नीमच जिले के मनासा कस्बे में गुलियन-बेरी सिंड्रोम (GBS) बीमारी का प्रकोप बढ़ रहा है। इस बीमारी से अब तक दो बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 17 लोग संक्रमित पाए गए हैं। इनमें से 15 नाबालिग हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मनासा का दौरा किया और हालात का जायजा लिया। शुक्रवार रात को चार नए मामले सामने आने के बाद कुल संक्रमितों की संख्या 13 से बढ़कर 17 हो गई है। चिंताजनक बात यह है कि 17 संक्रमितों में से 15 की उम्र 4 से 17 वर्ष के बीच है, जो दर्शाता है कि यह बीमारी मुख्य रूप से बच्चों और किशोरों को प्रभावित कर रही है। केवल दो वयस्क मरीज ही इस बीमारी की चपेट में आए हैं। मनासा पहुंचे डिप्टी सीएम मध्य प्रदेश सरकार ने इस स्वास्थ्य संकट पर तत्काल ध्यान दिया है। शनिवार को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल स्वयं मनासा पहुंचे। उन्होंने स्थानीय अधिकारियों के साथ एक उच्च स्तरीय बैठक की और बीमारी की रोकथाम के प्रयासों की समीक्षा की। उपमुख्यमंत्री ने वार्ड नंबर 15 में मृतक सोनू पिता पुरण सोनी के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सांत्वना दी और जानकारी ली। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए जा रहे स्क्रीनिंग कार्य का भी बारीकी से निरीक्षण किया और अधिकारियों को घर-घर सर्वे में कोई कोताही न बरतने के निर्देश दिए। इससे पहले शुक्रवार को उज्जैन कमिश्नर ने भी प्रभावित क्षेत्र का दौरा कर मरीजों और उनके परिजनों से मुलाकात की थी। वर्तमान में, भोपाल और उज्जैन से विशेषज्ञों की विशेष टीमें मनासा में डेरा डाले हुए हैं। ये टीमें लगातार स्क्रीनिंग और जांच के माध्यम से बीमारी के स्रोत का पता लगाने में जुटी हैं। 7 मरीजों की पुष्टि हुई जिला चिकित्सालय के सीएमएचओ डॉक्टर आरके खाघौत ने बताया कि 7 मरीजों में GBS की पुष्टि हुई है, जबकि अन्य सभी संदिग्ध मरीजों की लगातार निगरानी की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें जमीनी स्तर पर तैनात हैं ताकि हर संदिग्ध व्यक्ति की पहचान कर उन्हें समय पर उचित उपचार दिया जा सके।


