कैमूर के मोहनिया अनुमंडल अस्पताल परिसर में लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे ट्रॉमा सेंटर के निर्माण के दौरान पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करते हुए दो हरे शीशम के पेड़ काट दिए गए। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब बिहार सरकार ‘जल-जीवन-हरियाली’ अभियान चला रही है। पेड़ काटने वाले एक मिस्त्री राकेश शर्मा ने बताया कि उन्हें इंजीनियर के निर्देश पर पेड़ काटने को कहा गया था। मिस्त्री के अनुसार, इन लकड़ियों से पलंग बनाने की बात कही गई थी। ”दो शीशम के पेड़ बिना किसी अनुमति के काटे गए” मोहनिया वन विभाग के रेंज ऑफिसर संतोष कुमार चौबे ने इस बात की पुष्टि की कि दो शीशम के पेड़ बिना किसी अनुमति के काटे गए हैं। सूचना मिलने पर वन विभाग ने लकड़ियों की बरामदगी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है। इस संबंध में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाएगी चौबे ने बताया कि पेड़ों की ढुलाई के लिए भी कोई अनुमति नहीं मांगी गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही मोहनिया थाने में इस संबंध में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाएगी। यह मामला पर्यावरण संरक्षण और विकास परियोजनाओं के बीच संतुलन की कमी को उजागर करता है। वन विभाग ने कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है, हालांकि काटे गए पेड़ों की भरपाई संभव नहीं है। कैमूर के मोहनिया अनुमंडल अस्पताल परिसर में लगभग 10 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे ट्रॉमा सेंटर के निर्माण के दौरान पर्यावरण नियमों का उल्लंघन करते हुए दो हरे शीशम के पेड़ काट दिए गए। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब बिहार सरकार ‘जल-जीवन-हरियाली’ अभियान चला रही है। पेड़ काटने वाले एक मिस्त्री राकेश शर्मा ने बताया कि उन्हें इंजीनियर के निर्देश पर पेड़ काटने को कहा गया था। मिस्त्री के अनुसार, इन लकड़ियों से पलंग बनाने की बात कही गई थी। ”दो शीशम के पेड़ बिना किसी अनुमति के काटे गए” मोहनिया वन विभाग के रेंज ऑफिसर संतोष कुमार चौबे ने इस बात की पुष्टि की कि दो शीशम के पेड़ बिना किसी अनुमति के काटे गए हैं। सूचना मिलने पर वन विभाग ने लकड़ियों की बरामदगी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है। इस संबंध में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाएगी चौबे ने बताया कि पेड़ों की ढुलाई के लिए भी कोई अनुमति नहीं मांगी गई थी। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही मोहनिया थाने में इस संबंध में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाएगी। यह मामला पर्यावरण संरक्षण और विकास परियोजनाओं के बीच संतुलन की कमी को उजागर करता है। वन विभाग ने कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है, हालांकि काटे गए पेड़ों की भरपाई संभव नहीं है।


