओएसडी) के साथ मिलकर काम करते थे। भोला नौकरियां दिलाते व जमीन ट्रांसफर मैनेज करते। हृदयनंद का इस्तेमाल शेल ट्रांसफर की तरह हुआ। पहले उनके नाम जमीन ली गई फिर लालू परिवार को गिफ्ट किया गया, जिससे जमीन वैध दिखाई जा सके। पहले कंपनी के नाम करवाते थे जमीन रजिस्ट्री लैंड फॉर जॉब घोटाले में CBI और ईडी की जांच के अनुसार, कुछ जमीन सीधे राबड़ी देवी के नाम तो कुछ इन डायरेक्ट तरीके से उनके नाम ट्रांसफर हुईं। जमीन पहले प्राइवेट कंपनी एके इन्फोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को दी गई। बाद में राबड़ी देवी ने कंपनी ले लिया। यह तरीका अपनाया गया ताकि जमीन का ट्रांसफर अप्रत्यक्ष रूप से परिवार तक पहुंचे और इसे बेनामी संपत्ति के रूप में इस्तेमाल किया जा सके। CBI की चार्जशीट में इसे भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग का हिस्सा बताया गया है। कैसे होता था कंपनी से लालू परिवार के नाम जमीन ट्रांसफर? सीबीआई चार्जशीट के मुताबिक 2004-09 के बीच नौकरी का लालच देकर जमीनें ली गईं। कैंडिडेट या उनके परिवार ने जमीन सीधे एके इन्फोसिस्टम्स को कौड़ियों के दाम बेची। कंपनी को लालू के करीबी अमित कात्याल ने 2006-07 में आईटी बिजनेस के नाम पर रजिस्टर किया, लेकिन कोई व्यापार नहीं हुआ। इसके बजाय, यह जमीन जमा करने का माध्यम बनी। 2014 तक कंपनी के पास 63 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्तियां थीं, लेकिन लालू परिवार को मात्र 1 लाख रुपए देकर ट्रांसफर कर दी गई। ईडी चार्जशीट में कहा गया कि एके इन्फोसिस्टम्स की पूरी संपत्तियां व अधिकार राबड़ी देवी व बेटे तेजस्वी यादव को 2014 में अमित कात्याल से ट्रांसफर हो गए। राबड़ी इस कंपनी की डायरेक्टर बन गईं। CBI के अनुसार क्या है मीसा भारती की भूमिका? CBI ने मीसा भारती पर नौकरी के बदले जमीन रजिस्टर कराने के आरोप लगाए हैं। कहा है कि मीसा ने रेलवे की नौकरी के बदले जमीनें प्राप्त की। यह सब मीसा की जानकारी में हुआ। 2007 में किरण देवी ने अपनी जमीन मीसा को बेची और 2008 में उनके बेटे को सेंट्रल रेलवे मुंबई में नौकरी मिली। ईडी की जांच में 7 में से 6 जमीनें राबड़ी व मीसा से जुड़ी पाई गई हैं। हालांकि मीसा ने दावा किया कि जमीनें दूर के रिश्तेदारों से गिफ्ट हुई, लेकिन जांच में ये लोग अजनबी निकले। CBI ने आरोप लगाए कि गिफ्ट डीड व शेल कंपनियों का इस्तेमाल कर ट्रांसफर छिपाए गए। अदालत ने मीसा की भूमिका साजिश में जोड़ी, जहां वे नौकरी के नाम पर जमीन लेने का डायरेक्ट फायदा लिया था। CBI ने हेमा यादव पर क्या आरोप लगाए? CBI की चार्जशीट में लालू की छोटी बेटी हेमा यादव पर धोखाधड़ी व साजिश के आरोप हैं। CBI के अनुसार, नौकरी पाने के बाद 62 लाख मूल्य की जमीन गिफ्ट डीड से हेमा को दी गई। हृदयनंद चौधरी ने 2008 में बृज नंदन राय से 4.21 लाख रुपए में 3,375 वर्गफुट जमीन ली, इसकी कीमत 62 लाख रुपए थी। इसी तरह ईडी ने कहा कि राबड़ी व हेमा ने चार जमीनें जॉब पाने वालों से सस्ते में लीं। 7.5 लाख खरीद 3.5 करोड़ में बेचा। पैसे भागीरथी ट्यूब्स जैसी कंपनियों में लगाए गए। हेमा की भूमिका बाद के ट्रांसफर व बिक्री में थी। CBI ने नौकरी के बदले जमीन घोटाले में लालू परिवार पर क्या आरोप लगाए? आरोप 1 : 12 लोगों को रेलवे में नौकरी देकर 7 प्लॉट लिए CBI ने आरोप लगाया है कि 2004 से 2009 तक रेल मंत्री रहने के दौरान लालू यादव ने रेलवे के कई जोन में ग्रुप डी पदों पर 12 लोगों की भर्ती कराई। इसके बदले अपने परिवार वालों के नाम पर 7 जमीन ट्रांसफर कराए। आरोप 2: नौकरी के लिए कोई विज्ञापन नहीं निकाला CBI ने अपनी जांच में पाया कि लालू ने रेल मंत्री रहते हुए बिना विज्ञापन के कई लोगों को रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरी दी। इन मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर में नियुक्त किया गया था। आरोप 3: आवेदन के 3 दिन के अंदर मिली रेलवे में नौकरी ED ने जांच में पाया कि कैंडिडेट्स के कुछ आवेदनों में गैर-जरूरी जल्दबाजी दिखाई गई। एप्लिकेशन मिलने की तारीख के 3 दिनों के अंदर उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी गई। रेलवे के कई जोन में इन लोगों को बिना पूरे पते के नियुक्ति दी गई थी। अब पढ़िए CBI ने चार्जशीट में क्या कहा? लैंड फॉर जॉब स्कैम में CBI ने लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव, मीसा भारती और हेमा यादव समेत कई लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। कहा था, ‘रेलवे में नौकरी दिलवाने के लिए कई लोगों ने लालू परिवार को बहुत कम कीमत पर जमीनें गिफ्ट डीड के माध्यम से दीं। 14 जून 2005 को एक पिता ने अपने बेटे को रेलवे में नौकरी दिलाने के लिए सिर्फ 5700 रुपए में दो जमीनें राबड़ी देवी के संरक्षण में तेजस्वी और तेजप्रताप यादव के नाम कर दीं। उस वक्त दोनों बेटे नाबालिग थे।’ CBI ने आरोप लगाया, ‘जिन लोगों को रेलवे में नौकरी मिली, उनके परिजनों ने जमीनें लालू परिवार को सर्कल रेट पर दी। उस समय का मार्केट रेट सर्कल रेट से चार से छह गुना ज्यादा था। यानी जमीनों की वैल्यू को जानबूझकर कम दिखाया गया और कम कीमत पर लालू परिवार के नाम की गईं।’ लैंड फॉर जॉब केस में शुक्रवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने लालू यादव, राबड़ी देवी, मीसा भारती, हेमा यादव, तेजप्रताप यादव और तेजस्वी समेत 41 लोगों पर आरोप तय किया। अगली सुनवाई 29 जनवरी को होगी। CBI ने अपनी चार्जशीट में आरोप लगाया है कि लालू परिवार ने 200 करोड़ रुपए की जमीन बेहद कम कीमत में अपने नाम कराई। 63 करोड़ रुपए की जमीन वाली कंपनी राबड़ी ने 1 लाख रुपए में ले ली। मीसा ने अपने नाम जमीन कराई। हेमा भी डील में शामिल थी। किस तरह लालू परिवार ने अपने नाम जमीन ट्रांसफर कराई? इस मामले में लालू परिवार की महिलाओं (राबड़ी, मीसा और हेमा) का क्या रोल है? खास रिपोर्ट में जानें… CBI के अनुसार राबड़ी देवी की क्या है भूमिका? CBI ने अपनी चार्जशीट में लालू यादव को डायरेक्ट बेनीफिशियरी के रूप में आरोपी बनाया। कहा है कि राबड़ी ने लालू यादव के रेल मंत्री रहते कई महंगी जमीन सस्ते दामों या गिफ्ट डीड से अपने नाम कराई। पटना के किशुन देव राय ने 6 फरवरी 2008 को 3,375 वर्गफुट जमीन मात्र 3.75 लाख रुपए में राबड़ी के नाम रजिस्ट्री की। इसकी कीमत बाजार में करोड़ों रुपए में थी। बदले में उनके परिवार के राजकुमार सिंह, मिथिलेश कुमार व अजय कुमार को रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरी मिली। इसी तरह महुआबाग के रहने वाले संजय राय ने 3.75 लाख में जमीन दी। बदले में संजय के घर के 2 लोगों को नौकरी मिली। पटना के हजारी राय ने 9,527 स्क्वायर फीट जमीन दिल्ली की कंपनी एके इंफोसिस्टम प्राइवेट लिमिटेड को 10.83 लाख रुपए में बेची। हजारी के 2 भतीजों (दिलचंद कुमार और प्रेम चंद कुमार) को वेस्ट-सेंट्रल रेलवे जबलपुर और साउथ-ईस्टर्न रेलवे कोलकाता में नौकरी मिली। पटना के लाल बाबू राय ने मई 2015 में 13 लाख रुपए में 1,360 वर्ग फीट जमीन राबड़ी देवी के नाम की। उनके बेटे लाल चंद कुमार को 2006 में नॉर्थ-वेस्टर्न रेलवे जयपुर में नौकरी मिली। लाल बाबू राय के बेटे को नौकरी मिलने के वर्षों बाद जमीन राबड़ी को ट्रांसफर हुई। CBI का कहना है कि राबड़ी ने अपने निजी स्टाफ हृदयनंद चौधरी व ललन चौधरी के जरिए ये डील कराई। हृदयनंद चौधरी बिहार के गोपालगंज जिले के इटवा गांव के हैं। लालू के घर गौशाला में काम करते थे। ईस्ट सेंट्रल रेलवे में सब्स्टिट्यूट के रूप में ग्रुप-डी नौकरी की है। CBI ने 2022 में गिरफ्तार किया। ईडी चार्जशीट में उन्हें राबड़ी देवी का स्टाफ सदस्य बताया है। वह अपराध की आय छिपाने के लिए इस्तेमाल हुए। रेलवे कर्मचारी रहते लालू परिवार के हित साधने का काम करते थे। लालू परिवार को जमीन दिलाने में हृदयनंद की क्या थी भूमिका? CBI व ईडी जांच में हृदयनंद की भूमिका जमीन ट्रांसफर के मध्यस्थ व लाभार्थी के रूप में सामने आई। मार्च 2008 में बृज नंदन राय ने 3,375 वर्ग फुट जमीन हृदयनंद को 4.21 लाख रुपए में दी। यह जमीन बाद 13 फरवरी 2014 को हृदयनंद ने गिफ्ट डीड से लालू की बेटी हेमा यादव के नाम ट्रांसफर कर दी। कीमत 62 लाख रुपए आंकी गई। CBI के आरोप हैं कि हृदयनंद ने नौकरी पाने वालों से जमीन सस्ते में ली, फिर लालू परिवार को ट्रांसफर की ताकि ट्रेल छिप जाए। हेमा यादव पर आरोप है कि गोपालगंज के हृदयनंद से जमीन गिफ्ट ली। ईडी के अनुसार, राबड़ी के स्टाफ हृदयनंद व ललन चौधरी के नाम पर जमीन लेकर परिवार को ट्रांसफर की गई। चार्जशीट में 7 प्रमुख डील्स में हृदयनंद का नाम है। वह भोला यादव (लालू के पूर्व ओएसडी) के साथ मिलकर काम करते थे। भोला नौकरियां दिलाते व जमीन ट्रांसफर मैनेज करते। हृदयनंद का इस्तेमाल शेल ट्रांसफर की तरह हुआ। पहले उनके नाम जमीन ली गई फिर लालू परिवार को गिफ्ट किया गया, जिससे जमीन वैध दिखाई जा सके। पहले कंपनी के नाम करवाते थे जमीन रजिस्ट्री लैंड फॉर जॉब घोटाले में CBI और ईडी की जांच के अनुसार, कुछ जमीन सीधे राबड़ी देवी के नाम तो कुछ इन डायरेक्ट तरीके से उनके नाम ट्रांसफर हुईं। जमीन पहले प्राइवेट कंपनी एके इन्फोसिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को दी गई। बाद में राबड़ी देवी ने कंपनी ले लिया। यह तरीका अपनाया गया ताकि जमीन का ट्रांसफर अप्रत्यक्ष रूप से परिवार तक पहुंचे और इसे बेनामी संपत्ति के रूप में इस्तेमाल किया जा सके। CBI की चार्जशीट में इसे भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग का हिस्सा बताया गया है। कैसे होता था कंपनी से लालू परिवार के नाम जमीन ट्रांसफर? सीबीआई चार्जशीट के मुताबिक 2004-09 के बीच नौकरी का लालच देकर जमीनें ली गईं। कैंडिडेट या उनके परिवार ने जमीन सीधे एके इन्फोसिस्टम्स को कौड़ियों के दाम बेची। कंपनी को लालू के करीबी अमित कात्याल ने 2006-07 में आईटी बिजनेस के नाम पर रजिस्टर किया, लेकिन कोई व्यापार नहीं हुआ। इसके बजाय, यह जमीन जमा करने का माध्यम बनी। 2014 तक कंपनी के पास 63 करोड़ रुपए मूल्य की संपत्तियां थीं, लेकिन लालू परिवार को मात्र 1 लाख रुपए देकर ट्रांसफर कर दी गई। ईडी चार्जशीट में कहा गया कि एके इन्फोसिस्टम्स की पूरी संपत्तियां व अधिकार राबड़ी देवी व बेटे तेजस्वी यादव को 2014 में अमित कात्याल से ट्रांसफर हो गए। राबड़ी इस कंपनी की डायरेक्टर बन गईं। CBI के अनुसार क्या है मीसा भारती की भूमिका? CBI ने मीसा भारती पर नौकरी के बदले जमीन रजिस्टर कराने के आरोप लगाए हैं। कहा है कि मीसा ने रेलवे की नौकरी के बदले जमीनें प्राप्त की। यह सब मीसा की जानकारी में हुआ। 2007 में किरण देवी ने अपनी जमीन मीसा को बेची और 2008 में उनके बेटे को सेंट्रल रेलवे मुंबई में नौकरी मिली। ईडी की जांच में 7 में से 6 जमीनें राबड़ी व मीसा से जुड़ी पाई गई हैं। हालांकि मीसा ने दावा किया कि जमीनें दूर के रिश्तेदारों से गिफ्ट हुई, लेकिन जांच में ये लोग अजनबी निकले। CBI ने आरोप लगाए कि गिफ्ट डीड व शेल कंपनियों का इस्तेमाल कर ट्रांसफर छिपाए गए। अदालत ने मीसा की भूमिका साजिश में जोड़ी, जहां वे नौकरी के नाम पर जमीन लेने का डायरेक्ट फायदा लिया था। CBI ने हेमा यादव पर क्या आरोप लगाए? CBI की चार्जशीट में लालू की छोटी बेटी हेमा यादव पर धोखाधड़ी व साजिश के आरोप हैं। CBI के अनुसार, नौकरी पाने के बाद 62 लाख मूल्य की जमीन गिफ्ट डीड से हेमा को दी गई। हृदयनंद चौधरी ने 2008 में बृज नंदन राय से 4.21 लाख रुपए में 3,375 वर्गफुट जमीन ली, इसकी कीमत 62 लाख रुपए थी। इसी तरह ईडी ने कहा कि राबड़ी व हेमा ने चार जमीनें जॉब पाने वालों से सस्ते में लीं। 7.5 लाख खरीद 3.5 करोड़ में बेचा। पैसे भागीरथी ट्यूब्स जैसी कंपनियों में लगाए गए। हेमा की भूमिका बाद के ट्रांसफर व बिक्री में थी। CBI ने नौकरी के बदले जमीन घोटाले में लालू परिवार पर क्या आरोप लगाए? आरोप 1 : 12 लोगों को रेलवे में नौकरी देकर 7 प्लॉट लिए CBI ने आरोप लगाया है कि 2004 से 2009 तक रेल मंत्री रहने के दौरान लालू यादव ने रेलवे के कई जोन में ग्रुप डी पदों पर 12 लोगों की भर्ती कराई। इसके बदले अपने परिवार वालों के नाम पर 7 जमीन ट्रांसफर कराए। आरोप 2: नौकरी के लिए कोई विज्ञापन नहीं निकाला CBI ने अपनी जांच में पाया कि लालू ने रेल मंत्री रहते हुए बिना विज्ञापन के कई लोगों को रेलवे में ग्रुप-डी की नौकरी दी। इन मुंबई, जबलपुर, कोलकाता, जयपुर और हाजीपुर में नियुक्त किया गया था। आरोप 3: आवेदन के 3 दिन के अंदर मिली रेलवे में नौकरी ED ने जांच में पाया कि कैंडिडेट्स के कुछ आवेदनों में गैर-जरूरी जल्दबाजी दिखाई गई। एप्लिकेशन मिलने की तारीख के 3 दिनों के अंदर उनकी नियुक्ति को मंजूरी दे दी गई। रेलवे के कई जोन में इन लोगों को बिना पूरे पते के नियुक्ति दी गई थी। अब पढ़िए CBI ने चार्जशीट में क्या कहा? लैंड फॉर जॉब स्कैम में CBI ने लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, तेजप्रताप यादव, मीसा भारती और हेमा यादव समेत कई लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। कहा था, ‘रेलवे में नौकरी दिलवाने के लिए कई लोगों ने लालू परिवार को बहुत कम कीमत पर जमीनें गिफ्ट डीड के माध्यम से दीं। 14 जून 2005 को एक पिता ने अपने बेटे को रेलवे में नौकरी दिलाने के लिए सिर्फ 5700 रुपए में दो जमीनें राबड़ी देवी के संरक्षण में तेजस्वी और तेजप्रताप यादव के नाम कर दीं। उस वक्त दोनों बेटे नाबालिग थे।’ CBI ने आरोप लगाया, ‘जिन लोगों को रेलवे में नौकरी मिली, उनके परिजनों ने जमीनें लालू परिवार को सर्कल रेट पर दी। उस समय का मार्केट रेट सर्कल रेट से चार से छह गुना ज्यादा था। यानी जमीनों की वैल्यू को जानबूझकर कम दिखाया गया और कम कीमत पर लालू परिवार के नाम की गईं।’


