बांका में 19 जोड़ों ने थामा एक-दूसरे का हाथ:आर्ट एंड क्राफ्ट विलेज में सामूहिक विवाह, मंत्रोच्चारण-रीति-रिवाजों के साथ वरमाला

बांका में 19 जोड़ों ने थामा एक-दूसरे का हाथ:आर्ट एंड क्राफ्ट विलेज में सामूहिक विवाह, मंत्रोच्चारण-रीति-रिवाजों के साथ वरमाला

बांका के मंदार पर्वत स्थित आर्ट एंड क्राफ्ट विलेज में रविवार को 19 जोड़ों का नि:शुल्क सामूहिक विवाह संपन्न हुआ। इस आयोजन ने सामाजिक समरसता और दहेज-मुक्त विवाह की अनूठी मिसाल पेश की। बौसी प्रखंड में आयोजित इस समारोह में सभी जोड़े एक ही मंडप में अलग-अलग विवाह स्थलों पर परिणय सूत्र में बंधे। बिहार- झारखंड के विभिन्न हिस्सों से आए युवा इस सामूहिक विवाह में बांका के साथ-साथ बिहार और झारखंड के विभिन्न हिस्सों से आए युवाओं ने हिस्सा लिया। पंडित अवधेश ठाकुर के वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ सभी विवाह रस्में परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुईं। विवाह से पहले वरमाला कार्यक्रम और सामूहिक फोटो सेशन भी आयोजित किया गया। आयोजकों ने विवाह में शामिल होने वाले सभी जोड़ों की आयु की जांच की। सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, वर की न्यूनतम आयु 19 वर्ष और वधू की न्यूनतम आयु 18 वर्ष अनिवार्य थी। केवल आयु मानकों पर खरे उतरने वाले जोड़ों को ही इस दहेज-मुक्त विवाह समारोह में शामिल किया गया। सामाजिक एकता और समरसता का दिया संदेश विवाह के बाद प्रीतिभोज का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने भाग लिया और इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने। विदाई के समय परिजनों की आंखें नम होने से भावुक दृश्य देखने को मिले। इस सामूहिक विवाह की खास बात यह रही कि इसमें हिंदू समुदाय के साथ-साथ आदिवासी समुदाय के जोड़ों ने भी विवाह किया, जिससे सामाजिक एकता और समरसता का संदेश गया। उपस्थित लोगों ने ऐसे आयोजनों की सराहना करते हुए कहा कि इनसे समाज में नई चेतना आती है, दहेज-मुक्त विवाह को बढ़ावा मिलता है और निर्धन परिवारों को बड़ा सहारा मिलता है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में आर्ट एंड क्राफ्ट विलेज की संवेदक पूजा अग्रवाल, मनीष अग्रवाल, सीताराम अग्रवाल, राजाराम अग्रवाल सहित कई समाजसेवियों का सक्रिय योगदान रहा। व्यावसायिक संघ के अध्यक्ष राजू सिंह, शिवकुमार साह, कौतुक बाजार से जुड़े मनीष केडिया, वार्ड पार्षद गुलशन कुमार सिंह, विनीत पंजियारा, अजय साह, नवनीत कुमार और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस आयोजन में सहयोग किया। आयोजकों ने बताया कि भविष्य में भी इस तरह के सामाजिक और दहेज-मुक्त विवाह कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि समाज में सकारात्मक बदलाव को और मजबूती मिल सके। बांका के मंदार पर्वत स्थित आर्ट एंड क्राफ्ट विलेज में रविवार को 19 जोड़ों का नि:शुल्क सामूहिक विवाह संपन्न हुआ। इस आयोजन ने सामाजिक समरसता और दहेज-मुक्त विवाह की अनूठी मिसाल पेश की। बौसी प्रखंड में आयोजित इस समारोह में सभी जोड़े एक ही मंडप में अलग-अलग विवाह स्थलों पर परिणय सूत्र में बंधे। बिहार- झारखंड के विभिन्न हिस्सों से आए युवा इस सामूहिक विवाह में बांका के साथ-साथ बिहार और झारखंड के विभिन्न हिस्सों से आए युवाओं ने हिस्सा लिया। पंडित अवधेश ठाकुर के वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ सभी विवाह रस्में परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुईं। विवाह से पहले वरमाला कार्यक्रम और सामूहिक फोटो सेशन भी आयोजित किया गया। आयोजकों ने विवाह में शामिल होने वाले सभी जोड़ों की आयु की जांच की। सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, वर की न्यूनतम आयु 19 वर्ष और वधू की न्यूनतम आयु 18 वर्ष अनिवार्य थी। केवल आयु मानकों पर खरे उतरने वाले जोड़ों को ही इस दहेज-मुक्त विवाह समारोह में शामिल किया गया। सामाजिक एकता और समरसता का दिया संदेश विवाह के बाद प्रीतिभोज का आयोजन किया गया, जिसमें हजारों लोगों ने भाग लिया और इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बने। विदाई के समय परिजनों की आंखें नम होने से भावुक दृश्य देखने को मिले। इस सामूहिक विवाह की खास बात यह रही कि इसमें हिंदू समुदाय के साथ-साथ आदिवासी समुदाय के जोड़ों ने भी विवाह किया, जिससे सामाजिक एकता और समरसता का संदेश गया। उपस्थित लोगों ने ऐसे आयोजनों की सराहना करते हुए कहा कि इनसे समाज में नई चेतना आती है, दहेज-मुक्त विवाह को बढ़ावा मिलता है और निर्धन परिवारों को बड़ा सहारा मिलता है। इस कार्यक्रम को सफल बनाने में आर्ट एंड क्राफ्ट विलेज की संवेदक पूजा अग्रवाल, मनीष अग्रवाल, सीताराम अग्रवाल, राजाराम अग्रवाल सहित कई समाजसेवियों का सक्रिय योगदान रहा। व्यावसायिक संघ के अध्यक्ष राजू सिंह, शिवकुमार साह, कौतुक बाजार से जुड़े मनीष केडिया, वार्ड पार्षद गुलशन कुमार सिंह, विनीत पंजियारा, अजय साह, नवनीत कुमार और अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी इस आयोजन में सहयोग किया। आयोजकों ने बताया कि भविष्य में भी इस तरह के सामाजिक और दहेज-मुक्त विवाह कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि समाज में सकारात्मक बदलाव को और मजबूती मिल सके।  

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