भोजपुर में 2 साइबर ठग गिरफ्तार, मुख्य सरगना फरार:ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर रोजाना 12 लाख की ठगी; 100 से अधिक लोगों के बैंक ट्रांजेक्शन की जांच

भोजपुर में 2 साइबर ठग गिरफ्तार, मुख्य सरगना फरार:ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर रोजाना 12 लाख की ठगी; 100 से अधिक लोगों के बैंक ट्रांजेक्शन की जांच

भोजपुर जिले में अवैध ऑनलाइन गेमिंग और साइबर ठगी से जुड़े एक बड़े संगठित गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। साइबर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन गेमिंग के जरिए लोगों से ठगी करने वाले गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। जिसकी पहचान पिपरपांती निवासी आयुष श्रीवास्तव और शाहपुर थाना क्षेत्र के कनैली गांव निवासी मोहित कुमार पांडेय के तौर पर हुई है। ऑनलाइन गेमिंग से प्रतिदिन 12 लाख रुपए की ठगी‎ की जा रही थी। इस रैकेट का मुख्य सरगना मृत्युंजय पांडेय सहित तीन से चार अन्य आरोपी फरार है। सख्ती से पूछताछ में हुआ खुलासा साइबर डीएसपी स्नेह सेतू ने बताया कि आयुष श्रीवास्तव और मृत्युंजय पांडेय इस गिरोह के मास्टरमाइंड थे, जो मिलकर पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से नौ मोबाइल, तीन बैंक पासबुक और दो लैपटॉप बरामद किए हैं। इस मामले में दरोगा गांधी नाथ पाठक के बयान पर साइबर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। गुप्त सूचना के आधार पर शाहपुर पुलिस ने कनैली गांव स्थित मृत्युंजय कुमार पांडेय के घर छापेमारी की। इस दौरान आयुष श्रीवास्तव और मोहित कुमार पांडेय को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान साइबर अपराध से जुड़े ठोस साक्ष्य मिलने के बाद दोनों को बरामद सामग्री के साथ साइबर थाना, आरा लाया गया। बाद में न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। यूपीआई और नेट बैंकिंग के जरिए रुपए भेजे जाते थे साइबर डीएसपी स्नेह सेतू ने बताया कि पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी अवैध रूप से ऑनलाइन गेम के जरिए लोगों से पैसा लगवाते थे। प्रतिदिन करीब 11 से 12 लाख रुपए बैंक खातों के माध्यम से गेमिंग एप में मंगवाए जाते थे। गेम जीतने के नाम पर प्रतिदिन चार से पांच लाख रुपए यूपीआई और नेट बैंकिंग के जरिए खिलाड़ियों को भेजे जाते थे। इस तरह बड़े पैमाने पर अवैध लेन-देन कर गिरोह मुनाफा कमा रहा था। तकनीकी जांच में यह भी सामने आया है कि अलग-अलग लोगों के बैंक खातों का उपयोग कर ट्रांजेक्शन किया जा रहा था। जो खिलाड़ी अधिक रकम जीत लेता था, उसे तत्काल ब्लॉक कर दिया जाता था, ताकि गिरोह को नुकसान न हो। खिलाड़ियों को लंबे समय तक जोड़े रखने के लिए शुरुआत में कुछ रुपए जीतने के बाद दी जाती थी। साइबर डीएसपी ने बताया कि… आयुष पिछले दो वर्षों से इस रैकेट से जुड़ा हुआ था। वह मध्यप्रदेश से प्रशिक्षण लेकर आया था और यहां नए युवकों को ट्रेनिंग देकर गिरोह में शामिल करता था। आयुष और मोहित की भूमिका गैंग के विस्तार और संचालन में अहम रही है। बरामद मोबाइल और लैपटॉप की गहन तकनीकी जांच की जा रही है। फिलहाल सौ से अधिक खिलाड़ियों के बैंक ट्रांजेक्शन खंगाले जा रहे हैं और जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी की संभावना जताई गई । भोजपुर जिले में अवैध ऑनलाइन गेमिंग और साइबर ठगी से जुड़े एक बड़े संगठित गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। साइबर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए ऑनलाइन गेमिंग के जरिए लोगों से ठगी करने वाले गिरोह के दो सदस्यों को गिरफ्तार किया है। जिसकी पहचान पिपरपांती निवासी आयुष श्रीवास्तव और शाहपुर थाना क्षेत्र के कनैली गांव निवासी मोहित कुमार पांडेय के तौर पर हुई है। ऑनलाइन गेमिंग से प्रतिदिन 12 लाख रुपए की ठगी‎ की जा रही थी। इस रैकेट का मुख्य सरगना मृत्युंजय पांडेय सहित तीन से चार अन्य आरोपी फरार है। सख्ती से पूछताछ में हुआ खुलासा साइबर डीएसपी स्नेह सेतू ने बताया कि आयुष श्रीवास्तव और मृत्युंजय पांडेय इस गिरोह के मास्टरमाइंड थे, जो मिलकर पूरे नेटवर्क का संचालन कर रहे थे। छापेमारी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से नौ मोबाइल, तीन बैंक पासबुक और दो लैपटॉप बरामद किए हैं। इस मामले में दरोगा गांधी नाथ पाठक के बयान पर साइबर थाना में प्राथमिकी दर्ज की गई है। गुप्त सूचना के आधार पर शाहपुर पुलिस ने कनैली गांव स्थित मृत्युंजय कुमार पांडेय के घर छापेमारी की। इस दौरान आयुष श्रीवास्तव और मोहित कुमार पांडेय को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान साइबर अपराध से जुड़े ठोस साक्ष्य मिलने के बाद दोनों को बरामद सामग्री के साथ साइबर थाना, आरा लाया गया। बाद में न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। यूपीआई और नेट बैंकिंग के जरिए रुपए भेजे जाते थे साइबर डीएसपी स्नेह सेतू ने बताया कि पूछताछ में खुलासा हुआ है कि आरोपी अवैध रूप से ऑनलाइन गेम के जरिए लोगों से पैसा लगवाते थे। प्रतिदिन करीब 11 से 12 लाख रुपए बैंक खातों के माध्यम से गेमिंग एप में मंगवाए जाते थे। गेम जीतने के नाम पर प्रतिदिन चार से पांच लाख रुपए यूपीआई और नेट बैंकिंग के जरिए खिलाड़ियों को भेजे जाते थे। इस तरह बड़े पैमाने पर अवैध लेन-देन कर गिरोह मुनाफा कमा रहा था। तकनीकी जांच में यह भी सामने आया है कि अलग-अलग लोगों के बैंक खातों का उपयोग कर ट्रांजेक्शन किया जा रहा था। जो खिलाड़ी अधिक रकम जीत लेता था, उसे तत्काल ब्लॉक कर दिया जाता था, ताकि गिरोह को नुकसान न हो। खिलाड़ियों को लंबे समय तक जोड़े रखने के लिए शुरुआत में कुछ रुपए जीतने के बाद दी जाती थी। साइबर डीएसपी ने बताया कि… आयुष पिछले दो वर्षों से इस रैकेट से जुड़ा हुआ था। वह मध्यप्रदेश से प्रशिक्षण लेकर आया था और यहां नए युवकों को ट्रेनिंग देकर गिरोह में शामिल करता था। आयुष और मोहित की भूमिका गैंग के विस्तार और संचालन में अहम रही है। बरामद मोबाइल और लैपटॉप की गहन तकनीकी जांच की जा रही है। फिलहाल सौ से अधिक खिलाड़ियों के बैंक ट्रांजेक्शन खंगाले जा रहे हैं और जल्द ही इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की गिरफ्तारी की संभावना जताई गई ।  

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