नर्मदापुरम के इटारसी वन परिक्षेत्र में 2.04 करोड़ रुपए की बेस कीमती सागौन की अवैध कटाई कांड के विवादों में घिरे डीएफओ और एसडीओ का तबादला हुआ। बुधवार देर रात को आई सूची में डीएफओ मयंक गुर्जर को प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख मुख्यालय कार्यालय में उप वन संरक्षक पद भेजा गया है। मयंक गुर्जर के स्थान पर कटनी डीएफओ गौरव शर्मा अब नर्मदापुरम के नए डीएफओ होंगे। एसडीओ (उप वनमण्डल अधिकारी) मानसिंह मरावी को प्रभारी वन मंडलाधिकारी रायसेन उत्पादन बनाया गया है। तबादला सूची में एक अधिकारी को फील्ड से हटाकर मुख्यालय और दूसरे को फील्ड में ही प्रमोशन के रूप में उत्पादन का प्रभारी डीएफओ बनाया गया है। जबकि सागौन के अवैध कटाई में एसडीओ भी जिम्मेदार है। छिपीखापा में माफिया द्वारा 2.04 करोड़ रुपए के 1242 सागौन सहित कुल 1280 पेड़ों की अवैध कटाई से वन विभाग की प्रदेश स्तर पर किरकिरी हुई है। इतने बड़े नुकसान के बावजूद संबंधित डीएफओ को आरोप पत्र जारी नहीं होने से वन विभाग का मुखिया प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख वीएन अम्बाड़े नाराज है। वीएन अम्बाड़े ने नर्मदापुरम सीसीएफ अशोक कुमार को 13 दिन पहले पत्र लिखकर नाराजगी जाहिर की थी। इतनी बड़ी शासकीय क्षति के बाद भी डीएफओ के खिलाफ कोई ठोस अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की गई है। जिसके लिए वन बल प्रमुख अम्बाड़े ने आरोप पत्र का प्रस्ताव नहीं भेजने पर साफ लिखा था कि ये निर्देशों की अवहेलना और गंभीर अनुशासनहीनता को बताता है। माफिया ले गए करोड़ों की सागौन, अफसरों ने नहीं चिंता
इटारसी परिक्षेत्र की छीपीखापा बीट में माफिया ने 1242 सागौन और 38 सतकटा पेड़ों की कटाई की। जिनकी कीमत 2.04 करोड़ रुपए के करीब है। मामला उजागर होने पर जांच में पहले केवल 356 पेड़ों की कटाई बताई गई थी, जबकि बाद में सच्चाई सामने आने पर 700 से ज्यादा ठूंठों का अपराध प्रकरण दर्ज करना पड़ा। प्रदेश स्तर की अवैध कटाई से शासन को करीब 2 करोड़ 4 लाख रुपए का नुकसान हुआ। सागौन की अवैध कटाई होती रही, पर जिम्मेदार अफसरों ने इसकी चिंता नहीं की। बाद में मामले में एसडीओ, रेंजर, वनपाल और कई वनरक्षकों को नोटिस और आरोप पत्र दिए जा चुके हैं। कुछ वन रक्षकों को निलंबित भी किया गया। लेकिन डीएफओ पर कार्रवाई नहीं होने को लेकर सवाल उठे। गलत रिपोर्ट से बड़े अधिकारी बचे, आरोपपत्र प्रस्ताव भेजने में देरी
आरोप है कि डीएफओ ने कटे पेड़ों की संख्या कम बताई, जिससे शुरुआती कार्रवाई में सिर्फ छोटे कर्मचारी और अधिकारी फंसे, जबकि बड़े अधिकारी बच गए। बाद में भोपाल से आई उड़नदस्ते की जांच टीम ने असली स्थिति उजागर की। इसके बाद डीएफओ पर कार्रवाई की सिफारिश की गई, लेकिन सीसीएफ स्तर पर मामला अटका रहा। वन बल प्रमुख वीएन अम्बाड़े ने सीसीएफ नर्मदापुरम को डीएफओ को आरोप पत्र जारी करने वाला प्रस्ताव बनाने के लिखित और मौखिक निर्देश भी दिए। पर सीसीएफ ने देरी की। जिससे वन बल प्रमुख अम्बाड़े नाराज हुए थे। उनके पत्र के आते ही सीसीएफ अशोक कुमार चौहान ने आरोप पत्र का प्रस्ताव बनाकर भेज भी दिया है।


