अररिया में सड़क के बीच 2 आम के पेड़:बोची गांव में 400 मीटर लंबी बनी रोड, उपयोग नामुमकिन; इंजीनियर-ठेकेदार पर कार्रवाई की मांग

अररिया के सदर प्रखंड अंतर्गत बोची गांव में एक पीसीसी सड़क निर्माण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। लगभग 300 से 400 मीटर लंबी इस सड़क के बीचों-बीच दो आम के पेड़ होने के कारण यह अनुपयोगी साबित हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क इतनी संकरी है कि साइकिल का गुजरना भी मुश्किल है, चारपहिया वाहनों की आवाजाही संभव नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान इन आम के पेड़ों को हटाया नहीं गया, बल्कि उन्हें बीच में छोड़कर ही कॉन्क्रीट की ढलाई कर दी गई। इसके परिणामस्वरूप, यह मार्ग अब केवल दिखावे का बनकर रह गया है और सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब सड़क का कोई व्यावहारिक उपयोग नहीं है, तो इतनी बड़ी राशि खर्च करने का क्या औचित्य था। सड़क पर नहीं मिला सूचना बोर्ड इस ‘अजूबा’ निर्माण के लिए किस योजना के तहत धन स्वीकृत हुआ और ठेकेदार को भुगतान किस आधार पर किया गया, यह भी एक बड़ा सवाल है। सड़क पर कोई सूचना बोर्ड नहीं मिला है, जिससे योजना का नाम, लागत, लंबाई या निर्माण एजेंसी का विवरण स्पष्ट हो सके। इससे परियोजना की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय निवासी इस पूरे मामले में संबंधित विभागीय इंजीनियरों और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। अररिया के सदर प्रखंड अंतर्गत बोची गांव में एक पीसीसी सड़क निर्माण को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। लगभग 300 से 400 मीटर लंबी इस सड़क के बीचों-बीच दो आम के पेड़ होने के कारण यह अनुपयोगी साबित हो रही है। ग्रामीणों के अनुसार, सड़क इतनी संकरी है कि साइकिल का गुजरना भी मुश्किल है, चारपहिया वाहनों की आवाजाही संभव नहीं है। ग्रामीणों का आरोप है कि सड़क निर्माण के दौरान इन आम के पेड़ों को हटाया नहीं गया, बल्कि उन्हें बीच में छोड़कर ही कॉन्क्रीट की ढलाई कर दी गई। इसके परिणामस्वरूप, यह मार्ग अब केवल दिखावे का बनकर रह गया है और सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है। ग्रामीणों ने सवाल उठाया है कि जब सड़क का कोई व्यावहारिक उपयोग नहीं है, तो इतनी बड़ी राशि खर्च करने का क्या औचित्य था। सड़क पर नहीं मिला सूचना बोर्ड इस ‘अजूबा’ निर्माण के लिए किस योजना के तहत धन स्वीकृत हुआ और ठेकेदार को भुगतान किस आधार पर किया गया, यह भी एक बड़ा सवाल है। सड़क पर कोई सूचना बोर्ड नहीं मिला है, जिससे योजना का नाम, लागत, लंबाई या निर्माण एजेंसी का विवरण स्पष्ट हो सके। इससे परियोजना की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। स्थानीय निवासी इस पूरे मामले में संबंधित विभागीय इंजीनियरों और ठेकेदार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।  

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