इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) की दरभंगा शाखा के असिस्टेंट मैनेजर रवि राघवेंद्र आज अरेस्ट हुए है। ये गिरफ्तारी बैंकिंग सिस्टम में 2 करोड़ रुपये के लोन फ्रॉड मामले में हुई है। इन्होंने बंद पड़ी कंपनी में पैसे भेजे थे। आरोपी का कहना है कि सब कुछ मैनेजर के केबिन में तय होता था। उनके दबाव में आकर इन्होंने बिना जांच किए और बिना देखे की पेपर पर साइन कर दिए। साइबर डीएसपी बिपिन बिहारी ने आज जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) में लोन के नाम पर संगठित तरीके से गलत काम किया जा रहा था। इस संबंध में साइबर थाना में 15 मार्च 2026 को एफआईआर दर्ज हुई थी। कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के केवटगामा गांव निवासी राजकिशोर राय ने एफआईआर दर्ज कराया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें कोई लोन मिला ही नहीं लेकिन, बैंक के अधिकारी उनके पास लोन लेने पहुंच गए। इस मामले में सबसे पहले विपिन पासवान नाम के आरोपी की गिरफ्तारी की गई। पुलिस जांच के दौरान उसके घर से कई संदिग्ध दस्तावेज, लोन पेपर और अलग-अलग फर्जी इंटरप्राइजेज से जुड़े कागजात बरामद किए। फर्जी लोन करवाते थे पास विपिन पासवान से पूछताछ में सामने आया कि विपिन और उसके गांव का ही कृष्णा पासवान, जो उद्योग विभाग में कार्यरत है। दोनों मिलकर बैंक अधिकारियों के साथ साजिश कर फर्जी लोन पास करवाते थे। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि बैंक के असिस्टेंट मैनेजर रवि राघवेंद्र की भूमिका संदिग्ध है, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर आरोप है कि वे फर्जी रिपोर्ट तैयार कर लोन पास करवाते थे। एक मामले में राज किशोर राय के नाम पर 18 लाख रुपये का लोन पास किया गया, जबकि जांच में पाया गया कि उनके नाम पर कोई मिठाई की दुकान अस्तित्व में ही नहीं है। खुद संबंधित व्यक्ति को भी इस लोन की जानकारी नहीं थी। इनके नाम से लोन तो पास हुआ, लेकिन पैसे इन्हें मिले नहीं थे। 4 महीने में 2 करोड़ का ट्रांजैक्शन पुलिस के अनुसार, लोन की राशि विपिन पासवान के एक्सिस बैंक के करंट अकाउंट में ट्रांसफर की जाती थी। बैंक स्टेटमेंट की जांच में 4 महीनों में करीब 2 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन का खुलासा हुआ है। ये सभी लोन प्रधानमंत्री खाद्य प्रसंस्करण योजना के तहत लिए गए थे, जिसमें कम ब्याज दर और 50% सब्सिडी का फायदा मिलता है। बंद कंपनी के नाम पर पैसै ट्रांसफर किए डीएसपी ने बताया कि लोन की राशि आगे एक चमड़े के बैग बनाने वाली कंपनी में ट्रांसफर की गई, जो जांच में बंद पाई गई। इस पूरे मामले में अब तक 14 लोन की पुष्टि हुई है। जबकि, अन्य मामलों की जांच जारी है। इस गिरोह में कुल चार लोगों की संलिप्तता सामने आई है। विपिन पासवान गिरफ्तार हो चुका है, जबकि कृष्णा पासवान फिलहाल फरार है। वहीं, उस समय के शाखा प्रबंधक रविश चंद्रा भी फरार हैं, जिनकी वर्तमान पोस्टिंग अरवल शाखा में है। साइबर डीएसपी ने कहा कि इस मामले में उद्योग विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों से भी डाटा लिया जाएगा और यह पता लगाया जाएगा कि और किन-किन लोगों की संलिप्तता है।उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरा मामला सरकारी योजना के तहत मिलने वाले लोन का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये की हेराफेरी का है। पुलिस फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है और जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा होगा। लोन नहीं मिला, लेकिन, किस्त मांगने पहुंचे अधिकारी मामला कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के केवटगामा गांव निवासी राजकिशोर राय से जुड़ा है, जो बिहार से बाहर काम करते हैं। उन्होंने गांव में दुकान खोलने के लिए लोन लेने का सोचा था। इसी दौरान उनकी मुलाकात ब्रजेश चौपाल से हुई, जिसने बैंक में पहचान का भरोसा दिलाया। आरोप है कि ब्रजेश चौपाल उन्हें दरभंगा स्थित IOB शाखा ले गया, जहां उनके आधार, पैन समेत कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। कुछ समय के लिए उनका मोबाइल सिम भी अपने कब्जे में ले लिया गया। बाद में उन्हें बताया गया कि लोन पास नहीं हुआ। लेकिन कुछ महीनों बाद बैंक अधिकारी उनके घर पहुंचकर 18 लाख रुपये के लोन की किस्त मांगने लगे, जिससे पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। जान से मारने की धमकी का आरोप पीड़ित ने आरोप लगाया कि मामले को दबाने के लिए आरोपियों ने 3 लाख रुपये देने और 70 लाख की सब्सिडी दिलाने का लालच दिया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई। करोड़ों के लोन फ्रॉड मामले में गिरफ्तार इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) के असिस्टेंट मैनेजर रवि राघवेंद्र ने आज साइबर थाना परिसर में निरीक्षक श्वेता पोद्दार को अपना बयान दिया। इसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने 6 मई 2020 को बैंक पीओ के रूप में चेन्नई में ज्वाइन किया था। इसके बाद उनकी पोस्टिंग रांची, कोलकाता और दुर्गापुर में रही, जहां वे सामान्य बैंकिंग काम जैसे पासबुक एंट्री, कैश भुगतान और खाता खोलने का काम करते थे। 15 मई को दभंगा में हुई पोस्टिंग 15 मई 2023 को उनकी पोस्टिंग दरभंगा के कटहलवाड़ी शाखा में हुई, जहां कुछ समय बाद रविश चंद्रा शाखा प्रबंधक बनकर आए। बैंक में स्टाफ की कमी के कारण उन्हें क्रेडिट ऑफिसर का काम सौंपा गया, जबकि उन्हें इस विभाग का सीमित अनुभव था। मैनेजर पर दबाव बनाने का आरोप रवि राघवेंद्र ने अपने बयान में कहा कि बैंक मैनेजर रविश चंद्रा के कहने पर उन्हें कई लोन फाइलें दी जाती थीं। जब उन्होंने दस्तावेजों की जांच के बाद ही हस्ताक्षर करने की बात कही, तो उन पर उच्च अधिकारियों का दबाव बनाकर ट्रांसफर की धमकी दी और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। वे मैनेजर के निर्देश पर बिना पूरी जांच किए लोन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने लगे। फर्जी लोन और संदिग्ध लोगों की एंट्री बैंक में अक्सर कृष्णा कुमार (डीआरपी), विपिन, राहुल, रवि और अमित नाम के लोग आते-जाते थे, जो खुद को डीआरपी बताते थे। मैनेजर के माध्यम से आए लोन प्रस्तावों को प्रोसेस कर उन्हें फिनैकल (Finacle) में खाता खोलने के लिए दिया जाता था। राज किशोर राय के मामले में उन्होंने बताया कि संबंधित व्यक्ति अपनी मां और अन्य लोगों के साथ बैंक आया था, लेकिन लोन की प्रक्रिया मैनेजर के केबिन में तय हुई। उन्होंने स्वीकार किया कि दुकान के सत्यापन से जुड़े कागजात पर उन्होंने बिना जांच के हस्ताक्षर कर दिए। कोटेशन और वेरिफिकेशन में गड़बड़ी विपिन इंटरप्राइजेज से जुड़े कोटेशन के बारे में उन्होंने स्पष्ट किया कि उसका सत्यापन बैंक मैनेजर की ओर से किया गया था, उन्होंने खुद कोई जांच नहीं की। जांच टीम ने भी उठाए सवाल कुछ समय बाद सेंट्रल ऑफिस की जांच टीम बैंक आई, जिसने अपनी रिपोर्ट में बताया कि रवि राघवेंद्र को क्रेडिट काम की पर्याप्त जानकारी नहीं थी। इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) की दरभंगा शाखा के असिस्टेंट मैनेजर रवि राघवेंद्र आज अरेस्ट हुए है। ये गिरफ्तारी बैंकिंग सिस्टम में 2 करोड़ रुपये के लोन फ्रॉड मामले में हुई है। इन्होंने बंद पड़ी कंपनी में पैसे भेजे थे। आरोपी का कहना है कि सब कुछ मैनेजर के केबिन में तय होता था। उनके दबाव में आकर इन्होंने बिना जांच किए और बिना देखे की पेपर पर साइन कर दिए। साइबर डीएसपी बिपिन बिहारी ने आज जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) में लोन के नाम पर संगठित तरीके से गलत काम किया जा रहा था। इस संबंध में साइबर थाना में 15 मार्च 2026 को एफआईआर दर्ज हुई थी। कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के केवटगामा गांव निवासी राजकिशोर राय ने एफआईआर दर्ज कराया था। जिसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें कोई लोन मिला ही नहीं लेकिन, बैंक के अधिकारी उनके पास लोन लेने पहुंच गए। इस मामले में सबसे पहले विपिन पासवान नाम के आरोपी की गिरफ्तारी की गई। पुलिस जांच के दौरान उसके घर से कई संदिग्ध दस्तावेज, लोन पेपर और अलग-अलग फर्जी इंटरप्राइजेज से जुड़े कागजात बरामद किए। फर्जी लोन करवाते थे पास विपिन पासवान से पूछताछ में सामने आया कि विपिन और उसके गांव का ही कृष्णा पासवान, जो उद्योग विभाग में कार्यरत है। दोनों मिलकर बैंक अधिकारियों के साथ साजिश कर फर्जी लोन पास करवाते थे। जांच में यह भी खुलासा हुआ कि बैंक के असिस्टेंट मैनेजर रवि राघवेंद्र की भूमिका संदिग्ध है, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उन पर आरोप है कि वे फर्जी रिपोर्ट तैयार कर लोन पास करवाते थे। एक मामले में राज किशोर राय के नाम पर 18 लाख रुपये का लोन पास किया गया, जबकि जांच में पाया गया कि उनके नाम पर कोई मिठाई की दुकान अस्तित्व में ही नहीं है। खुद संबंधित व्यक्ति को भी इस लोन की जानकारी नहीं थी। इनके नाम से लोन तो पास हुआ, लेकिन पैसे इन्हें मिले नहीं थे। 4 महीने में 2 करोड़ का ट्रांजैक्शन पुलिस के अनुसार, लोन की राशि विपिन पासवान के एक्सिस बैंक के करंट अकाउंट में ट्रांसफर की जाती थी। बैंक स्टेटमेंट की जांच में 4 महीनों में करीब 2 करोड़ रुपये के ट्रांजैक्शन का खुलासा हुआ है। ये सभी लोन प्रधानमंत्री खाद्य प्रसंस्करण योजना के तहत लिए गए थे, जिसमें कम ब्याज दर और 50% सब्सिडी का फायदा मिलता है। बंद कंपनी के नाम पर पैसै ट्रांसफर किए डीएसपी ने बताया कि लोन की राशि आगे एक चमड़े के बैग बनाने वाली कंपनी में ट्रांसफर की गई, जो जांच में बंद पाई गई। इस पूरे मामले में अब तक 14 लोन की पुष्टि हुई है। जबकि, अन्य मामलों की जांच जारी है। इस गिरोह में कुल चार लोगों की संलिप्तता सामने आई है। विपिन पासवान गिरफ्तार हो चुका है, जबकि कृष्णा पासवान फिलहाल फरार है। वहीं, उस समय के शाखा प्रबंधक रविश चंद्रा भी फरार हैं, जिनकी वर्तमान पोस्टिंग अरवल शाखा में है। साइबर डीएसपी ने कहा कि इस मामले में उद्योग विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों से भी डाटा लिया जाएगा और यह पता लगाया जाएगा कि और किन-किन लोगों की संलिप्तता है।उन्होंने स्पष्ट किया कि यह पूरा मामला सरकारी योजना के तहत मिलने वाले लोन का दुरुपयोग कर करोड़ों रुपये की हेराफेरी का है। पुलिस फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी कर रही है और जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा होगा। लोन नहीं मिला, लेकिन, किस्त मांगने पहुंचे अधिकारी मामला कुशेश्वरस्थान थाना क्षेत्र के केवटगामा गांव निवासी राजकिशोर राय से जुड़ा है, जो बिहार से बाहर काम करते हैं। उन्होंने गांव में दुकान खोलने के लिए लोन लेने का सोचा था। इसी दौरान उनकी मुलाकात ब्रजेश चौपाल से हुई, जिसने बैंक में पहचान का भरोसा दिलाया। आरोप है कि ब्रजेश चौपाल उन्हें दरभंगा स्थित IOB शाखा ले गया, जहां उनके आधार, पैन समेत कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए। कुछ समय के लिए उनका मोबाइल सिम भी अपने कब्जे में ले लिया गया। बाद में उन्हें बताया गया कि लोन पास नहीं हुआ। लेकिन कुछ महीनों बाद बैंक अधिकारी उनके घर पहुंचकर 18 लाख रुपये के लोन की किस्त मांगने लगे, जिससे पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ। जान से मारने की धमकी का आरोप पीड़ित ने आरोप लगाया कि मामले को दबाने के लिए आरोपियों ने 3 लाख रुपये देने और 70 लाख की सब्सिडी दिलाने का लालच दिया। विरोध करने पर जान से मारने की धमकी भी दी गई। करोड़ों के लोन फ्रॉड मामले में गिरफ्तार इंडियन ओवरसीज बैंक (IOB) के असिस्टेंट मैनेजर रवि राघवेंद्र ने आज साइबर थाना परिसर में निरीक्षक श्वेता पोद्दार को अपना बयान दिया। इसमें उन्होंने बताया कि उन्होंने 6 मई 2020 को बैंक पीओ के रूप में चेन्नई में ज्वाइन किया था। इसके बाद उनकी पोस्टिंग रांची, कोलकाता और दुर्गापुर में रही, जहां वे सामान्य बैंकिंग काम जैसे पासबुक एंट्री, कैश भुगतान और खाता खोलने का काम करते थे। 15 मई को दभंगा में हुई पोस्टिंग 15 मई 2023 को उनकी पोस्टिंग दरभंगा के कटहलवाड़ी शाखा में हुई, जहां कुछ समय बाद रविश चंद्रा शाखा प्रबंधक बनकर आए। बैंक में स्टाफ की कमी के कारण उन्हें क्रेडिट ऑफिसर का काम सौंपा गया, जबकि उन्हें इस विभाग का सीमित अनुभव था। मैनेजर पर दबाव बनाने का आरोप रवि राघवेंद्र ने अपने बयान में कहा कि बैंक मैनेजर रविश चंद्रा के कहने पर उन्हें कई लोन फाइलें दी जाती थीं। जब उन्होंने दस्तावेजों की जांच के बाद ही हस्ताक्षर करने की बात कही, तो उन पर उच्च अधिकारियों का दबाव बनाकर ट्रांसफर की धमकी दी और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। वे मैनेजर के निर्देश पर बिना पूरी जांच किए लोन दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने लगे। फर्जी लोन और संदिग्ध लोगों की एंट्री बैंक में अक्सर कृष्णा कुमार (डीआरपी), विपिन, राहुल, रवि और अमित नाम के लोग आते-जाते थे, जो खुद को डीआरपी बताते थे। मैनेजर के माध्यम से आए लोन प्रस्तावों को प्रोसेस कर उन्हें फिनैकल (Finacle) में खाता खोलने के लिए दिया जाता था। राज किशोर राय के मामले में उन्होंने बताया कि संबंधित व्यक्ति अपनी मां और अन्य लोगों के साथ बैंक आया था, लेकिन लोन की प्रक्रिया मैनेजर के केबिन में तय हुई। उन्होंने स्वीकार किया कि दुकान के सत्यापन से जुड़े कागजात पर उन्होंने बिना जांच के हस्ताक्षर कर दिए। कोटेशन और वेरिफिकेशन में गड़बड़ी विपिन इंटरप्राइजेज से जुड़े कोटेशन के बारे में उन्होंने स्पष्ट किया कि उसका सत्यापन बैंक मैनेजर की ओर से किया गया था, उन्होंने खुद कोई जांच नहीं की। जांच टीम ने भी उठाए सवाल कुछ समय बाद सेंट्रल ऑफिस की जांच टीम बैंक आई, जिसने अपनी रिपोर्ट में बताया कि रवि राघवेंद्र को क्रेडिट काम की पर्याप्त जानकारी नहीं थी।


