औरंगाबाद में 20 लाख लोगों को मिलेगी फाइलेरिया की दवा:10 फरवरी से शुरू होगा अभियान, तीन दिन कैंप भी लगाया जाएगा

औरंगाबाद में 20 लाख लोगों को मिलेगी फाइलेरिया की दवा:10 फरवरी से शुरू होगा अभियान, तीन दिन कैंप भी लगाया जाएगा

राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) और आईडीए अभियान के सफल क्रियान्वयन को लेकर सोमवार को सदर अस्पताल स्थित सभाकक्ष में मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार ने की। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि जिले में फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर 10 फरवरी से सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम की शुरुआत की जा रही है, जो 27 फरवरी तक चलेगा। कार्यक्रम के तहत 24 फरवरी तक डोर-टू-डोर अभियान चलाया जाएगा, जबकि 25, 26 और 27 फरवरी को मेगा एमडीए कैंप आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि विशेष रूप से 11 फरवरी को जिले के 930 आंगनबाड़ी केंद्रों पर मेगा एमडीए कैंप लगाए जाएंगे। इन कैंपों में जीविका कर्मियों को प्रत्येक केंद्र पर 5-5 लोगों को लाकर दवा सेवन कराया जाएगा। जिले में 20 लाख 1 हजार 630 से अधिक लोगों को दवा देने का लक्ष्य है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने मीडिया से अपील की कि वे फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को लेकर लोगों को जागरूक करें, ताकि अधिक से अधिक लोग दवा सेवन कर इस बीमारी से मुक्ति पा सकें। कार्यशाला में डीपीएम स्वास्थ्य मो. अनवर आलम, डीआईओ सह डीवीबीडीसीओ डॉ. मिथिलेश प्रसाद, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सर्विलांस मेडिकल अफसर डॉ. नकीब सहित स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी और सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे। 11 फरवरी को मेगा एमडीए कैंप बताया कि 11 फरवरी को आयोजित मेगा एमडीए कैंप में बूथ लगाकर समुदाय के लक्षित लाभार्थियों को स्वास्थ्यकर्मी अपने सामने फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन कराएंगे। इसके अलावा प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी अगले 14 दिनों तक घर-घर जाकर छूटे हुए लाभार्थियों को दवा खिलाना सुनिश्चित करेंगे। दवाओं का वितरण किसी भी स्थिति में नहीं किया जाएगा, बल्कि आशा और स्वास्थ्यकर्मी अपने सामने ही दवा का सेवन कराएंगे।

पूरी तरह सुरक्षित है फाइलेरिया रोधी दवाएं सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया कि फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। हाई बीपी, शुगर, अर्थराइटिस या अन्य सामान्य बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति भी इन दवाओं का सेवन कर सकते हैं।उन्होंने बताया कि इस दौरान 3 प्रकार की दवाएं डीईसी, अल्बेंडाजोल और आइवरमेक्टिन निर्धारित खुराक में दी जाएंगी। दवाओं का सेवन खाली पेट नहीं करना है और इन्हें चबाकर खाना अनिवार्य होगा। दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, डिलीवरी के एक सप्ताह के भीतर की महिलाओं और अति गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को यह दवा नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सामान्यतः इन दवाओं से कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं होता है। यदि किसी व्यक्ति को दवा खाने के बाद चक्कर जैसी शिकायत होती है तो यह घबराने की बात नहीं, बल्कि यह संकेत है कि शरीर में मौजूद फाइलेरिया के परजीवी दवा के प्रभाव से नष्ट हो रहे हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रत्येक प्रखंड में रैपिड रिस्पॉन्स टीम की तैनाती की गई है।

930 स्वास्थ्य टीम का किया गया है गठन डीपीएम स्वास्थ्य मो. अनवर आलम ने बताया कि 930 स्वास्थ्य टीमों का गठन किया गया है, जिसमें प्रत्येक टीम में दो स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। पूरे अभियान की निगरानी के लिए 95 पर्यवेक्षकों को लगाया गया है। बताया कि यह अभियान औरंगाबाद जिले के आठ प्रखंड बारुण, दाउदनगर, देव, हसपुरा, मदनपुर, नवीनगर, ओबरा, रफीगंज तथा औरंगाबाद शहरी क्षेत्र में संचालित किया जाएगा। कुटुंबा, गोह और सदर प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में यह अभियान नहीं चलाया जाएगा।

2027 तक फाइलेरिया का पूर्ण उन्मूलन का रखा गया है लक्ष्य डीआईओ सह डीवीबीडीसीओ डॉ. मिथिलेश कुमार ने फाइलेरिया को सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि यह रोग संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है और लसीका तंत्र को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने बताया कि जिले में अब तक हाइड्रोसील के 310 और हाथीपांव के 1515 मामले चिह्नित किए गए हैं। वहीं, नाइट ब्लड सर्वे के तहत 7500 लोगों के सैंपल लिए गए थे, जिनमें 75 पॉजिटिव पाए गए। यह सैंपल रात 11 बजे के बाद लिए गए थे, क्योंकि इसी समय फाइलेरिया परजीवी रक्त में सक्रिय रहते हैं। कार्यशाला में यह भी बताया गया कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक फाइलेरिया का पूर्ण उन्मूलन करना है और इसके लिए अब समय बहुत कम बचा है। राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत मास ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एमडीए) और आईडीए अभियान के सफल क्रियान्वयन को लेकर सोमवार को सदर अस्पताल स्थित सभाकक्ष में मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार ने की। इस अवसर पर सिविल सर्जन डॉ. कृष्ण कुमार ने बताया कि जिले में फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर 10 फरवरी से सामूहिक दवा सेवन कार्यक्रम की शुरुआत की जा रही है, जो 27 फरवरी तक चलेगा। कार्यक्रम के तहत 24 फरवरी तक डोर-टू-डोर अभियान चलाया जाएगा, जबकि 25, 26 और 27 फरवरी को मेगा एमडीए कैंप आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने बताया कि विशेष रूप से 11 फरवरी को जिले के 930 आंगनबाड़ी केंद्रों पर मेगा एमडीए कैंप लगाए जाएंगे। इन कैंपों में जीविका कर्मियों को प्रत्येक केंद्र पर 5-5 लोगों को लाकर दवा सेवन कराया जाएगा। जिले में 20 लाख 1 हजार 630 से अधिक लोगों को दवा देने का लक्ष्य है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने मीडिया से अपील की कि वे फाइलेरिया उन्मूलन अभियान को लेकर लोगों को जागरूक करें, ताकि अधिक से अधिक लोग दवा सेवन कर इस बीमारी से मुक्ति पा सकें। कार्यशाला में डीपीएम स्वास्थ्य मो. अनवर आलम, डीआईओ सह डीवीबीडीसीओ डॉ. मिथिलेश प्रसाद, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के सर्विलांस मेडिकल अफसर डॉ. नकीब सहित स्वास्थ्य विभाग के कई अधिकारी और सहयोगी संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे। 11 फरवरी को मेगा एमडीए कैंप बताया कि 11 फरवरी को आयोजित मेगा एमडीए कैंप में बूथ लगाकर समुदाय के लक्षित लाभार्थियों को स्वास्थ्यकर्मी अपने सामने फाइलेरिया रोधी दवाओं का सेवन कराएंगे। इसके अलावा प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी अगले 14 दिनों तक घर-घर जाकर छूटे हुए लाभार्थियों को दवा खिलाना सुनिश्चित करेंगे। दवाओं का वितरण किसी भी स्थिति में नहीं किया जाएगा, बल्कि आशा और स्वास्थ्यकर्मी अपने सामने ही दवा का सेवन कराएंगे।

पूरी तरह सुरक्षित है फाइलेरिया रोधी दवाएं सिविल सर्जन ने स्पष्ट किया कि फाइलेरिया रोधी दवाएं पूरी तरह सुरक्षित हैं। हाई बीपी, शुगर, अर्थराइटिस या अन्य सामान्य बीमारियों से ग्रसित व्यक्ति भी इन दवाओं का सेवन कर सकते हैं।उन्होंने बताया कि इस दौरान 3 प्रकार की दवाएं डीईसी, अल्बेंडाजोल और आइवरमेक्टिन निर्धारित खुराक में दी जाएंगी। दवाओं का सेवन खाली पेट नहीं करना है और इन्हें चबाकर खाना अनिवार्य होगा। दो वर्ष से कम उम्र के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, डिलीवरी के एक सप्ताह के भीतर की महिलाओं और अति गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को यह दवा नहीं दी जाएगी। उन्होंने कहा कि सामान्यतः इन दवाओं से कोई गंभीर दुष्प्रभाव नहीं होता है। यदि किसी व्यक्ति को दवा खाने के बाद चक्कर जैसी शिकायत होती है तो यह घबराने की बात नहीं, बल्कि यह संकेत है कि शरीर में मौजूद फाइलेरिया के परजीवी दवा के प्रभाव से नष्ट हो रहे हैं। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए प्रत्येक प्रखंड में रैपिड रिस्पॉन्स टीम की तैनाती की गई है।

930 स्वास्थ्य टीम का किया गया है गठन डीपीएम स्वास्थ्य मो. अनवर आलम ने बताया कि 930 स्वास्थ्य टीमों का गठन किया गया है, जिसमें प्रत्येक टीम में दो स्वास्थ्यकर्मी शामिल हैं। पूरे अभियान की निगरानी के लिए 95 पर्यवेक्षकों को लगाया गया है। बताया कि यह अभियान औरंगाबाद जिले के आठ प्रखंड बारुण, दाउदनगर, देव, हसपुरा, मदनपुर, नवीनगर, ओबरा, रफीगंज तथा औरंगाबाद शहरी क्षेत्र में संचालित किया जाएगा। कुटुंबा, गोह और सदर प्रखंड के ग्रामीण इलाकों में यह अभियान नहीं चलाया जाएगा।

2027 तक फाइलेरिया का पूर्ण उन्मूलन का रखा गया है लक्ष्य डीआईओ सह डीवीबीडीसीओ डॉ. मिथिलेश कुमार ने फाइलेरिया को सार्वजनिक स्वास्थ्य की गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि यह रोग संक्रमित मच्छरों के काटने से फैलता है और लसीका तंत्र को नुकसान पहुंचाता है। उन्होंने बताया कि जिले में अब तक हाइड्रोसील के 310 और हाथीपांव के 1515 मामले चिह्नित किए गए हैं। वहीं, नाइट ब्लड सर्वे के तहत 7500 लोगों के सैंपल लिए गए थे, जिनमें 75 पॉजिटिव पाए गए। यह सैंपल रात 11 बजे के बाद लिए गए थे, क्योंकि इसी समय फाइलेरिया परजीवी रक्त में सक्रिय रहते हैं। कार्यशाला में यह भी बताया गया कि सरकार का लक्ष्य वर्ष 2027 तक फाइलेरिया का पूर्ण उन्मूलन करना है और इसके लिए अब समय बहुत कम बचा है।  

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