142 सीमावर्ती गांवों को विलेज प्रोग्राम-II का मिलेगा लाभ:700 करोड़ से अधिक खर्च, आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे गांव

142 सीमावर्ती गांवों को विलेज प्रोग्राम-II का मिलेगा लाभ:700 करोड़ से अधिक खर्च, आधुनिक सुविधाओं से लैस होंगे गांव

भारत-नेपाल सीमा से सटे बिहार के गांवों में जल्द ही आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II के तहत नेपाल सीमा से लगे 142 गांवों को विकसित करने की व्यापक योजना तैयार की गई है। इन गांवों के समग्र विकास पर करीब 700 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च होने का अनुमान है। पहले चरण में नेपाल से सटे 142 गांवों के विकास की रूपरेखा बन चुकी है। इनमें किशनगंज के 22, अररिया के 12, मधुबनी के 36, सीतामढ़ी के 9, बेतिया (पश्चिम चंपारण) के 31, मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) के 12 और सुपौल के 30 गांव शामिल हैं। 218 योजनाओं का केंद्र सरकार को भेजा गया रिपोर्ट किशनगंज जिले में 22 गांवों के लिए 112 करोड़ रुपये की 218 योजनाओं का विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर केंद्र सरकार को भेज दिया गया है। प्रत्येक गांव पर औसतन लगभग 5 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। इन गांवों में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य केंद्र, शिक्षा सुविधाएं, आजीविका के साधन और पर्यटन केंद्र विकसित किए जाएंगे। इन सीमावर्ती गांवों में पलायन रोकने, सुरक्षा मजबूत करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जाएगा। दूसरे चरण में किशनगंज के 290 सहित अन्य जिलों के कई और गांवों को इस योजना में शामिल किया जा सकता है। सातों जिलों के अधिकारियों के साथ की थी बैठक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने फरवरी 2026 में सीमांचल के तीन दिवसीय दौरे के दौरान अररिया में सातों जिलों के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की थी। इस बैठक में उन्होंने वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत चयनित गांवों में विकास कार्यों को तेज गति से पूरा करने के सख्त निर्देश दिए थे। गृहमंत्री के निर्देशों के बाद सभी जिलों में कार्ययोजना शुरू हो गई है। नो-मैंस लैंड से अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ अन्य सुरक्षा संबंधी कार्रवाई भी तेज कर दी गई है। वाइब्रेंट विलेज योजना भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती गांवों से पलायन को रोकना, उन्हें सुरक्षित, संरक्षित और जीवंत बनाना तथा स्थानीय निवासियों को बेहतर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है। यह कार्यक्रम विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। किशनगंज सहित अन्य सीमा जिलों के गांव अब आधुनिक भारत का प्रतिबिंब बनेंगे। स्थानीय लोगों में उत्साह है कि इन गांवों में रोजगार बढ़ेगा, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और सीमा क्षेत्र मजबूत होगा। जिला प्रशासन इन योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है। भारत-नेपाल सीमा से सटे बिहार के गांवों में जल्द ही आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी। केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-II के तहत नेपाल सीमा से लगे 142 गांवों को विकसित करने की व्यापक योजना तैयार की गई है। इन गांवों के समग्र विकास पर करीब 700 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च होने का अनुमान है। पहले चरण में नेपाल से सटे 142 गांवों के विकास की रूपरेखा बन चुकी है। इनमें किशनगंज के 22, अररिया के 12, मधुबनी के 36, सीतामढ़ी के 9, बेतिया (पश्चिम चंपारण) के 31, मोतिहारी (पूर्वी चंपारण) के 12 और सुपौल के 30 गांव शामिल हैं। 218 योजनाओं का केंद्र सरकार को भेजा गया रिपोर्ट किशनगंज जिले में 22 गांवों के लिए 112 करोड़ रुपये की 218 योजनाओं का विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार कर केंद्र सरकार को भेज दिया गया है। प्रत्येक गांव पर औसतन लगभग 5 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है। इन गांवों में सड़क, बिजली, पानी, स्वास्थ्य केंद्र, शिक्षा सुविधाएं, आजीविका के साधन और पर्यटन केंद्र विकसित किए जाएंगे। इन सीमावर्ती गांवों में पलायन रोकने, सुरक्षा मजबूत करने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया जाएगा। दूसरे चरण में किशनगंज के 290 सहित अन्य जिलों के कई और गांवों को इस योजना में शामिल किया जा सकता है। सातों जिलों के अधिकारियों के साथ की थी बैठक केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने फरवरी 2026 में सीमांचल के तीन दिवसीय दौरे के दौरान अररिया में सातों जिलों के अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक की थी। इस बैठक में उन्होंने वाइब्रेंट विलेज योजना के तहत चयनित गांवों में विकास कार्यों को तेज गति से पूरा करने के सख्त निर्देश दिए थे। गृहमंत्री के निर्देशों के बाद सभी जिलों में कार्ययोजना शुरू हो गई है। नो-मैंस लैंड से अतिक्रमण हटाने के साथ-साथ अन्य सुरक्षा संबंधी कार्रवाई भी तेज कर दी गई है। वाइब्रेंट विलेज योजना भारत सरकार की एक महत्वाकांक्षी पहल है। इसका मुख्य उद्देश्य सीमावर्ती गांवों से पलायन को रोकना, उन्हें सुरक्षित, संरक्षित और जीवंत बनाना तथा स्थानीय निवासियों को बेहतर आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है। यह कार्यक्रम विकसित भारत 2047 के विजन को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। किशनगंज सहित अन्य सीमा जिलों के गांव अब आधुनिक भारत का प्रतिबिंब बनेंगे। स्थानीय लोगों में उत्साह है कि इन गांवों में रोजगार बढ़ेगा, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और सीमा क्षेत्र मजबूत होगा। जिला प्रशासन इन योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करने के लिए सक्रिय रूप से काम कर रहा है।  

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