Bihar Politics: बिहार विधानमंडल के दोनों सदनों में आज काफी हलचल रहने की उम्मीद है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज बिहार विधान परिषद से अपना इस्तीफा देंगे, जबकि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन अपनी बांकीपुर विधानसभा सीट छोड़ेंगे। 16 मार्च को राज्य सभा के लिए निर्वाचित होने के बाद, आज उनके इस्तीफे के लिए संवैधानिक समय सीमा (14 दिन) पूरी हो रही है।
1985 में पहली बार विधायक बने थे नीतीश कुमार
1985 में पहली बार हरनौत से विधायक चुने गए नीतीश कुमार अब देश के उन चुनिंदा नेताओं की कतार में शामिल हो गए हैं, जिन्होंने चारों विधायी सदनों, विधानसभा, विधान परिषद, लोकसभा और राज्य सभा में सदस्य के रूप में कार्य किया है। वह 2006 से लगातार विधान परिषद के सदस्य रहे हैं।
नीतीश कुमार का मौजूदा कार्यकाल 2030 तक चलने वाला था, लेकिन आज वह इस सीट को छोड़ देंगे। हालांकि, MLC पद से हटने के बावजूद, नीतीश कुमार मुख्यमंत्री के रूप में अपना कार्य जारी रख सकते हैं। संवैधानिक प्रावधानों के अनुसार, वह किसी भी विधायी सदन का सदस्य न होते हुए भी छह महीने तक मुख्यमंत्री बने रह सकते हैं। उम्मीद है कि वह 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेंगे।
विधायक नितिन नवीन भी देंगे इस्तीफा
इधर, भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन भी बिहार विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा देंगे। उनके इस्तीफे के साथ ही पटना की हाई-प्रोफाइल बांकीपुर विधानसभा सीट खाली हो जाएगी। वैसे तो नितिन नवीन का इस्तीफा रविवार को ही होना तय था। विधानसभा सचिवालय ने इसके लिए जरूरी तैयारियां भी कर ली थीं। हालांकि, उनके कार्यक्रम में अचानक बदलाव के कारण वह असम के दौरे पर चले गए, जिससे यह प्रक्रिया टल गई। अब उम्मीद है कि इस्तीफे की प्रक्रिया सोमवार को पूरी होगी।
नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद बांकीपुर विधानसभा सीट खाली हो जाएगी, जिससे इस निर्वाचन क्षेत्र में उपचुनाव कराना जरूरी हो जाएगा। अपने इस पारंपरिक गढ़ को बरकरार रखने के लिए, भाजपा ने आगामी मुकाबले में उतारने के लिए संभावित नए चेहरों पर आंतरिक रूप से विचार-विमर्श शुरू कर दिया है।
मुख्यमंत्री आवास पर हलचल
इस्तीफे की प्रक्रिया से पहले, रविवार शाम को मुख्यमंत्री आवास पर जदयू के शीर्ष नेताओं का जमावड़ा देखने को मिला। केंद्रीय मंत्री ललन सिंह, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा, मंत्री विजय कुमार चौधरी और विधायक अनंत सिंह समेत कई नेताओं ने मुख्यमंत्री के साथ विस्तार से चर्चा की। बैठक के बाद मीडिया से बात करते हुए विधायक अनंत सिंह ने बताया कि मुख्यमंत्री सोमवार को विधान परिषद की अपनी सदस्यता छोड़ देंगे।
संवैधानिक बाध्यता क्या है?
संविधान के ‘प्रिबिशन ऑफ साइमलटेनियस मेंबरशिप रूल्स, 1950’ के मुताबिक, यदि कोई मौजूदा विधायक या एमएलसी राज्यसभा के लिए चुना जाता है, तो उसे 14 दिनों के भीतर अपनी राज्य की सदस्यता छोड़नी पड़ती है। 16 मार्च को परिणाम आने के बाद आज 30 मार्च इस प्रक्रिया की आखिरी तारीख है।


