Ahmedabad. गुजरात प्रशासनिक सुधार आयोग (जीएआरसी) की पांचवीं रिपोर्ट की अनुशंसाओं को ध्यान में रखकर राज्य सरकार ने विभिन्न विभागों की 20 सेवाओं को ऑनलाइन कर दिया है। यह ऐसी सेवाएं हैं, जिनके लिए राज्य में सबसे ज्यादा आवेदन प्राप्त होते हैं।
जीएआरसी की रिपोर्ट के अनुसार डिजिटल गुजरात प्लेटफॉर्म के अंतर्गत उपलब्ध सेवाओं में से लगभग 4 फीसदी सेवाओं के लिए संपूर्ण एंड-टू-एंड डिजिटल डिलीवरी को पहले से ही सक्रिय कर दिया गया। वर्तमान में जन सेवा केंद्रों और ई-ग्राम केंद्रों के मार्फत बड़ी संख्या में सेवाएं सफलतापूर्वक प्रदान की जा रही हैं।डिजिटल गुजरात प्लेटफॉर्म के तहत प्रतिवर्ष लगभग 1.20 करोड़ आवेदन प्राप्त होते हैं, जिनमें से लगभग 87 लाख आवेदन इन 20 उच्च-ट्रांजेक्शन सेवाओं के लिए मिलते हैं, जो नागरिक जीवन में इन सेवाओं के महत्व को दर्शाता है।इसी दिशा में आगे बढ़ते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के जरिए ‘सुगम डिजिटल गुजरात’ पहल की है। इसका उद्देश्य फेसलेस, कैशलेस और पेपरलेस प्रशासन को बढ़ावा देना है। इससे सरकारी सेवाओं को अधिक आसान, तेज और पारदर्शी बनाना है, ताकि नागरिकों को ये सेवाएं आसानी से और उंगलियों पर उपलब्ध हो सकें।
जिन सेवाओं को ऑनलाइन किया है, उनमें सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की 11 सेवाएं, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की 6 सेवाएं, राजस्व विभाग, विधि विभाग और आदिवासी विकास विभाग की एक-एक सेवा शामिल है।
अब ये सुविधाएं ऑनलाइन उपलब्ध होंगी
-सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग (एसजेईडी) की एसईबीसी (सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्ग) का प्रमाण पत्र, (ग्रामीण/शहरी), नॉन-क्रीमी लेयर सर्टिफिकेट (गुजरात और भारत सरकार), ईडब्ल्यूएस का प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र ऑनलाइन प्राप्त किए जा सकेंगे। -खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग (एफसीएस) से जुड़ी सेवा में राशन कार्ड में नाम को जोड़ना या हटाना, उसमें सुधार करना, अलग राशन कार्ड बनवाना, नया राशन कार्ड बनवाना और डुप्लीकेट राशन कार्ड बनवाना ऑनलाइन संभव होगा। -राजस्व विभाग : प्रमाणित प्रति प्राप्त करने के लिए आवेदन। -विधि विभाग : अन्य तैयार शपथ पत्र। -आदिवासी विकास विभाग : अनुसूचित जनजाति (एसटी) जाति प्रमाण पत्र को भी ऑनलाइन प्राप्त किया जा सकेगा।
एक बार डेटा एंट्री का दोबारा हो सकेगा उपयोग
डिजिटल गुजरात के तहत पांच विभागों की 20 सेवाओं को ऑनलाइन करने से नागरिकों के डेटा की एक बार एंट्री करने के बाद उसे विभिन्न सेवाओं में दोबारा उपयोग में लिया जा सकता है। अनावश्यक दस्तावेजों की मांग को खत्म होगी। आवेदन फॉर्म को काफी आसान बनाया है। दस्तावेजों का डिजिटल सत्यापन किया जाएगा। आधार कार्ड-आधारित पहचान, एपीआइ द्वारा ऑनलाइन रिकॉर्ड जांच और डिजीलॉकर एकीकरण किया जाएगा। ई-साइन सुविधा, वॉट्सऐप के जरिए सेवा वितरण, क्यूआर कोड-सक्षम प्रमाण पत्र और यूपीआइ के माध्यम से ऑनलाइन पेमेंट जैसी व्यवस्था की गई है। सरकार गुजराती भाषा का एआई मॉडल्स बनाने को भी प्रोजेक्ट शुरू करने वाली है।


