मेडिकल कॉलेज में डायलिसिस के लिए 150 मरीजों की वेटिंग:हर समय 10 किडनी रोगी भर्ती, डॉक्टरों ने कहा-डायबिटीज और हाई बीपी किडनी रोग के सबसे बड़े कारण

मेडिकल कॉलेज में डायलिसिस के लिए 150 मरीजों की वेटिंग:हर समय 10 किडनी रोगी भर्ती, डॉक्टरों ने कहा-डायबिटीज और हाई बीपी किडनी रोग के सबसे बड़े कारण

अयोध्या जिले में किडनी से जुड़ी बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। राजर्षि दशरथ राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय में हालात यह हैं कि यहां हर समय करीब 10 किडनी रोगी भर्ती रहते हैं, जबकि डायलिसिस कराने के लिए लगभग 150 मरीजों की लंबी वेटिंग चल रही है। जरूरत पड़ने पर इमरजेंसी में भी मरीजों की डायलिसिस की व्यवस्था की जाती है। 12 मार्च को किडनी जागरूकता दिवस के अवसर पर मेडिकल कॉलेज में लोगों को किडनी की बीमारियों से बचाव और समय पर इलाज के प्रति जागरूक किया जाएगा। मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. अरविंद कुमार ने बताया कि किडनी की बीमारी के पीछे कई कारण जिम्मेदार होते हैं, जिनमें डायबिटीज और उच्च रक्तचाप सबसे प्रमुख हैं। लंबे समय तक शुगर और बीपी अनियंत्रित रहने से किडनी पर गंभीर प्रभाव पड़ता है। दर्द निवारक दवाइयों का सेवन नुकसानदायक उन्होंने बताया कि कई लोग दर्द से राहत पाने के लिए लगातार दर्द निवारक दवाइयों का सेवन करते रहते हैं, जो किडनी के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है। इसके अलावा लंबे समय तक उल्टी और दस्त होने से शरीर में पानी और जरूरी तत्वों की कमी हो जाती है, जिससे किडनी प्रभावित हो सकती है। ध्यान रखना जरुरी डॉ. अरविंद कुमार के अनुसार समय पर इलाज न मिलने पर यह समस्या गंभीर रूप ले सकती है। किडनी रोग से बचाव के लिए लोगों को अपनी जीवनशैली और स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहना जरूरी है। डायबिटीज और ब्लड प्रेशर के मरीजों को नियमित जांच कराते रहना चाहिए और शुगर व बीपी को नियंत्रित रखना चाहिए। किसी भी प्रकार की दवा बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं लेनी चाहिए, खासकर दर्द निवारक दवाओं का सेवन चिकित्सकीय परामर्श के बिना नहीं करना चाहिए। उन्होंने बताया कि किडनी की बीमारी के प्रमुख लक्षणों में पेशाब का कम या ज्यादा आना, शरीर में सूजन और कमजोरी शामिल हैं। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत डॉक्टर से परामर्श लेना चाहिए। नई डायलिसिस यूनिट के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू
मेडिकल कॉलेज में डायलिसिस सुविधाओं को बढ़ाने के लिए नई डायलिसिस यूनिट स्थापित करने की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। 24 मार्च 2024 को इस परियोजना के लिए इंडियन ऑयल के साथ एमओयू हुआ था, लेकिन प्रशासनिक प्रक्रियाओं के चलते काम आगे नहीं बढ़ पा रहा था। जनवरी में प्रिंसिपल डॉ. दिनेश सिंह मर्तोलिया के कार्यभार संभालने के बाद इस परियोजना में तेजी आई है और अब टेंडर प्रक्रिया शुरू की जा रही है। उस समय ब्लड बैंक के विभागाध्यक्ष डॉ. दिनेश कुमार सिंह और इंडियन ऑयल के वीके पाल के बीच एमओयू पर हस्ताक्षर हुए थे। पूर्व सांसद लल्लू सिंह के प्रयासों से यह परियोजना मेडिकल कॉलेज को मिली थी, जिसे जिले के लिए बड़ी स्वास्थ्य उपलब्धि माना गया था।

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