उमरिया जिले में फसल अवशेष (नरवाई) जलाने पर अब सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन ने इसे तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित कर दिया है। उल्लंघन करने वाले किसानों पर पर्यावरणीय मुआवजा लगाया जाएगा। यह जानकारी उप संचालक कृषि संग्राम सिंह मरावी ने बुधवार को किसान कल्याण एवं कृषि विकास कार्यालय में आयोजित बैठक में दी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) के नियमों के तहत जुर्माने की राशि तय की गई है। 2 एकड़ या उससे कम भूमि वाले किसानों पर प्रति घटना 2,500 रुपये का जुर्माना लगेगा। 2 एकड़ से अधिक और 5 एकड़ से कम भूमि पर 5,000 रुपये, जबकि 5 एकड़ से अधिक भूमि धारकों पर 15,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। जिले में फसल कटाई के बाद नरवाई जलाना पूरी तरह से प्रतिबंधित रहेगा। इस प्रतिबंध का मुख्य उद्देश्य वायु प्रदूषण को रोकना, आगजनी की घटनाओं पर नियंत्रण पाना और भूमि की उर्वरा शक्ति को बनाए रखना है। प्रशासन ने हार्वेस्टर मशीन संचालकों के लिए भी विशेष निर्देश जारी किए हैं। उन्हें स्ट्रॉ मैनेजमेंट सिस्टम या स्ट्रा-रीपर मशीन का उपयोग करके ही फसल कटाई करनी होगी। इन उपकरणों के बिना कटाई करने पर मशीन जब्त की जा सकती है। इसके अतिरिक्त, सभी कम्बाइन हार्वेस्टर संचालकों को उप संचालक कृषि कार्यालय में अपना पंजीयन कराना अनिवार्य होगा। आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए एक और महत्वपूर्ण निर्देश दिया गया है। हार्वेस्टर से भूसा बनाते समय निकलने वाली चिंगारी से आग लगने का खतरा रहता है। इसे देखते हुए मशीन संचालकों को अग्निशमन उपकरण, रेत और पानी की पर्याप्त व्यवस्था रखने को कहा गया है। इन आदेशों का उल्लंघन करने वालों पर पर्यावरणीय मुआवजे के साथ-साथ अन्य दंडात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।


