20 इंच की ‘मिनी’ गाय आकर्षण का केंद्र:जमशेदपुर में पहली बार दिखी पुंगनूर नस्ल की गाए, छोटे कद से लोगों को लुभा रही

20 इंच की ‘मिनी’ गाय आकर्षण का केंद्र:जमशेदपुर में पहली बार दिखी पुंगनूर नस्ल की गाए, छोटे कद से लोगों को लुभा रही

जमशेदुपर स्थित केबल टाउन निवासी मोहित गुप्ता इन दिनों अपनी अनोखी पहल को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने आंध्र प्रदेश से पुंगनूर नस्ल की मिनी मिनिएचर गाय मंगाई है, जो अपने बेहद छोटे आकार के कारण इलाके में आकर्षण का केंद्र बन गई है। यह नस्ल पहली बार जमशेदपुर में लाई गई है। पुंगनूर नस्ल की यह गाय दुनिया की सबसे छोटी गायों में गिनी जाती है। इसकी ऊंचाई महज 20 इंच और वजन लगभग 20 से 25 किलोग्राम है। छोटे कद और आकर्षक बनावट के कारण इसे देखने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। गौरी और गोपाल नाम रखा
मोहित गुप्ता ने बताया कि वे लंबे समय से इस खास नस्ल की गाय पालना चाहते थे। काफी प्रयासों के बाद उन्होंने 14 मार्च को आंध्र प्रदेश से इसे मंगवाया। इनका नाम उन्होंने गौरी और गोपाल रखा है। कम जगह में पालन, गाढ़ा दूध इसकी खासियत
पुंगनूर नस्ल की यह देसी गाय कम जगह में भी आसानी से पाली जा सकती है। यह प्रतिदिन लगभग एक लीटर दूध देती है। सुबह और शाम आधा-आधा लीटर। इसके दूध की विशेषता है कि यह गाढ़ा और अधिक वसा युक्त होता है। नादिपथी गोशाला से लाई गई दुर्लभ नस्ल
मोहित गुप्ता के अनुसार, यह गाय आंध्र प्रदेश की नादिपथी गोशाला से लाई गई है, जहां इस नस्ल का संरक्षण किया जाता है। देशभर में इसी गोशाला से पुंगनूर नस्ल की गायों की आपूर्ति होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पहली बार इतनी छोटी गाय देखी है। जमशेदुपर स्थित केबल टाउन निवासी मोहित गुप्ता इन दिनों अपनी अनोखी पहल को लेकर चर्चा में हैं। उन्होंने आंध्र प्रदेश से पुंगनूर नस्ल की मिनी मिनिएचर गाय मंगाई है, जो अपने बेहद छोटे आकार के कारण इलाके में आकर्षण का केंद्र बन गई है। यह नस्ल पहली बार जमशेदपुर में लाई गई है। पुंगनूर नस्ल की यह गाय दुनिया की सबसे छोटी गायों में गिनी जाती है। इसकी ऊंचाई महज 20 इंच और वजन लगभग 20 से 25 किलोग्राम है। छोटे कद और आकर्षक बनावट के कारण इसे देखने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। गौरी और गोपाल नाम रखा
मोहित गुप्ता ने बताया कि वे लंबे समय से इस खास नस्ल की गाय पालना चाहते थे। काफी प्रयासों के बाद उन्होंने 14 मार्च को आंध्र प्रदेश से इसे मंगवाया। इनका नाम उन्होंने गौरी और गोपाल रखा है। कम जगह में पालन, गाढ़ा दूध इसकी खासियत
पुंगनूर नस्ल की यह देसी गाय कम जगह में भी आसानी से पाली जा सकती है। यह प्रतिदिन लगभग एक लीटर दूध देती है। सुबह और शाम आधा-आधा लीटर। इसके दूध की विशेषता है कि यह गाढ़ा और अधिक वसा युक्त होता है। नादिपथी गोशाला से लाई गई दुर्लभ नस्ल
मोहित गुप्ता के अनुसार, यह गाय आंध्र प्रदेश की नादिपथी गोशाला से लाई गई है, जहां इस नस्ल का संरक्षण किया जाता है। देशभर में इसी गोशाला से पुंगनूर नस्ल की गायों की आपूर्ति होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने पहली बार इतनी छोटी गाय देखी है।  

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