20 साल की दोस्ती, साथ घर आई तीनों की लाश:नेपाल में पशुपतिनाथ दर्शन के बाद हादसे के हुए शिकार, तीनों घर में मंझले थे

20 साल की दोस्ती, साथ घर आई तीनों की लाश:नेपाल में पशुपतिनाथ दर्शन के बाद हादसे के हुए शिकार, तीनों घर में मंझले थे

20 साल से अरविंद, समरजीत और रजनीश की दोस्ती थी। तीनों अक्सर काम के सिलसिले में और ज्यादातर घूमने के लिए नेपाल जाते थे। नए साल के दूसरे दिन तीनों एक जगह जुटे और प्लान बना कि नए साल पर बाबा पशुपतिनाथ के दर्शन करके आते हैं। फिर तीनों 2 जनवरी को ही नेपाल निकल गए। 3 जनवरी को बाबा पशुपतिनाथ मंदिर में दर्शन के बाद आगे घूमने के लिए वीरगंज निकल गए। पशुपतिनाथ मंदिर के फोटो और वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया। इसके अगले दिन यानी 4 जनवरी की शाम करीब 4 बजे तीनों ने अपने-अपने परिजन को कॉल कर बताया कि दर्शन हो चुके हैं, अब हम लोग घर लौट रहे हैं। लेकिन अगले 24 घंटे तक तीनों की कोई खबर परिजन को नहीं मिली। 6 जनवरी को जब खोजबीन शुरू की गई तो नेपाली मीडिया के जरिए जानकारी हुई कि तीनों की सड़क हादसे में मौत हो गई है। मृतकों की पहचान बलिया थाना क्षेत्र के शादीपुर करारी गांव के रहने वाले रमेश सिंह के बेटे 40 साल के बिट्टू कुमार उर्फ समरजीत कुमार, बलिया नगर परिषद क्षेत्र के बड़ी बलिया के रहने वाले मोहन दास के बेटे 50 साल के अरविंद कुमार और पटना के बाढ़ के रहने वाले 45 साल के रजनीश कुमार उर्फ गोल्डन के रूप में हुई। मृतकों की दोस्ती कैसे हुई थी, तीनों क्या करते थे, तीनों के परिवार में कौन-कौन है, तीनों की लाश घर आने के बाद क्या माहौल था? पढ़िए, पूरी रिपोर्ट। तीनों की लाश एक ही गाड़ी से लाया गया बेगूसराय 6 जनवरी को बिट्टू, अरविंद और रजनीश के परिजन तत्काल नेपाल के लिए निकल गए। नेपाल पहुंचने के बाद तीनों के परिजन ने नेपाल पुलिस से संपर्क किया। इसके बाद नेपाल पुलिस की ओर से तीनों के शव को पोस्टमॉर्टम कराकर परिजन को सौंप दिया गया। तीनों लाश परिजनों को सौंप दिया गया तो लाशों को बलिया लाने के लिए एम्बुलेंस खोजा गया। लेकिन कोई एम्बुलेंस तीनों लाश एक साथ लाने के लिए तैयार नहीं हुआ। इसके बाद अलग-अलग एम्बुलेंस के बजाय 20 हजार रुपए देकर एक पिकअप को रिजर्व किया गया और फिर तीनों की लाश को रक्सौल के रास्ते बेगूसराय के बलिया लाया गया। तीनों दोस्तों की लाश को बलिया लाया गया। फिर कुछ देर घर पर रखने और अंतिम दर्शन के बाद अरविंद और समरजीत की लाश को अंतिम संस्कार के लिए गंगा नदी किनारे ले जाया गया, जबकि रजनीश की लाश को अंतिम संस्कार के लिए पटना बाढ़ भेज दिया गया। अब तीनों मृतकों की दोस्तों की कहानी जान लीजिए अरविंद, समरजीत उर्फ बिट्टू और रजनीश की दोस्ती 20 साल पुरानी थी अरविंद, समरजीत उर्फ बिट्टू और रजनीश की दोस्ती करीब 20 साल पुरानी थी। पटना जिले के बाढ़ का रहने वाला रजनीश कुमार उर्फ गोल्डन करीब 20 साल से बलिया में अपने परिवार के साथ रहकर लोहे का कारोबार करता था। रजनीश की दुकान पहले धर्मशाला पोखर के पास थी। कुछ साल से एनएच-31 स्थित हुसैनीचक ढ़ाला के पास उसकी दुकान चल रही थी। कहा जाता था कि लोहा का जो सामान कहीं नहीं मिलेगा, वह रजनीश के यहां मिल जाएगा। वहीं, अरविंद कुमार बलिया के व्यापार मंडल मार्केट में कृष्णा भाई जी के नाम से जनरल स्टोर चलाता था। इसके अलावा, उसकी बेल्ट और चश्मे की दुकान भी थी। वो चश्मा और बेल्ट की खेप अधिकतर नेपाल से ही लाता था। इसलिए अक्सर नेपाल जाने के दौरान अपने दोनों दोस्तों को भी साथ ले लेता था। वहीं, समरजीत उर्फ बिट्टू के पिता वकील हैं और वह खेती-बाड़ी करता था। 4 जनवरी को तीनों काठमांडू से वीरगंज के लिए निकले थे तीन जनवरी की रात काठमांडू में रहकर तीनों 4 जनवरी को घूमने के लिए काठमांडू से टाटा सुमो एन 1 जे 1778 में सवार होकर वीरगंज के लिये निकल गए थे। 4 जनवरी को शाम 4 बजे तक परिजन से तीनों की बातचीत होती रही, जिसमें तीनों ने अपने-अपने परिजन को बताया कि सुबह तक हम लोग प्रसाद लेकर घर लौट जाएंगे। परिजन के मुताबिक, अचानक देर शाम से तीनों का मोबाइल स्विच ऑफ बताने लगा। जानकारी के मुताबिक, तीनों ने जब शाम को 4 बजे परिजन से बात की और सूमो आगे बढ़ी। कुछ दूर जाने के बाद नेपाल के बागमती इलाके के मकवानपुर जिले में सूमो हादसे की शिकार हो गई। सूमो अनियंत्रित होकर जुडी़खेत गांव के पास कुलेखानी-काठमांडू सड़क मार्ग पर करीब 100 मीटर गहरी खाई में गिर गई। सूमो में अरविंद, समरजीत और रजनीश के अलावा अन्य लोग भी सवार थे। हादसे के बाद सभी घायलों को स्थानीय लोगों की मदद से नेपाल के हेटौंड़ा सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया। जहां रजनीश कुमार उर्फ गोल्डन, अरविंद कुमार एवं बिट्टू उर्फ समरजीत को मृत घोषित कर दिया गया। इधर, संपर्क टूट जाने से परिजन चिंतित हो गए। 5 जनवरी को सभी जब बलिया नहीं पहुंचे तो परिजनों नेपाल के सामाचार पत्र एवं सोशल मीडिया पर खोज शुरू की, जिससे इस दुर्घटना का पता परिजनों को चल सका और तीनों के परिजन नेपाल के लिए रवाना हो गए। तीनों मृतक अपने-अपने भाई-बहनों में मंझले थे बड़ी बलिया के रहने वाले अरविंद कुमार गुप्ता तीन भाइयों में मझला था। अरविंद कुमार गुप्ता की शादी करीब 30 साल पहले हुई थी। तीन बेटे राहुल, सोनू और मोनू, जबकि दो बेटियां राधा एवं नेहा है। वहीं, शादीपुर करारी के रहने वाले बिट्टू उर्फ समरजीत कुमार सिंह भी तीन भाइयों में मझला ही थे। समरजीत कुमार सिंह उर्फ बिट्टू की शादी करीब 16 साल पहले हुई थी। समरजीत के दो बेटे विक्रम एवं किशन, जबकि एक बेटी नेहा है। बाढ़ में रजनीश का अंतिम संस्कार किया गया, बेटियों ने अर्थी को दिया कंधा पेशे से लोहा कारोबारी रजनीश अपने तीन भाइयों में मंझले थे। उनकी लाश को 7 जनवरी को ही बाढ़ के उमानाथ मोहल्ले में उनके घर पहुंचाया गया। रजनीश कुमार उर्फ गोल्डन की शादी करीब 17 साल पहले हुई थी। दो पुत्री छोटी कुमारी एवं सुमन कुमारी जबकि एक बेटा कृष्ण कुमार है। रजनीश की दोनों बेटियों छोटी कुमारी और सुमन कुमारी ने घर से निकल रही पिता की अर्थी को कंधा दिया। बेटियों को इसके लिए मना किया जा रहा था, लेकिन उन्होंने जिद पकड़ ली कि ये हमारा हक है, ये पिता के साथ हमारी आखिरी यात्रा है। हम लोग चाहते हैं कि पिता हमारे साथ आखिरी बार घर के बाहर निकलें, क्योंकि हम लोग जानते हैं कि इसके बाद पापा कभी घर नहीं लौटेंगे। बेटियों के इतना कहने के बाद गांव के लोगों और रजनीश के परिजन बिल्कुल चुप हो गए। 20 साल से अरविंद, समरजीत और रजनीश की दोस्ती थी। तीनों अक्सर काम के सिलसिले में और ज्यादातर घूमने के लिए नेपाल जाते थे। नए साल के दूसरे दिन तीनों एक जगह जुटे और प्लान बना कि नए साल पर बाबा पशुपतिनाथ के दर्शन करके आते हैं। फिर तीनों 2 जनवरी को ही नेपाल निकल गए। 3 जनवरी को बाबा पशुपतिनाथ मंदिर में दर्शन के बाद आगे घूमने के लिए वीरगंज निकल गए। पशुपतिनाथ मंदिर के फोटो और वीडियो भी सोशल मीडिया पर शेयर किया। इसके अगले दिन यानी 4 जनवरी की शाम करीब 4 बजे तीनों ने अपने-अपने परिजन को कॉल कर बताया कि दर्शन हो चुके हैं, अब हम लोग घर लौट रहे हैं। लेकिन अगले 24 घंटे तक तीनों की कोई खबर परिजन को नहीं मिली। 6 जनवरी को जब खोजबीन शुरू की गई तो नेपाली मीडिया के जरिए जानकारी हुई कि तीनों की सड़क हादसे में मौत हो गई है। मृतकों की पहचान बलिया थाना क्षेत्र के शादीपुर करारी गांव के रहने वाले रमेश सिंह के बेटे 40 साल के बिट्टू कुमार उर्फ समरजीत कुमार, बलिया नगर परिषद क्षेत्र के बड़ी बलिया के रहने वाले मोहन दास के बेटे 50 साल के अरविंद कुमार और पटना के बाढ़ के रहने वाले 45 साल के रजनीश कुमार उर्फ गोल्डन के रूप में हुई। मृतकों की दोस्ती कैसे हुई थी, तीनों क्या करते थे, तीनों के परिवार में कौन-कौन है, तीनों की लाश घर आने के बाद क्या माहौल था? पढ़िए, पूरी रिपोर्ट। तीनों की लाश एक ही गाड़ी से लाया गया बेगूसराय 6 जनवरी को बिट्टू, अरविंद और रजनीश के परिजन तत्काल नेपाल के लिए निकल गए। नेपाल पहुंचने के बाद तीनों के परिजन ने नेपाल पुलिस से संपर्क किया। इसके बाद नेपाल पुलिस की ओर से तीनों के शव को पोस्टमॉर्टम कराकर परिजन को सौंप दिया गया। तीनों लाश परिजनों को सौंप दिया गया तो लाशों को बलिया लाने के लिए एम्बुलेंस खोजा गया। लेकिन कोई एम्बुलेंस तीनों लाश एक साथ लाने के लिए तैयार नहीं हुआ। इसके बाद अलग-अलग एम्बुलेंस के बजाय 20 हजार रुपए देकर एक पिकअप को रिजर्व किया गया और फिर तीनों की लाश को रक्सौल के रास्ते बेगूसराय के बलिया लाया गया। तीनों दोस्तों की लाश को बलिया लाया गया। फिर कुछ देर घर पर रखने और अंतिम दर्शन के बाद अरविंद और समरजीत की लाश को अंतिम संस्कार के लिए गंगा नदी किनारे ले जाया गया, जबकि रजनीश की लाश को अंतिम संस्कार के लिए पटना बाढ़ भेज दिया गया। अब तीनों मृतकों की दोस्तों की कहानी जान लीजिए अरविंद, समरजीत उर्फ बिट्टू और रजनीश की दोस्ती 20 साल पुरानी थी अरविंद, समरजीत उर्फ बिट्टू और रजनीश की दोस्ती करीब 20 साल पुरानी थी। पटना जिले के बाढ़ का रहने वाला रजनीश कुमार उर्फ गोल्डन करीब 20 साल से बलिया में अपने परिवार के साथ रहकर लोहे का कारोबार करता था। रजनीश की दुकान पहले धर्मशाला पोखर के पास थी। कुछ साल से एनएच-31 स्थित हुसैनीचक ढ़ाला के पास उसकी दुकान चल रही थी। कहा जाता था कि लोहा का जो सामान कहीं नहीं मिलेगा, वह रजनीश के यहां मिल जाएगा। वहीं, अरविंद कुमार बलिया के व्यापार मंडल मार्केट में कृष्णा भाई जी के नाम से जनरल स्टोर चलाता था। इसके अलावा, उसकी बेल्ट और चश्मे की दुकान भी थी। वो चश्मा और बेल्ट की खेप अधिकतर नेपाल से ही लाता था। इसलिए अक्सर नेपाल जाने के दौरान अपने दोनों दोस्तों को भी साथ ले लेता था। वहीं, समरजीत उर्फ बिट्टू के पिता वकील हैं और वह खेती-बाड़ी करता था। 4 जनवरी को तीनों काठमांडू से वीरगंज के लिए निकले थे तीन जनवरी की रात काठमांडू में रहकर तीनों 4 जनवरी को घूमने के लिए काठमांडू से टाटा सुमो एन 1 जे 1778 में सवार होकर वीरगंज के लिये निकल गए थे। 4 जनवरी को शाम 4 बजे तक परिजन से तीनों की बातचीत होती रही, जिसमें तीनों ने अपने-अपने परिजन को बताया कि सुबह तक हम लोग प्रसाद लेकर घर लौट जाएंगे। परिजन के मुताबिक, अचानक देर शाम से तीनों का मोबाइल स्विच ऑफ बताने लगा। जानकारी के मुताबिक, तीनों ने जब शाम को 4 बजे परिजन से बात की और सूमो आगे बढ़ी। कुछ दूर जाने के बाद नेपाल के बागमती इलाके के मकवानपुर जिले में सूमो हादसे की शिकार हो गई। सूमो अनियंत्रित होकर जुडी़खेत गांव के पास कुलेखानी-काठमांडू सड़क मार्ग पर करीब 100 मीटर गहरी खाई में गिर गई। सूमो में अरविंद, समरजीत और रजनीश के अलावा अन्य लोग भी सवार थे। हादसे के बाद सभी घायलों को स्थानीय लोगों की मदद से नेपाल के हेटौंड़ा सरकारी अस्पताल पहुंचाया गया। जहां रजनीश कुमार उर्फ गोल्डन, अरविंद कुमार एवं बिट्टू उर्फ समरजीत को मृत घोषित कर दिया गया। इधर, संपर्क टूट जाने से परिजन चिंतित हो गए। 5 जनवरी को सभी जब बलिया नहीं पहुंचे तो परिजनों नेपाल के सामाचार पत्र एवं सोशल मीडिया पर खोज शुरू की, जिससे इस दुर्घटना का पता परिजनों को चल सका और तीनों के परिजन नेपाल के लिए रवाना हो गए। तीनों मृतक अपने-अपने भाई-बहनों में मंझले थे बड़ी बलिया के रहने वाले अरविंद कुमार गुप्ता तीन भाइयों में मझला था। अरविंद कुमार गुप्ता की शादी करीब 30 साल पहले हुई थी। तीन बेटे राहुल, सोनू और मोनू, जबकि दो बेटियां राधा एवं नेहा है। वहीं, शादीपुर करारी के रहने वाले बिट्टू उर्फ समरजीत कुमार सिंह भी तीन भाइयों में मझला ही थे। समरजीत कुमार सिंह उर्फ बिट्टू की शादी करीब 16 साल पहले हुई थी। समरजीत के दो बेटे विक्रम एवं किशन, जबकि एक बेटी नेहा है। बाढ़ में रजनीश का अंतिम संस्कार किया गया, बेटियों ने अर्थी को दिया कंधा पेशे से लोहा कारोबारी रजनीश अपने तीन भाइयों में मंझले थे। उनकी लाश को 7 जनवरी को ही बाढ़ के उमानाथ मोहल्ले में उनके घर पहुंचाया गया। रजनीश कुमार उर्फ गोल्डन की शादी करीब 17 साल पहले हुई थी। दो पुत्री छोटी कुमारी एवं सुमन कुमारी जबकि एक बेटा कृष्ण कुमार है। रजनीश की दोनों बेटियों छोटी कुमारी और सुमन कुमारी ने घर से निकल रही पिता की अर्थी को कंधा दिया। बेटियों को इसके लिए मना किया जा रहा था, लेकिन उन्होंने जिद पकड़ ली कि ये हमारा हक है, ये पिता के साथ हमारी आखिरी यात्रा है। हम लोग चाहते हैं कि पिता हमारे साथ आखिरी बार घर के बाहर निकलें, क्योंकि हम लोग जानते हैं कि इसके बाद पापा कभी घर नहीं लौटेंगे। बेटियों के इतना कहने के बाद गांव के लोगों और रजनीश के परिजन बिल्कुल चुप हो गए।  

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