मुजफ्फरपुर पुलिस ने ‘ऑपरेशन साइबर प्रहार’ के तहत एक अंतर्राज्यीय साइबर ठग गिरोह का खुलासा किया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई में दो मुख्य बदमाशों को गिरफ्तार किया गया है। ये अपराधी इन्वेस्टमेंट और ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड के जरिए देशभर के लोगों को निशाना बना रहे थे। पुलिस को रामपुरहरि थाना क्षेत्र के सलेमापुर और गोरिगामा टोला में डिजिटल फ्रॉड की सूचना मिली थी। साइबर थाने के डीएसपी हिमांशु कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसने छापेमारी कर अर्जुन कुमार और रणधीर कुमार नाम के दो बदमाशों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उन्होंने लंबे समय से इस अवैध धंधे में शामिल होने की बात स्वीकार की। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस गिरोह का ठगी का जाल देश के 30 से अधिक राज्यों तक फैला हुआ था। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर जब्त मोबाइल नंबरों और बैंक खातों की जांच से यह खुलासा हुआ। ये अपराधी ऊंचे रिटर्न का लालच देकर निवेश कराने और फर्जी गेमिंग ऐप्स के जरिए लोगों के बैंक खातों से धोखाधड़ी करते थे। बैंक के दस्तावेज जब्त बिहार में बैठकर भी ये ठग दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों को निशाना बना रहे थे। पुलिस ने छापेमारी के दौरान बदामाशों के पास से भारी मात्रा में तकनीकी उपकरण और बैंकिंग दस्तावेज भी बरामद किए हैं। बरामद सामानों की सूची – 09 स्मार्टफ़ोन (विभिन्न सक्रिय सिम कार्ड्स के साथ)
14 अलग-अलग बैंकों के डेबिट कार्ड और 01 पासबुक
11 चेक बुक (जिनमें से 03 पर पहले से ही हस्ताक्षर किए हुए थे)
01 लैपटॉप, पैन कार्ड और आधार कार्ड
05 फर्जी मुहरें (जिनका उपयोग संभवतः कागजात तैयार करने में होता था) साइबर डीएसपी की जनता से अपील SSP कांतेश कुमार मिश्रा के निर्देश पर साइबर डीएसपी ने प्रेस वार्ता में बताया कि पुलिस अब इन अपराधियों के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटी है। गिरफ्तार अभियुक्तों के बैंक ट्रांजेक्शन की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों और इनके आकाओं तक पहुंचा जा सके।
उन्होंने आम नागरिकों को चेतावनी देते हुए कहा- “डिजिटल युग में सावधानी ही सुरक्षा है। किसी भी अनजान इन्वेस्टमेंट स्कीम, घर बैठे पैसे कमाने वाले विज्ञापनों या संदिग्ध गेमिंग ऐप्स के झांसे में न आएं। अपनी ओटीपी (OTP), पिन या बैंकिंग विवरण किसी के भी साथ साझा न करें। यदि आप ठगी का शिकार होते हैं, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना दें।” मुजफ्फरपुर पुलिस ने ‘ऑपरेशन साइबर प्रहार’ के तहत एक अंतर्राज्यीय साइबर ठग गिरोह का खुलासा किया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा के निर्देश पर हुई इस कार्रवाई में दो मुख्य बदमाशों को गिरफ्तार किया गया है। ये अपराधी इन्वेस्टमेंट और ऑनलाइन गेमिंग फ्रॉड के जरिए देशभर के लोगों को निशाना बना रहे थे। पुलिस को रामपुरहरि थाना क्षेत्र के सलेमापुर और गोरिगामा टोला में डिजिटल फ्रॉड की सूचना मिली थी। साइबर थाने के डीएसपी हिमांशु कुमार के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसने छापेमारी कर अर्जुन कुमार और रणधीर कुमार नाम के दो बदमाशों को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उन्होंने लंबे समय से इस अवैध धंधे में शामिल होने की बात स्वीकार की। शुरुआती जांच में सामने आया है कि इस गिरोह का ठगी का जाल देश के 30 से अधिक राज्यों तक फैला हुआ था। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल पर जब्त मोबाइल नंबरों और बैंक खातों की जांच से यह खुलासा हुआ। ये अपराधी ऊंचे रिटर्न का लालच देकर निवेश कराने और फर्जी गेमिंग ऐप्स के जरिए लोगों के बैंक खातों से धोखाधड़ी करते थे। बैंक के दस्तावेज जब्त बिहार में बैठकर भी ये ठग दक्षिण और पूर्वोत्तर राज्यों के लोगों को निशाना बना रहे थे। पुलिस ने छापेमारी के दौरान बदामाशों के पास से भारी मात्रा में तकनीकी उपकरण और बैंकिंग दस्तावेज भी बरामद किए हैं। बरामद सामानों की सूची – 09 स्मार्टफ़ोन (विभिन्न सक्रिय सिम कार्ड्स के साथ)
14 अलग-अलग बैंकों के डेबिट कार्ड और 01 पासबुक
11 चेक बुक (जिनमें से 03 पर पहले से ही हस्ताक्षर किए हुए थे)
01 लैपटॉप, पैन कार्ड और आधार कार्ड
05 फर्जी मुहरें (जिनका उपयोग संभवतः कागजात तैयार करने में होता था) साइबर डीएसपी की जनता से अपील SSP कांतेश कुमार मिश्रा के निर्देश पर साइबर डीएसपी ने प्रेस वार्ता में बताया कि पुलिस अब इन अपराधियों के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने में जुटी है। गिरफ्तार अभियुक्तों के बैंक ट्रांजेक्शन की बारीकी से जांच की जा रही है ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों और इनके आकाओं तक पहुंचा जा सके।
उन्होंने आम नागरिकों को चेतावनी देते हुए कहा- “डिजिटल युग में सावधानी ही सुरक्षा है। किसी भी अनजान इन्वेस्टमेंट स्कीम, घर बैठे पैसे कमाने वाले विज्ञापनों या संदिग्ध गेमिंग ऐप्स के झांसे में न आएं। अपनी ओटीपी (OTP), पिन या बैंकिंग विवरण किसी के भी साथ साझा न करें। यदि आप ठगी का शिकार होते हैं, तो तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर सूचना दें।”


